कल्याण पूर्व के होली होराइजन स्कूल के बच्चों के साथ प्राचार्य डॉ. रमाकांत क्षितिज फोटो नवभारत
ठाणे

Success Story: 11 वर्षों तक 100% रिजल्ट देने वाले डॉ. रमाकांत क्षितिज, शिक्षा के साथ सिखा रहे हैं जीने की कला

Teacher's Day Special Story: कल्याण पूर्व के होली होराइजन स्कूल के संस्थापक-प्राचार्य डॉ. रमाकांत क्षितिज शिक्षा, साहित्य और नशामुक्ति अभियान के जरिए समाज और बच्चों के भविष्य को नई दिशा दे रहे हैं।

सूर्यप्रकाश मिश्र, आकाश मसने

Dr. Ramakant Kshitij Success Story: शिक्षक केवल पाठ्यक्रम पढ़ाने वाला व्यक्ति नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के व्यक्तित्व और भविष्य को दिशा देने वाला मार्गदर्शक होता है। वर्ष 2004 में होली होराइजन स्कूल, कल्याण पूर्व के पिछड़े क्षेत्र में स्थापना कर मध्यम व गरीब वर्ग बच्चों में शिक्षा व संस्कार की अलख जगाने वाले डॉ. क्षितिज आज भी संस्थापक-प्राचार्य के रूप में विद्यालय और समाज को निरंतर मार्गदर्शन दे रहे हैं। हिंदी उनके अध्यापन का प्रमुख विषय रहा है और शिक्षा के क्षेत्र में उनका योगदान अत्यंत उल्लेखनीय है। आइए शिक्षक दिवस के अवसर पर जानते हैं डॉ. रमाकांत क्षितिज की पूरी कहानी।

कौन हैं डॉ. रमाकांत क्षितिज?

शिक्षक दिवस के अवसर पर जब हम एक आदर्श शिक्षक की तलाश करते हैं, तो डॉ. रमाकांत क्षितिज का नाम विशेष सम्मान के साथ सामने आता है। वर्ष 2004 में होली होराइजन स्कूल, कल्याण पूर्व की स्थापना से जुड़े डॉ. क्षितिज ने संस्थापक-प्राचार्य के रूप में विद्यालय को केवल शैक्षणिक संस्था नहीं, बल्कि संस्कार और व्यक्तित्व निर्माण का केंद्र बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

डॉ. रमाकांत क्षितिज के शिक्षक जीवन की उपलब्धि

उनकी सबसे उल्लेखनीय शैक्षणिक उपलब्धियों में कक्षा 10 के परीक्षा परिणाम का लगातार 11 वर्षों तक 100 प्रतिशत रहना शामिल है। इतना ही नहीं, उनके नेतृत्व में किसी भी वर्ष यह परिणाम 99 प्रतिशत से नीचे नहीं गया। यह उपलब्धि केवल आंकड़ा नहीं, बल्कि उनके नेतृत्व, अनुशासन, शिक्षण-पद्धति और विद्यार्थियों के प्रति निरंतर समर्पण की पहचान है।

उनके मार्गदर्शन में शिक्षा प्राप्त करने वाले अनेक विद्यार्थी आज डॉक्टर, इंजीनियर, चार्टर्ड अकाउंटेंट, वकील तथा अन्य प्रतिष्ठित क्षेत्रों में कार्य करते हुए अपने परिवार, समाज और देश के विकास में योगदान दे रहे हैं। यही उनके शिक्षक जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक है।

बच्चों के साथ नाश्ता करते प्राचार्य डॉ. रमाकांत क्षितिज

डॉ. क्षितिज ने शिक्षा व साहित्य के बनाई पहचान

डॉ. क्षितिज की प्रतिभा शिक्षा तक सीमित नहीं है। मुंबई विश्वविद्यालय से पीएच.डी. की उपाधि प्राप्त करने के साथ उन्होंने साहित्य के क्षेत्र में भी अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। हिंदी, मराठी और अवधी में कविता, कहानी एवं संस्मरण सहित अनेक विधाओं में उनका सृजनात्मक योगदान उल्लेखनीय है।

वे दर्जनों पुस्तकों के लेखक हैं। उनके कहानी-संग्रह ‘जीवन संघर्ष’ को वर्ष 2023 में महाराष्ट्र राज्य हिंदी साहित्य अकादमी का पुरस्कार प्राप्त होना उनके साहित्यिक अवदान की महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

नशा मुक्ति के खिलाफ अभियान

आज विशेषकर मुंबई एव आसपास के शहरों में युवा और विद्यार्थी नशे की चपेट में हैं। सरकार भी बढ़ते नशे को लेकर परेशान है। एक शिक्षक के रूप में डॉ. क्षितिज शुरू से ही नशे के खिलाफ अभियान चलाते रहे हैं।

उनका सबसे बड़ा योगदान विद्यार्थियों के चरित्र और चिंतन के निर्माण में दिखाई देता है। वे किशोर विद्यार्थियों और अभिभावकों से शारीरिक, मानसिक एवं शैक्षणिक चुनौतियों पर निरंतर संवाद करते हैं। नशामुक्ति, माता-पिता के प्रति कर्तव्यबोध, सामाजिक जिम्मेदारी, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और अंधविश्वास से मुक्ति जैसे विषयों पर वे विद्यार्थियों को निरंतर प्रेरित करते हैं।

महाराष्ट्र से लेकर अपने मूल ग्राम सुल्तानपुर के अमेठी तक लगातार अभियान चलाकर वे बच्चों को नशे से दूर रहने, माता-पिता के प्रति कर्तव्य समझने, अंधविश्वास एवं रूढ़िवादिता से मुक्त होकर वैज्ञानिक और प्रगतिशील सोच अपनाने तथा समाज और देश के लिए योगदान देने की प्रेरणा देते हैं।

विद्यार्थियों के जीवन में लाया बदलाव

डॉ. रमाकांत क्षितिज की उपलब्धियों का सार यही है कि उन्होंने अंकों के साथ संस्कार, सफलता के साथ संवेदना और शिक्षा के साथ सामाजिक जिम्मेदारी को जोड़ा है। एक शिक्षक के रूप में उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि उन विद्यार्थियों का निर्माण है, जो जीवन में ऊंचाइयां हासिल करने के साथ-साथ अच्छे इंसान बनने की प्रेरणा भी अपने साथ लेकर आगे बढ़ते हैं।

डॉ. क्षितिज शिक्षा को केवल अंक और रोजगार प्राप्त करने का माध्यम नहीं मानते। वे विद्यार्थियों में मानवीय संवेदना, सामाजिक जिम्मेदारी और वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने पर विशेष बल देते हैं।

शिक्षक दिवस पर डॉ. रमाकांत क्षितिज का व्यक्तित्व हमें यह संदेश देता है कि सच्चा शिक्षक वही है, जो विद्यार्थियों को केवल सफल नहीं, बल्कि संवेदनशील, जिम्मेदार और श्रेष्ठ इंसान बनने की राह दिखाए।

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