Raj Thackeray Thane Speech: महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के प्रमुख राज ठाकरे ने ठाणे के गडकरी रंगायतन में आयोजित मनसे पदाधिकारियों के एक बड़े सम्मेलन को संबोधित करते हुए देश और राज्य की वर्तमान राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक स्थिति पर चौतरफा हमला बोला है।
उन्होंने आरोप लगाया कि लोगों का ध्यान महंगाई, बेरोजगारी और गिरती शिक्षा व्यवस्था जैसे बुनियादी मुद्दों से भटकाने के लिए उन्हें जानबूझकर धर्मांध बनाया जा रहा है और देश में नफरत का माहौल तैयार किया जा रहा है।
सरकार द्वारा देश की जीडीपी ग्रोथ 7.8% होने और चीन-अमेरिका से आगे निकलने के दावों को राज ठाकरे ने पूरी तरह खारिज कर दिया। उन्होंने Ministry of Corporate Affairs के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि वित्तीय वर्ष 2021 से 2026 के बीच भारत में काम कर रही 503 विदेशी कंपनियों ने अपना बोरिया-बिस्तर समेट लिया है।
इसके अलावा, साल 2018-19 से अब तक लगभग 13,000 ऐसे अमीर भारतीय उद्योगपति देश छोड़कर चले गए हैं जो भारत में 200 से 250 करोड़ रुपये तक का निवेश करने की क्षमता रखते थे।
उन्होंने तंज कसते हुए पूछा कि यदि देश की आर्थिक स्थिति इतनी ही मजबूत है, तो खुद प्रधानमंत्री विदेशों से वीडियो बनाकर भारतीयों को विदेश न जाने और सोना न खरीदने की सलाह क्यों दे रहे हैं? उन्होंने चेतावनी दी कि जिस तरह पेपर लीक और खराब शिक्षा व्यवस्था के खिलाफ छात्र सड़कों पर उतरे हैं, उसी तरह आर्थिक बदहाली के कारण जल्द ही पूरा देश सड़कों पर उतर सकता है।
राज ठाकरे ने लोगों से अपील की कि वे अपने धर्म पर गर्व करें लेकिन अंधे न बनें। उन्होंने टीवी और सोशल मीडिया पर भस्म लगाकर अजीबोगरीब कहानियां सुनाने वाले कथावाचकों पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने ऐसे ही एक कथावाचक की कहानी का मजाक उड़ाते हुए बताया, एक कथावाचक कह रहा था कि रावण और राम के युद्ध के बाद हनुमान जी ने सारे अस्त्र 10,000 किलोमीटर दूर फेंक दिए थे, जिसे अस्त्रालय' कहा गया और बाद में वही ऑस्ट्रेलिया बन गया।
ठाकरे ने हंसते हुए पूछा कि यदि अस्त्रालय से ऑस्ट्रेलिया बना, तो हॉलैंड, न्यूजीलैंड और इंग्लैंड का नाम कैसे पड़ा? उन्होंने कहा कि यह सब जनता को असली मुद्दों से दूर रखने के लिए परोसा जा रहा है।
पुणे में अमित ठाकरे के दौरे के वक्त हुए फोटो विवाद पर बोलते हुए राज ठाकरे ने स्पष्ट किया कि सरकारी दफ्तरों और स्कूलों में प्रधानमंत्री की तस्वीर अवश्य लगाई जानी चाहिए, क्योंकि वे देश के संवैधानिक प्रमुख हैं और पद का सम्मान होना चाहिए।
लेकिन उनकी सख्त आपत्ति यह थी कि वर्तमान नेताओं या प्रधानमंत्रियों की तस्वीर को छत्रपति शिवाजी महाराज, डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर और महात्मा ज्योतिराव फुले जैसे महान राष्ट्रनायकों की कतार में नहीं लगाया जा सकता। प्रधानमंत्री की तस्वीर हमेशा दूसरी दीवार पर अलग से लगाई जानी चाहिए, न कि महापुरुषों की श्रेणी में। उन्होंने अदालतों और सभी सरकारी संस्थानों को इस गलती को तुरंत सुधारने की चेतावनी दी।
राज ठाकरे ने चुनाव आयोग की मतदाता सूची का हवाला देते हुए एक बहुत बड़ा चुनावी खुलासा किया। उन्होंने बताया कि कल्याण ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र में पिछले चुनाव के समय जो नए मतदाता जोड़े गए थे, उनमें से 95% मतदाताओं के नाम फर्जी पाए जाने के बाद हटा दिए गए हैं।
पूरे महाराष्ट्र में लगभग 2 करोड़ से अधिक मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। उन्होंने गंभीर आरोप लगाया कि इसका सीधा मतलब है कि 2024 के लोकसभा और विधानसभा चुनावों में सत्ताधारी दल ने खोटे मतदाताओं के दम पर जीत हासिल की थी।
इसके साथ ही उन्होंने एक बेहद गंभीर आशंका जताते हुए सुजाण हिंदू और मुस्लिम नागरिकों को सचेत किया कि आगामी गणेशोत्सव के दौरान देश और विशेष रूप से महाराष्ट्र में दंगे भड़काने की गहरी साजिश रची जा सकती है, ताकि लोग असली समस्याओं को भूलकर आपस में ही उलझ जाएं।
त्योहारों में डीजे और डॉल्बी सिस्टम के उपयोग पर नाराजगी व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि वे शुरू से ही पारंपरिक तरीके से त्योहार मनाने के पक्ष में रहे हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री पर निशाना साधते हुए पूछा कि यदि नागपुर में डीजे पर प्रतिबंध लगाया जा सकता है, तो पूरे महाराष्ट्र में ऐसा क्यों नहीं हो सकता? उन्होंने कहा कि लेजर लाइट और तेज आवाज के कारण कई युवाओं की आंखें और कान खराब हो चुके हैं और कई लोगों को दिल का दौरा भी पड़ा है।
इसके अतिरिक्त, उन्होंने गोविंदा और दहीहंडी उत्सवों के दौरान मंच पर महिलाओं को नचाने जैसी उत्तर प्रदेश और बिहार की संस्कृति को महाराष्ट्र में थोपने पर गहरी आपत्ति जताई और अपनी समृद्ध विरासत को बनाए रखने की बात कही।