प्रतिमा के पास खड़े युवा (सोर्स: नवभारत फोटो)
ठाणे

सद्भाव की मिसाल! मुंब्रा में नियंत्रित हुई गणेश प्रतिमा, स्थानीय मुस्लिम युवाओं ने सहारा देकर बचाई

Communal harmony Mumbra: मुंब्रा में गणेशोत्सव के दौरान सामाजिक सौहार्द की मिसाल देखने को मिली। ट्रॉली का पहिया टूटने पर मुस्लिम युवाओं ने रातभर पहरा देकर गणेश प्रतिमा को सुरक्षित रखा।

सूर्यप्रकाश मिश्र, गोरक्ष पोफली

Mumbra Hindu Muslim Unity: हिंदू-मुस्लिम मिश्रित आबादी वाले मुंब्रा में सामाजिक सौहार्द और आपसी सहयोग की एक मिसाल देखने को मिली। गणेशोत्सव के लिए ले जाई जा रही करीब 20 फीट ऊंची गणेश प्रतिमा से भरी ट्रॉली का पहिया टूट जाने के बाद कुछ मुस्लिम युवाओं ने अन्य स्थानीय युवाओं के साथ मिलकर प्रतिमा को सुरक्षित रखने के लिए करीब चार घंटे तक प्रयास किया। उनकी इस पहल की गणेशोत्सव मंडल ने सराहना करते हुए आभार व्यक्त किया है।

जानकारी के मुताबिक, मुंब्रा के शंकर मंदिर परिसर में मार्कंडेय सेवा संस्था गणेशोत्सव मंडल की ओर से स्थापित गणेश प्रतिमा को भिवंडी के पद्मानगर की ओर ले जाया जा रहा था। रात करीब 12 बजे दाभोलकर नाका पहुंचने पर ट्रॉली का पहिया टूट गया। इससे ट्रॉली के असंतुलित होने और गणेश प्रतिमा को नुकसान पहुंचने की आशंका पैदा हो गई।

और आगे आए डॉ. आव्हाड के समर्थक

स्थिति को देखते हुए स्थानीय युवाओं ने तुरंत मदद के लिए हाथ बढ़ाया। विधायक डॉ. जितेंद्र आव्हाड के समर्थक आरिफ सय्यद उर्फ पापा, बासित शेख और शाहू ने अन्य युवाओं को मौके पर बुलाया। युवाओं ने ट्रॉली को सहारा देकर उसे पलटने से रोके रखा।

इसके बाद क्रेन की मदद से गणेश प्रतिमा को सावधानीपूर्वक ट्रॉली से नीचे उतारा गया। नई ट्रॉली आने तक प्रतिमा को सुरक्षित रखने की व्यवस्था की गई। नई ट्रॉली पहुंचने के बाद युवाओं की मदद से गणेश प्रतिमा को दोबारा उस पर चढ़ाया गया और करीब सुबह चार बजे उसे भिवंडी की ओर रवाना किया गया।

श्रीफल चढ़ाए

इस दौरान मुस्लिम युवाओं द्वारा गणेश प्रतिमा के समक्ष श्रीफल चढ़ाए जाने की बात भी सामने आई है। घटना के दौरान युवाओं ने प्रतिमा की सुरक्षा को प्राथमिकता दी और किसी अप्रिय स्थिति को टालने के लिए मिलकर काम किया।

मार्कंडेय सेवा संस्था गणेशोत्सव मंडल ने आरिफ सय्यद उर्फ पापा, बासित शेख, शाहू सहित मदद के लिए आगे आए सभी युवाओं और मुंब्रा के नागरिकों का आभार जताया है।

सामाजिक सद्भाव का संदेश

मुंब्रा शहर में हुई यह घटना ऐसे समय में सामाजिक सद्भाव का सकारात्मक संदेश देती है, जब धार्मिक त्योहारों के दौरान आपसी सहयोग और संयम की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। स्थानीय युवाओं की इस सामूहिक पहल ने यह संदेश दिया कि संकट की स्थिति में धार्मिक पहचान से ऊपर उठकर एक-दूसरे की मदद की जा सकती है।

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