Flyover Controversy: मुंबई महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण (MMRDA) द्वारा मीरा-भायंदर इलाके में बनाया गया एक नया फ्लाईओवर अपनी सुविधा से ज्यादा अपने अजीबोगरीब डिजाइन के कारण चर्चा में है। सोशल मीडिया पर इस पुल की तस्वीरें और वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं, जिसमें चार लेन का चौड़ा फ्लाईओवर अचानक सिमटकर दो लेन का हो जाता है। नेटिज़न्स इसे "दुनिया का आठवां अजूबा" बता रहे हैं और इस प्रोजेक्ट से जुड़े इंजीनियरों और ठेकेदारों पर तीखे तंज कस रहे हैं। जहां लोग इसे दुर्घटनाओं को दावत देने वाला "मौत का पुल" कह रहे हैं, वहीं प्रशासन इसे एक सोची-समझी योजना करार दे रहा है।
विवाद इतना बढ़ गया है कि अब यह मामला मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस तक पहुंच गया है। शिवसेना (UBT) के प्रवक्ता आनंद दुबे ने इस संबंध में मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उन्होंने इस डिजाइन को आम जनता की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ बताते हुए संबंधित अधिकारियों, ठेकेदार और कंसल्टेंट कंपनी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने और उन्हें ब्लैकलिस्ट करने की अपील की है।
विपक्ष का आरोप है कि नया फ्लाईओवर का डिजाइन तकनीकी रूप से त्रुटिपूर्ण है। आनंद दुबे ने अपने पत्र में कहा कि तेज गति से आने वाले वाहनों के लिए अचानक रास्ता संकरा होना हादसों का सबब बन सकता है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या MMRDA ने बिना किसी ठोस तैयारी के यह पुल बना दिया? स्थानीय निवासियों का भी कहना है कि पीक ऑवर्स के दौरान जब चार लेन का ट्रैफिक अचानक दो लेन में घुसने की कोशिश करेगा, तो वहां भारी जाम और टकराव की स्थिति पैदा होगी।
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बढ़ते विवाद के बीच MMRDA ने स्पष्टीकरण जारी किया है। अफसरों का कहना है कि यह डिजाइन की गलती नहीं, बल्कि जगह की कमी और भविष्य की कनेक्टिविटी को ध्यान में रखकर लिया गया फैसला है। प्राधिकरण के अनुसार, गोल्डन नेस्ट सर्कल जैसे व्यस्त जंक्शन पर ट्रैफिक मैनेजमेंट के लिए फिलहाल भायंदर ईस्ट की ओर जाने वाले हिस्से को शुरू किया गया है। चूंकि रेलवे फाटक की तरफ जमीन कम थी, इसलिए इसे फिलहाल संकरा रखा गया है। भविष्य में इसे भायंदर वेस्ट की ओर कनेक्टिंग लेन से जोड़ा जाएगा, जिसके बाद यह पूर्ण रूप से सुचारू हो जाएगा।
प्रशासनिक सफाई के बावजूद सोशल मीडिया पर इस पुल को लेकर हंसी-मजाक थमने का नाम नहीं ले रहा है। कई यूजर्स ने इसे "इंजीनियरिंग चमत्कार" बताते हुए मीम्स शेयर किए हैं। कुछ लोगों ने तंज कसते हुए पूछा कि 100 करोड़ रुपये की लागत से बने इस पुल का नक्शा बनाने वाले "महान इंजीनियर" कौन हैं? वहीं, कुछ यात्रियों ने इसे "शॉर्टकट टू हेवन" (स्वर्ग का छोटा रास्ता) करार दिया है। यह पुल मेट्रो लाइन 9 परियोजना का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य यातायात सुगम बनाना था, लेकिन फिलहाल यह ऑनलाइन ट्रोलिंग का केंद्र बन गया है।