MBMC के अस्पताल की एम्बुलेंस सेवा है बीमार ! (सौजन्यः सोशल मीडिया) 
ठाणे

MBMC के अस्पताल की एम्बुलेंस सेवा है बीमार ! ड्राइवरों का वेतन भी समय पर नहीं मिलता

MBMC Hospital's: मीरा-भाईंदर महानगर पालिका के मीरारोड ,पूनम सागर स्थित भारतरत्न इंदिरा गांधी अस्पताल के एंबुलेंस सेवा और वाहनों की हालत दयनीय हो गई है।

आंचल लोखंडे

Mira-Bhayander: मीरा-भाईंदर महानगर पालिका के मीरारोड ,पूनम सागर स्थित भारतरत्न इंदिरा गांधी अस्पताल के एंबुलेंस सेवा और वाहनों की हालत दयनीय हो गई है। इस अस्पताल में उपलब्ध एंबुलेंस की हालत बीमार जैसे हो गई है। एंबुलेंस के टायर ,सीट की हालत तो खस्ता है ही, साथ ही इसके सायरन और हॉर्न भी बंद है। एंबुलेंस के कागजात भी सही नहीं होने के कारण मरीजों को अगर शहर से बाहर दूसरे अस्पताल में स्थानांतरित करना हो तो मुंबई के यातायात पुलिस का कोपभाजन का शिकार ड्राइवरों को होना पड़ता है।

पिछले एक वर्ष में इन वाहनों के दुर्व्यवस्था की 34 शिकायत मनपा के वाहन विभाग को की गई ,लेकिन कोई सुधार या बदलाव नहीं हुआ। एंबुलेंस चालकों के वेतन भी समय पर नहीं मिलने की शिकायत अब आम हो चुकी है, चालकों का कहना है कि अगर एक माह का वेतन मिल गया तो अगला वेतन कब मिलेगा इसकी कोई समय सीमा नहीं।

टायर, सायरन, हॉर्न, ब्रेक की हालत दयनीय

बता दें कि मनपा के सभी 6 प्रभागों के लिए 11 एंबुलेंस वाहन उपलब्ध हैं। जिस पर विभिन्न शिफ्ट में 35 ड्राइवर कार्यरत हैं। मनपा ने एंबुलेंस वाहनों के मरम्मत और ड्राइवरों के आपूर्ति का ठेका सिक्योर एंड प्राइवेट लिमिटेड नामक कंपनी को दिया है और इस पर निगरानी के लिए मनपा के लिपिक विनोद राठौड़ की नियुक्ति की गई है। राठौड़ का भी कहना है कि वाहनों के खस्ता हाल की कई शिकायत संबंधित विभाग को की गई लेकिन कोई परिणाम सामने नहीं आया। नतीजतन कई बार जटिल प्रसव के मामले में पीड़िता को मुंबई के नायर अस्पताल में स्थानांतरित करते समय एंबुलेंस के बीच रास्ते में ही बंद पड़ने, यातायात पुलिस द्वारा रोक दिए जाने की घटनाएं घटित हो चुकी है। ऐसे में अगर किसी पीड़िता के जान को जोखिम हुआ तो उसका जिम्मेदार कौन होगा, यह सवाल उठाए जा रहे हैं।

केवल स्वास्थ्य सेवाएँ प्रभावित हो रही हैं बल्कि कर्मचारियों का जीवन-यापन पर भी संकट

भाजपा मीरा-भाईंदर शहर के जिला सचिव प्रवीण राय ने आयुक्त एवं प्रशासक राधाविनोद शर्मा को ज्ञापन सौंपते हुए एम्बुलेंस और शव वाहन की खराब स्थिति, तथा चालकों को समय पर वेतन न मिलने के मुद्दे पर तुरंत कार्रवाई की मांग की है। राय ने " नवभारत " को बताया कि इस लापरवाही का सबसे ज्यादा खामियाजा गरीब और मध्यमवर्गीय मरीजों को उठाना पड़ रहा है। आपातकालीन स्थिति में उन्हें निजी वाहनों का सहारा लेना पड़ता है, जिससे समय और पैसे दोनों की बर्बादी हो रही है। ड्राइवरों को महीनों तक वेतन नहीं मिलता।

इससे न केवल स्वास्थ्य सेवाएँ प्रभावित हो रही हैं बल्कि कर्मचारियों का जीवन-यापन भी संकट में है। राय ने चेतावनी दी है कि यदि तत्काल एम्बुलेंस और शव वाहन की मरम्मत नहीं की गई और चालकों का वेतन नियमित नहीं किया गया, तो भाजपा कार्यकर्ता मनपा के खिलाफ उग्र आंदोलन करेंगे।

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