Kashimira Chhatrapati Shivaji Maharaj Statue Repair News: मीरा भाईंदर शहर के सबसे प्रथम प्रवेश द्वार काशीमीरा नाका पर स्थापित छत्रपति शिवाजी महाराज की 30 वर्ष पुरानी अश्वारूढ़ प्रतिमा के जीर्ण होने के बाद उसके भविष्य को लेकर शहर में नया विवाद खड़ा हो गया है।
एक ओर प्रशासन सरकारी दिशा-निर्देशों के अनुसार प्रतिमा को दूसरी जगह स्थानांतरित करने की सिफारिश कर रहा है, वहीं दूसरी ओर 6 मई की आमसभा ने प्रतिमा को हटाने के बजाय उसी स्थान पर मरम्मत करने का प्रस्ताव पारित कर दिया है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि यदि मरम्मत के दौरान प्रतिमा को कोई नुकसान पहुंचता है तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा?
बता दें कि नगरपालिका काल में वर्ष 1997 में काशीमीरा नाका पर छत्रपति शिवाजी महाराज की अश्वारूढ़ प्रतिमा स्थापित की गई थी। प्रतिमा पुरानी होने के कारण उसमें दरार व क्षति दिखाई देने लगी है। इस बीच घोड़बंदर किले की ओर जाने वाले मार्ग के प्रारंभ में छत्रपति शिवाजी महाराज की 30 फीट ऊंची दूसरी अश्वारूढ़ प्रतिमा स्थापित किए जाने के बाद मामला और उलझ गया है।
मनपा प्रशासन ने 13 अप्रैल को महापौर डिंपल मेहता को भेजी रिपोर्ट में स्पष्ट किया था कि 28 नवंबर, 2022 को जिलाधिकारी की अध्यक्षता वाली मूर्ति नीति समिति के दिशानिर्देश के अनुसार एक ही महापुरुष की 2 प्रतिमाएं 2 किलोमीटर के दायरे में नहीं लगाई जा सकतीं।
इसलिए पुरानी प्रतिमा को सम्मानपूर्वक दूसरी जगह स्थानांतरित किया जाना चाहिए। हालांकि 6 मई को हुई आमसभा में सत्तारूढ़ भाजपा ने बहुमत के आधार पर प्रतिमा को हटाने के बजाय मौजूदा स्थान पर ही मरम्मत करने का प्रस्ताव पारित कर दिया।
प्रतिमा की स्थानांतरित करने के प्रस्ताव का शिवप्रेमियों और कुछ जनप्रतिनिधियों ने भी कड़ा विरोध किया था। विरोध के चलते प्रतिमा को यथास्थान रखते हुए उसकी मरम्मत का निर्णय लिया गया। लेकिन अब आशंका जताई जा रही है कि यदि मरम्मत के दौरान प्रतिमा को गंभीर नुकसान पहुंचा तो शिवप्रेमियों और विपक्षी दलों के बीच विवाद बढ़ सकता है। ऐसे में प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल खड़े हो सकते हैं।