Kalyan White Dog Attack: महाराष्ट्र के ठाणे जिले के कल्याण शहर में रविवार की शाम किसी खौफनाक मंजर से कम नहीं थी। शहर के आधारवाड़ी इलाके में एक सफेद रंग के पागल कुत्ते ने ऐसा आतंक मचाया कि लोग अपने घरों में दुबकने को मजबूर हो गए।
इस खूंखार कुत्ते ने महज चार घंटे के भीतर 130 से अधिक लोगों पर हमला कर उन्हें बुरी तरह घायल कर दिया। आंकड़ों की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यह कुत्ता हर दो मिनट में एक व्यक्ति को अपना शिकार बना रहा था।
अधिकारियों के अनुसार, यह सफेद कुत्ता आधारवाड़ी में संदीप होटल के आसपास घूम रहा था और अचानक बेहद आक्रामक हो गया। इसने रास्ते से गुजरने वाले पैदल यात्रियों, बाइक सवारों और स्थानीय निवासियों को निशाना बनाना शुरू कर दिया। कुत्ते के हमले इतने अचानक और तेज थे कि लोगों को संभलने तक का मौका नहीं मिला। रविवार रात तक कल्याण-डोंबिवली नगर निगम के अस्पतालों में घायलों की लंबी कतारें लग गईं।
जैसे ही इस सामूहिक हमले की खबर फैली, पूरे इलाके में हड़कंप मच गया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए खड़कपाड़ा और एमएचबी पुलिस स्टेशनों की टीमें, केडीएमसी का कुत्ता पकड़ने वाला दस्ता, स्थानीय नगरसेवक और बड़ी संख्या में नागरिक मैदान में उतर आए। पूरी रात सघन तलाशी अभियान चलाया गया। आखिरकार, भारी मशक्कत के बाद इस खूंखार कुत्ते को पकड़ा जा सका, जिसके बाद स्थानीय निवासियों ने राहत की सांस ली।
आधारवाड़ी की घटना अभी ठंडी भी नहीं हुई थी कि सोमवार सुबह कल्याण रेलवे स्टेशन परिसर में एक और कुत्ते ने उत्पात मचा दिया। सुबह-सुबह काम पर जाने वाले यात्रियों और दैनिक कामगारों पर हमले किए गए, जिसमें कम से कम 10 से 15 लोग घायल हो गए। इन दो दिनों की घटनाओं को मिलाकर कल्याण में अब तक 150 से अधिक लोग डॉग बाइट का शिकार हो चुके हैं।
घायलों को तत्काल केडीएमसी द्वारा संचालित रुक्मिणीबाई अस्पताल ले जाया गया। अस्पताल के डॉक्टर संदीप पगारे ने पुष्टि की कि बड़ी संख्या में मरीजों को एंटी-रेबीज इंजेक्शन दिए गए हैं। अस्पताल में आए 48 मरीजों में से 46 को उपचार के बाद घर भेज दिया गया, लेकिन दो मरीजों की हालत गंभीर होने के कारण उन्हें मुंबई के सायन अस्पताल रेफर करना पड़ा।
इस खौफनाक घटना ने कल्याण-डोंबिवली नगर निगम के श्वान नियंत्रण उपायों और सार्वजनिक सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय नागरिकों में भारी आक्रोश है; उनका कहना है कि प्रशासन को केवल ऐसी घटनाओं के बाद जागने के बजाय आवारा कुत्तों की बढ़ती आबादी पर नियंत्रण पाने के लिए कोई ठोस और स्थायी नीति अपनानी चाहिए। फिलहाल, कुत्ता पकड़े जाने के बाद इलाके में तनाव कम हुआ है, लेकिन दहशत अब भी बरकरार है।