Kalyan News In Hindi: कल्याण-डोंबिवली महानगरपालिका चुनाव ने शिंदे सेना के भीतर गहरी दरारें उजागर कर दी हैं। पार्टी में 500 से अधिक इच्छुकों ने टिकट के लिए आवेदन किया था, लेकिन सीमित सीटों और पैनल पद्धति के चलते चुनिंदा चेहरों को ही मौका मिला।
परिणामस्वरूप, जिन नेताओं और कार्यकर्ताओं को उम्मीदवारी नहीं मिली, उन्होंने या तो दूसरे दलों का रुख किया या फिर बागी तेवर अपनाते हुए मैदान में उतरने का फैसला किया। अब यही बागी उम्मीदवार शिंदे सेना के लिए सबसे बड़ी चुनावी चुनौती बनते दिख रहे हैं।
पूर्व नगरसेवक उमेश बोरगावकर, जो पहले राष्ट्रवादी (शरद पवार) में थे और बाद में शिंदे सेना में शामिल हुए, पैनल क्रमांक 6 से इच्छुक थे। पार्टी ने यहां संजय पाटील और नीलिमा पाटील को टिकट दे दिया। टिकट कटते ही बोरगावकर ने शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) की ओर से मशाल थामते हुए नामांकन दाखिल कर दिया।
इसी तरह, शिंदेसेना के विधानसभा समन्वयक श्रेयस समेल पैनल क्रमांक 9 से दावेदार थे, लेकिन टिकट जिला प्रमुख अरविंद मोरे की पत्नी अस्मिता मोरे को मिला। इससे नाराज होकर समेल समेत 57 पदाधिकारियों ने सामूहिक इस्तीफा दे दिया, जिससे संगठन में खलबली मच गई।
उत्तर भारतीयों की उपेक्षा का मुद्दा भी तेजी से उभरा है। कमलादेवी कॉलेज के अध्यक्ष सदानंद बाबा तिवारी की बेटी श्वेता पांडेय तिवारी को टिकट न मिलने पर वे पैनल क्रमांक 13 से मशाल लेकर मैदान में उतारे।
वहीं, शिंदे सेना के पुराने और वफादार कार्यकर्ता सागर दुबे ने डोंबिवली से अपक्ष चुनाव लड़कर पार्टी की मुश्किलें और बढ़ा दी है। कल्याण पश्चिम में शिंदेसेना के शहरप्रमुख रवि पाटिल के बेटे अनिरुद्ध पाटिल पैनल क्रमांक 6-डी से इच्छुक थे और उन्होंने नामांकन भी दाखिल किया था, लेकिन बाद में उनका टिकट काट दिया गया। हालांकि अनिरुद्ध नामांकन वापस लेने की तैयारी में हैं, पार्टी ने उसी पैनल से रवि पाटील की बहन प्रमिला पाटील को उम्मीदवार बना दिया। इससे जमीनी कार्यकर्ताओं में असंतोष और गहराया है।