नवी मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट (सौ. सोशल मीडिया ) 
ठाणे

Navi Mumbai International Airport नाम विवाद पर हाईकोर्ट का बड़ा बयान, PIL खारिज

Bombay High Court ने नवी मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का नाम दी. बा. पाटिल के नाम पर रखने की मांग वाली जनहित याचिका खारिज करते हुए कहा कि नामकरण का निर्णय प्रशासनिक स्तर पर होता है।

अपूर्वा नायक

Navi Mumbai News In Hindi: उच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि वह केंद्र सरकार और केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्रालय को नवी मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का नाम डी बी पाटिल के नाम पर रखने के राज्य सरकार के प्रस्ताव पर शीघ्र निर्णय लेने का आदेश नहीं दे सकता। साथ ही, नामकरण की मांग को लेकर दायर जनहित याचिका को भी खारिज कर दिया।

कोर्ट ने कहा- निर्णय लेने के लिए प्राधिकारी सक्षम

  • न्यायालय ने यह भी टिप्पणी की कि न्यायालय ऐसे प्रशासनिक निर्णय में हस्तक्षेप नहीं कर सकता। किसी भी सार्वजनिक परियोजना का नाम बदलने या नामकरण का निर्णय प्रशासनिक स्तर पर लिया जाता है। इसलिए, वह किसी सार्वजनिक परियोजना को कोई विशिष्ट नाम देने या उसमें परिवर्तन करने का आदेश नहीं दे सकता, यह बात मुख्य न्यायाधीश चंद्रशेखर और न्यायमूर्ति गौतम अंखड की पीठ ने कही है। पता हो कि प्रकाशझोत सामाजिक संस्था के अध्यक्ष विकास पाटिल द्वारा दायर जनहित याचिका को खारिज करते हुए यह बात कही।
  • नागरिक उड्डयन मंत्रालय से संबंधित नियमों और संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार निर्णय लेने के लिए प्राधिकारी सक्षम हैं। हवाई अड्डे का नामकरण करने के प्रस्ताव पर निर्णय कानून के अनुसार लिया जाता है। इसलिए, अदालत हवाई अड्डे के नामकरण के प्रस्ताव पर कोई निर्णय नहीं दे सकती। इसके अलावा, अदालत ने याचिका खारिज करते हुए यह भी कहा कि याचिकाकर्ता यह साबित करने में विफल रहे हैं कि यह मांग किस कानूनी अधिकार के तहत की गई थी।

मुख्यमंत्री की घोषणा का दिया गया प्रमाण

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने 3 अक्टूबर को घोषणा की थी कि नवी मुंबई अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे का नाम दी बा। पाटिल के नाम पर रखा जाएगा और प्रधानमंत्री ने नामकरण प्रस्ताव पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी थी। मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया था कि इस हवाई अड्डे का नाम दी। बा। पाटिल नवी मुंबई अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा रखा जाएगा। याचिकाकर्ताओं ने अदालत को यह बताने की कोशिश की कि फडणवीस ने यह भी उल्लेख किया था कि इस संबंध में प्रस्ताव नागरिक उड्डयन मंत्रालय को अनुमोदन के लिए भेजा गया है। हालांकि, अदालत ने याचिकाकर्ताओं से कहा कि इस घोषणा के आधार पर इस मांग के लिए जनहित याचिका दायर नहीं की जा सकती।

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