Bhiwandi Kohinoor Building Collapse Narpoli Gangaramwadi: शहर में आधी रात को नारपोली स्थित गंगारामवाड़ी इलाके में 4 मंजिला कोहिनूर इमारत ढहने से अब तक 10 लोगों की मौत हो चुकी है। इस हादसे में कुछ और नागरिकों के मलबे के नीचे फंसे होने की आशंका जताई जा रही है। राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल, अग्निशमन दल तथा स्थानीय प्रशासन द्वारा युद्ध स्तर पर बचाव कार्य जारी है।
संबंधित कोहिनूर इमारत को मनपा ने पहले ही खतरनाक घोषित कर रखा था। इमारत के एक विंग के ग्राउंड फ्लोर पर खंभों की मरम्मत का काम चल रहा था। शाम करीब 7 बजे से इमारत में दरारें आने और उसके झुकने की बात सामने आने के बाद रात 8 बजे के आसपास प्रशासन ने इमारत को खाली करा लिया था।
बालाजी नगर स्थित गंगाराम वाड़ी 4 मंजिला बिल्डिंग भिवंडी-निजामपुर महानगरपालिका द्वारा पहले से ही 'अति खतरनाक' घोषित की जा चुकी थी। बावजूद रहिवासियों को वहां से हटाने की बजाय उसकी मरम्मत का कार्य किया जा रहा था। मनपा प्रशासन की कार्रवाई की डर से रात में उस जर्जर इमारत का काम चल रहा था। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक रात 11 से 11.30 बजे के बीच बी-विंग का एक हिस्सा भरभराकर गिर पड़ा। इमारत में कुल 48 कमरे थे। ग्राउंड फ्लोर पर काम चल रहा था।
अचानक रात 8 से 9 बजे के बीच इमारत से कर-कर... कट-कट की आवाज आने लगी थी। कई परिवारों को स्थानीय लोगों की मदद से तुरंत बाहर निकाला भी गया, लेकिन कुछ लोग सामान निकालने और कुछ मजदूर मरम्मत में ही लगे थे, तभी यह हादसा हो गया।
बताया जा रहा है कि मरम्मत के दौरान कुछ पिलर तोड़े गए थे, जिससे पूरी संरचना कमजोर हो गई। भिवंडी मनपा ने इमारत को 'सी-कैटेगरी' खतरनाक घोषित कर नोटिस भी दिए थे। कुछ परिवारों ने इमारत खाली भी किया था, जबकि बिजली पानी न काटे जाने एवं अन्य मज़बूरियों के चलते कई परिवार इमारत में राह भी रहे थे। मलबे से एक पुरुष, महिला और एक लड़के सहित 3 लोगों को जिंदा निकाला गया और अस्पताल में भर्ती कराया गया।
भिवंडी मनपा के आयुक्त अनमोल सागर 2 दिनों से छुट्टी पर हैं। उन्होने अपना चार्ज भी किसी अन्य अधिकारी को नहीं दिया। बीजेपी विधायक महेश चौघुले ने कहा कि इमारत काफी पुरानी और जर्जर थी। मनपा प्रशासन सोया हुआ था। इमारत खाली नहीं कराई। लोग रात में मरम्मत करवा रहे थे। उन्होंने मांग की कि लापरवाही के जिम्मेदार अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई हो।
हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब इमारत को पहले ही धोखादायक घोषित किया गया था, तो मरम्मत की अनुमति किसने दी? मनपा की लापरवाही के कारण एक बार फिर गरीब परिवारों और मजदूरों को अपनी जान गंवानी पड़ी।
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एनडीआरएफ और फायर ब्रिगेड की टीम ने रातभर चलाए गए रेस्क्यू में अब तक 10 शव बरामद किए हैं। मृतकों में शमीम शेख (32), रणजीत सिंह (45), राधेश्याम, मिराज रसूल शेख 34 वर्ष, संतोष कुमार पांडे 42 वर्ष, शमीम अंसारी 30 वर्ष, राकेश पासवान, मुकेश पासवान और अशोक पासवान शामिल हैं।
हादसे में 3 लोग घायल हुए हैं, जिन्हें आईजीएम अस्पताल में भर्ती कराया गया है। घायलों के नाम अभय कुमार (24) दीपक कुमार यादव (25), संगीता प्रजापति (36) वर्ष है। प्रशासन ने मृतकों के परिजनों को आर्थिक सहायता देने और घायलों के इलाज का खर्च सरकार उठाने की घोषणा की है।
वहीं मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि यह इमारत पहले से ही सी-1 श्रेणी की घोषित थी और इसे खाली कराने के आदेश दिए गए थे। कई परिवार इमारत छोड़ चुके थे, बावजूद मरम्मत का काम जारी था।
सी-1 (कैटेगरी सी-1) ऐसी इमारतों को कहा जाता है, जो संरचनात्मक रूप से अत्यंत खतरनाक और रहने योग्य नहीं मानी जाती है। स्ट्रक्चरल ऑडिट में इनके कभी भी गिरने का खतरा बताया जाता है। ऐसे भवनों को तत्काल खाली कराना और जरूरत पड़ने पर उन्हें गिराना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी होती है। एमएमआर में इस वर्ष मानसून से पहले 18,000 से अधिक जर्जर या असुरक्षित इमारतों की पहचान की गई है। लगभग 827 इमारतें 'अत्यंत खतरनाक' श्रेणी में है, मनपा क्षेत्र में 174 इमारतें सी-1 श्रेणी में सूचीबद्ध की गई हैं।