भीमाशंकर में पेड़ों की कटाई के खिलाफ कल्याण पूर्व में फूटा भयंकर गुस्सा।
महज दो घंटे के भीतर 1,550 नागरिकों ने हस्ताक्षर कर जोरदार विरोध जताया।
सामाजिक संगठनों ने चेतावनी दी कि मांगें न मानी तो आंदोलन तेज होगा।
Bhimashankar Forest Cutting Opposition Kalyan East Signature Campaign: कर्जत-भीमाशंकर इलाके में पेड़ों की कटाई के प्रस्ताव के खिलाफ कल्याण पूर्व के लोगों का गुस्सा फूट पड़ा है। कई सामाजिक संगठनों और एसोसिएशन ने मिलकर कोलसेवाड़ी रिक्शा स्टैंड पर सिग्नेचर कैंपेन चलाया जिसमें सिर्फ दो घंटे में 1,550 लोगों ने अपने हस्ताक्षर करके पेड़ काटने के विरोध का समर्थन किया। प्रदर्शनकारियों ने विकास के नाम पर पेड़ों की कटाई के लिए सरकार को जवाबदेह ठहराने का अपना पक्का इरादा जताया।
सहयोग संस्था के अध्यक्ष विजय भोसले ने पेड़ लगाने के सरकार के दावों पर सवाल उठाए। सरकार से 90,000 पेड़ लगाने के लिए कहा जा रहा है, लेकिन उन्होंने मांग की कि सरकार को यह बताना चाहिए कि समृद्धि हाईवे बनाने के लिए काटे गए लाखों पेड़ों की जगह कितने पेड़ लगाए गए और वे अभी कहां हैं। उन्होंने कहा कि यह भी देखना ज़रूरी है कि ग्रीन बेल्ट को डेवलप करने की घोषणाएँ असल में लागू हुई हैं या नहीं।
भोसले ने गोवा हाईवे और पुणे और तुलजापुर हाईवे पर काम के दौरान कितने पेड़ काटे गए और उनकी जगह कितने पेड़ लगाए गए, इसकी भी साफ़ जानकारी देने की माँग की। उन्होंने तर्क दिया कि सिर्फ़ पेड़ लगाने के आंकड़े बताने से पर्यावरण की रक्षा की ज़िम्मेदारी पूरी नहीं होती।
स्टडी वेव्स मल्टीपर्पस ऑर्गनाइज़ेशन के प्रेसिडेंट उमाकांत चौधरी ने सरकार को आंदोलन तेज़ करने की चेतावनी दी। उन्होंने साफ़ किया कि अगर पेड़ काटने के मुद्दे को गंभीरता से नहीं लिया गया, तो अगला आंदोलन सीधे भीमाशंकर में किया जाएगा। इसलिए, ऐसे संकेत हैं कि इस मुद्दे पर आंदोलन सिर्फ़ लोकल लेवल के विरोध तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका दायरा बढ़ेगा।
आम आदमी पार्टी के एडवोकेट धनंजय जोगदंड ने भी जंगलों की कटाई के मुद्दे पर सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा, जंगलों को काटकर विकास करना विकास नहीं बल्कि बर्बादी है, और कहा कि वह इस मामले के लिए सरकार को जवाबदेह ठहराएंगे।
इस अवसर पर वैशाली सोनटक्के, पूजा सरदार, युवा भारत संगठन के प्रेसिडेंट शिवा शाहू, वरद फाउंडेशन के सुनील डालिम्बे, सर्वात्माका संस्था के प्रेसिडेंट संजय निर्भावने, पारितोष सिंह, शिवसेना शाखा प्रमुख सारंग कुंडले, हनुमान सेवा मंडल के प्रेसिडेंट सावंत, सीनियर सोशल वर्कर प्रमोद दिवेकर, हरिश्चंद्र चन्ने, तुकाराम सिलिमकर, कालिदास कदम, सुभाष गायकवाड़, भारत साटाले, राकेश झांजे और राजेश अडांगले ने इस हस्ताक्षर अभियान को सफल बनाने के लिए कड़ी मेहनत की।
जंगलों की कटाई के खिलाफ बड़ी संख्या में नागरिकों का हिस्सा लेना पर्यावरण के मुद्दे पर बढ़ते लोगों के गुस्से का संकेत था। अब नागरिकों का ध्यान इस बात पर है कि क्या सरकार इन मांगों पर ध्यान देगी और पेड़ों की कटाई पर अपनी स्थिति साफ करेगी।