Women Physical Law Proposal In Ambernath: वर्तमान समय देश में कहीं न कहीं महिलाओं पर हो रहे अत्याचारों को रोकने के लिए सख्त कानून बनाकर बलात्कार करने वाले को फांसी की सजा का प्रावधान केंद्र सरकार करे, इस मुख्य मांग वाला गैर-सरकारी प्रस्ताव हाल ही में आयोजित अंबरनाथ नगरपरिषद की आम सभा में सर्वसम्मति से मंजूर किया गया।
सभा शुरू होते ही शिवसेना के वरिष्ठ नगरसेवक अब्दुलभाई शेख ने महिला अत्याचारों का निषेध, आंदोलनकारी महिलाओं के साथ एकजुटता और कठोर कानूनों की मांग का गैर-सरकारी प्रस्ताव पेश कर उसे मंजूर करने का सुझाव दिया। शिवसेना नगरसेविका रोहिणी भोईर ने इस प्रस्ताव का अनुमोदन किया।
इसके बाद सभा ने प्रस्ताव को सर्वसम्मति से मंजूर कर लिया। बिहार के जमुई, नई दिल्ली तथा देश के विभिन्न हिस्सों में महिलाओं और बच्चियों पर हुए अत्याचार की घटनाओं का प्रस्ताव के माध्यम से तीव्र निषेध किया गया। महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान, स्वतंत्रता और समान अधिकारों के लिए आंदोलन करने वाली महिलाओं, छात्राओं और नागरिकों के साथ एकजुटता व्यक्त की गई।
प्रस्ताव में मांग की गई है कि बलात्कार करने वाले को फांसी की सजा का प्रावधान करने के साथ ही महिलाओं पर हिंसा और यौन अत्याचार रोकने के लिए अधिक कठोर और प्रभावी कानून बनाए जाएं, हर जिले में आवश्यक संख्या में विशेष फास्ट-ट्रैक कोर्ट स्थापित किए जाएं, और जांच से लेकर अदालती सुनवाई तक की प्रक्रिया निश्चित समय-सीमा में पूरी की जाए।
पीड़ित महिला और गवाहों की सुरक्षा, गोपनीयता, मुफ्त कानूनी सहायता, चिकित्सा उपचार, काउंसलिंग और पुनर्वास की प्रभावी व्यवस्था करने की मांग भी की गई।
महिला सुरक्षा के लिए महिला और पुरुषों में जनजागरूकता करने पर अब्दुलभाई शेख ने विशेष जोर दिया। उन्होंने सुझाव दिया कि अंबरनाथ नगरपरिषद की स्वास्थ्य समिति, महिला व बाल कल्याण समिति और शिक्षा समिति के संयुक्त तत्वावधान में, शहर की विभिन्न सामाजिक संस्थाओं, स्कूलों और कॉलेजों के सहयोग से महिला सुरक्षा, महिला सम्मान, समानता और अत्याचार रोकथाम को लेकर विभिन्न प्रबोधन व जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएं।
सर्वसम्मति से मंजूर गैर-सरकारी प्रस्ताव की भावना और मांगों को राज्य व केंद्र सरकार को जल्द से जल्द भेजा जाए, ऐसी मांग भी अब्दुलभाई शेख ने की। प्रस्ताव की प्रमाणित प्रति प्रधानमंत्री, केंद्रीय गृहमंत्री, केंद्रीय कानून व न्याय मंत्री, केंद्रीय महिला व बाल विकास मंत्री, महाराष्ट्र सरकार और राष्ट्रीय महिला आयोग को तत्काल भेजने की मांग उन्होंने की।