मुंबई: वर्ष 2024 के जुलाई महीने में हुए विधान परिषद में क्रॉस वोटिंग करने वाली कांग्रेस की तत्कालीन विधायक सुलभा खोडके को उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने एक और बड़ा इनाम दिया है। अजित ने अपनी पार्टी की विधायक सुलभा खोडके के पति संजय खोडके को 27 मार्च को होने वाले विधान परिषद चुनाव के लिए अपनी पार्टी का उम्मीदवार घोषित किया है।
सोमवार को संजय खोडके ने अपना नामांकन अर्ज दाखिल किया और इसी के साथ संजय खोडके का विधायक बनना भी तय हो गया है। क्योंकि विरोध में किसी अन्य उम्मीदवार ने नामांकन दायर नहीं किया है।
विधानसभा चुनाव 2024 में बीजेपी से प्रवीण दटके, रमेश कराड व गोपीचंद पडलकर तथा शिवसेना से आमशा पाडवी व अजित पवार की एनसीपी से राजेश विटेकर चुनाव जीतने में सफल हुए थे। ये सभी लोग इससे पहले विधान परिषद के सदस्य थे।
विधानसभा में इन्हें मिली जीत की वजह से रिक्त हुई विधान परिषद की 5 सीटों पर 27 मार्च को चुनाव होने हैं। मौजूदा विधायकों के संख्या बल के हिसाब से विधान परिषद की उपरोक्त पांच में से 3 सीटों पर बीजेपी के तो वहीं एक-एक सीट पर शिवसेना और एनसीपी के उम्मीदवारों की जीत तय है।
विधान परिषद चुनाव के लिए सोमवार को नामांकन दर्ज करने का आखिरी दिन था। बीजेपी ने अपने तीन उम्मीदवारों संदीप जोशी, संजय केणेकर, दादाराव केचे के नाम की घोषणा रविवार को ही कर दी थी। तो वहीं शिवसेना शिंदे गुट ने सोमवार को चंद्रकांत सूर्यवंशी को तथा अजित पवार की पार्टी ने संजय खोडके को अपना उम्मीदवार बनाने का ऐलान किया। इसी के साथ इन पांचों उम्मीदवारों ने सोमवार को अपना नामांकन भी भर दिया। खोडके के नामांकन भरने के दौरान डीसीएम अजित पवार, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष व राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले, एनसीपी के प्रदेश अध्यक्ष सांसद सुनील तटकरे, वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री छगन भुजबल, पूर्व मंत्री दिलीप वलसे पाटिल और पूर्व मंत्री अनिल भाईदास पाटिल सहित पार्टी के कई विधायक भी उपस्थित रहे।
संजय खोडके को उम्मीदवारी दिए जाने के बारे में कहा जा रहा है कि अजित पवार ने एक तरफ संजय खोडके की पत्नी द्वारा अतीत में की गई मदद का हिसाब सूद सहित वापस किया है। तो वहीं दूसरी तरफ उन्होंने संजय के लंबे अनुभव का लाभ उठाने का दांव भी खेला है।
लोकसभा चुनाव 2024 में अजित की एनसीपी का प्रदर्शन निराशाजनक रहा था। उसके बाद जुलाई महीने में हुए विधान परिषद की 11 सीटों के लिए हुए चुनाव हुए थे। संख्या बल के हिसाब से सत्तारूढ़ महायुति के 8 तथा विपक्षी गठबंधन महाविकास आघाड़ी (MVA) में शिवसेना (यूबीटी) से एक तथा कांग्रेस के एक उम्मीदवार की जीत तय थी। जबकि 11वीं सीट पर रस्साकशी थी। शेतकरी कामगार पक्ष (शेकाप) के जयंत पाटिल अपने निजी संबंधों एवं मविआ खासकर एनसीपी (शरदचंद्र पवार) के भरोसे मैदान में उतरे थे। लेकिन मतदान के दौरान कांग्रेस के सात विधायकों पर क्रॉस वोटिंग के आरोप लगे थे। जिनमें सुलभा खोडके भी शामिल थीं।
विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस ने सुलभा खोडके को 6 साल के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया था। लेकिन अजित पवार ने उन्हें अपनी पार्टी एनसीपी से अमरावती विधानसभा क्षेत्र से उम्मीदवार बनाया था और वह चुनाव जीत गई थीं।
जबकि खुद संजय खोड़के वर्ष 1981 से प्रशासकीय, सामाजिक एवं राजनीतिक जीवन का अनुभव ले रहे हैं। वह उप मंत्री राजेंद्र गोडे, पूर्व राज्यमंत्री माणिकराव ठाकरे, शरद तसरे, छगन भुजबल, विजय सिंह मोहिते पाटिल, दिवंगत गृहमंत्री आरआर पाटिल के साथ लंबे समय तक काम कर चुके हैं।