Supriya Sule On Kisan Karj Mafi: महाराष्ट्र के किसान इस समय भीषण सूखे, गहराते बिजली संकट और भारी कर्ज के बोझ से जूझ रहे हैं। किसानों के मुद्दों पर राज्य सरकार की वादाखिलाफी और केवल कागजी घोषणाओं के खिलाफ राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) और महाविकास आघाड़ी ने आक्रामक रुख अपना लिया है। पंढरपुर में सांसद सुप्रिया सुले की प्रमुख मौजूदगी और प्रदेशाध्यक्ष शशिकांत शिंदे के नेतृत्व में छत्रपति शिवाजी महाराज चौक से तहसील कार्यालय तक एक विशाल ‘धड़क मोर्चा’ निकाला गया। इस मोर्चे में शामिल हजारों आक्रोशित किसानों को संबोधित करते हुए सुप्रिया सुले ने केंद्र और राज्य सरकार पर सीधा हमला बोला।
सुप्रिया सुले ने कहा कि महाराष्ट्र का किसान सूखे, बिजली संकट और कर्ज के बोझ से जूझ रहा है, लेकिन सरकार केवल कागजी घोषणाएं कर रही है। जब तक किसानों की संपूर्ण कर्जमाफी नहीं होती और उनका सातबारा कोरा नहीं होता, तब तक महाविकास आघाड़ी शांत नहीं बैठेगी। सुले ने चेतावनी देते हुए कहा कि आम जनता को परेशान करने के बजाय सड़क रोकनी है तो सीधे सत्ताधारियों की गाड़ियां रोको। किसानों के लिए मंत्रियों की गाड़ियां रोककर जेल जाने को मैं खुद तैयार हूं।
सुप्रिया सुले ने पिछली यूपीए सरकार के दौरान किसानों के लिए लिए गए फैसलों का उल्लेख करते हुए कहा कि तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और तत्कालीन कृषि मंत्री शरद पवार ने किसानों के लिए एक झटके में 70 हजार करोड़ रुपए की संपूर्ण कर्जमाफी की थी। महाराष्ट्र के किसानों का सातबारा कोरा किया गया था।
सुप्रिया सुले ने सवाल उठाया कि क्या मौजूदा सरकार के फैसलों में वैसी दृढ़ता दिखाई देती है? उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस और एनसीपी द्वारा शुरू की गई रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) को बंद करने की कोशिश की गई थी, लेकिन आज सूखे की स्थिति में इसी योजना के कारण खेत मजदूरों को काम मिल रहा है।
किसानों की बिजली समस्या का जिक्र करते हुए सुले ने कहा कि नहर के किनारे खेत होने के बावजूद एक किसान को केवल तीन-तीन घंटे बिजली मिलने के कारण खड़ी गन्ने की फसल बर्बाद होने की बात उन्होंने बताई है। उन्होंने कहा कि बिजली चोरी का आरोप लगते ही पुलिस मोटर उठाकर ले जाती है, जबकि दिन में पर्याप्त बिजली नहीं मिलती। सुले ने कहा कि सरकार ने बिजली बिल में राहत की घोषणा की है, लेकिन यदि गर्मियों में कुएं में पानी ही नहीं रहेगा तो किसान उस बिजली का क्या करेंगे? उनके मुताबिक ऐसी राहत से किसानों की मूल समस्या हल नहीं होगी।
शक्तिपीठ महामार्ग के मुद्दे पर सुले ने सरकार के खर्च पर सवाल उठाया। सुप्रिया सुले ने कहा कि किसी किसान ने इस सड़क की मांग नहीं की है, फिर भी इसके लिए 80 से 90 हजार करोड़ रुपए खर्च करने की तैयारी है। दूसरी ओर किसानों की संपूर्ण कर्जमाफी के लिए सरकार के पास पैसा नहीं होने की बात कही जाती है।
सांसद सुप्रिया सुले ने शक्तिपीठ महामार्ग को रद्द कर उसके लिए प्रस्तावित निधि को सूखा प्रभावित किसानों की संपूर्ण कर्जमाफी की ओर मोड़ने की मांग की। साथ ही किसानों के बच्चों की शिक्षा और मेस फीस में 100 प्रतिशत माफी देने की मांग की।
शरद पवार की बेटी सुप्रिया सुले ने बेरोजगारी और एमपीएससी की परीक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि किसान दिन-रात मेहनत कर बच्चों की फीस भरता है। बच्चे पुणे जाकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं, लेकिन वहां एमपीएससी के पेपर लीक होने या परीक्षाएं टलने की खबरें सामने आती हैं। उन्होंने कहा कि खेती लाभकारी नहीं है, न्यूनतम समर्थन मूल्य की गारंटी नहीं है और प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता को लेकर सवाल उठते हैं। ऐसे हालात में किसान और युवा राज्य में कैसे जीवन बिताएं?
सुले ने तत्कालीन गृहमंत्री दिवंगत आर. आर. पाटिल के कार्यकाल में पुलिस भर्ती में पारदर्शिता का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि आज पुलिस में कार्यरत कर्मचारी भी सामान्य किसानों के बच्चे हैं, इसलिए सरकार को किसानों का दर्द समझना चाहिए।
सुप्रिया सुले ने सूखे के मुद्दे पर राजनीति से ऊपर उठकर काम करने की अपील की। उन्होंने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से महाराष्ट्र के सभी 48 सांसदों की संयुक्त बैठक बुलाने की मांग की। उन्होंने कहा कि सभी विपक्षी सांसद मुख्यमंत्री के साथ दिल्ली जाकर केंद्र से राज्य के लिए विशेष सूखा पैकेज की मांग करेंगे। साथ ही उन्होंने सरकार से विधानसभा का विशेष अधिवेशन बुलाकर किसानों की संपूर्ण कर्जमाफी का निर्णय लेने की मांग की।