Pandharpur Indapur Engineering Student Suicide: महाराष्ट्र के पंढरपुर तालुका के पटवर्धन कुरोली इलाके की रहने वाली और इंदापुर में इंजीनियरिंग की शिक्षा ले रही एक होनहार छात्रा की मौत ने पूरे जिले को आंदोलित कर दिया है। पीड़ित लड़की के सिर से पिता का साया पहले ही उठ चुका था और उसकी मां ने बेहद तंगहाली में उसे पढ़ाया-लिखाया था। आरोप है कि उनके ही एक विवाहित रिश्तेदार ने लड़की को अपनी हवस का शिकार बनाया। इस घिनौने अपराध के खिलाफ पीड़िता ने हिम्मत जुटाकर बीती 11 अप्रैल को ही करकंब पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज कराया था, लेकिन रसूख के चलते पुलिस आरोपी को गिरफ्तार करने में टालमटोल करती रही।
थाने के चक्कर काटकर थक चुकी और समाज के तानों से टूटी पीड़िता ने न्याय की उम्मीद खो दी और आत्मघाती कदम उठाते हुए टॉयलेट क्लीनिंग एसिड (तेजाब) पी लिया। उसे गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया था। लेकिन लापरवाही का सिलसिला यहीं नहीं थमा; डॉक्टरों ने कथित तौर पर अस्पताल में पर्याप्त व्यवस्था न होने की बात कहकर गंभीर रूप से झुलसी हुई पीड़िता को घर भेज दिया, जहां तड़प-तड़प कर उसकी जान चली गई। बेटी की मौत से गुस्साए परिजनों ने उसका शव सीधे करकंब थाने के मुख्य हॉल में ले जाकर रख दिया और तब तक अंतिम संस्कार करने से मना कर दिया जब तक आरोपी सलाखों के पीछे नहीं जाता। दो घंटे के भारी तनाव के बाद पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर मामले में हत्या के प्रयास और उकसावे की अतिरिक्त धाराएं जोड़ीं।
दुष्कर्म की दूसरी रोंगटे खड़े कर देने वाली घटना विदर्भ के भंडारा जिले के लखनी थाना क्षेत्र से आई है। यहां एक 5 साल की मासूम बच्ची घर पर अकेली थी, क्योंकि उसके माता-पिता मजदूरी के लिए बाहर गए हुए थे। इसी सूनेपन का फायदा उठाकर गांव के ही एक 30 वर्षीय युवक ने बच्ची को बहला-फुसलाकर पास के एक सुनसान खेत में ले गया। वहां उसने मासूम को बेरहमी से पीटा और उसके साथ यौन उत्पीड़न की सारी हदें पार कर दीं।
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शाम को जब लहूलुहान और डरी-सहमी मासूम किसी तरह अपने घर लौटी, तो उसने रोते हुए अपनी मां को आपबीती सुनाई। बच्ची की हालत देखकर मां के पैरों तले जमीन खिसक गई। उन्होंने तुरंत लखनी पुलिस स्टेशन पहुंचकर आपबीती दर्ज कराई। महिला अधिकारियों की मुस्तैदी के चलते पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी आशीष तेम्भुर्ने (उम्र 30 वर्ष) को देर रात ही उसके ठिकाने से गिरफ्तार कर लिया।
इन दोनों घटनाओं ने एक बार फिर साबित किया है कि ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में महिलाओं तथा नाबालिग बच्चियों के खिलाफ होने वाले अपराधों को लेकर स्थानीय पुलिस का रवैया आज भी ढीला ढाला है। भंडारा में जहां सहायक पुलिस निरीक्षक संगीता गावडे और पुलिस निरीक्षक सुभाष बारसे के मार्गदर्शन में जांच तेज कर दी गई है, वहीं पंढरपुर मामले में लापरवाही बरतने वाले करकंब पुलिस के अधिकारियों के खिलाफ निलंबन की मांग उठ रही है। सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि अगर समय रहते इंदापुर की छात्रा के आरोपी को पकड़ लिया जाता, तो आज देश की एक भविष्य की इंजीनियर जिंदा होती।