न्यायालय ने उज्ज्वला थिटे की अपील याचिका खारिज की (सौजन्यः सोशल मीडिया) 
सोलापुर

न्यायालय ने उज्ज्वला थिटे की अपील याचिका खारिज की, अनगर नगराध्यक्ष पद पर निर्विरोध चुनाव की पुष्टि

Ujjwala Thite Appeal Dismisse: सोलापुर जिला न्यायाधीश प्रशांत राजवैद्य की अदालत में उज्वला थिटे, प्राजक्ता पाटिल और सरकारी पक्ष की ओर से तीनों वकीलों की बहस पूरी हो चुकी थी।

आंचल लोखंडे

Solapur Political News: सोलापुर जिले के अनगर नगर पंचायत के नगराध्यक्ष पद का चुनाव बिनविरोध होने के बाद राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) की उम्मीदवार उज्ज्वला थिटे ने सोलापुर सत्र न्यायालय में अपील दायर की थी। उनके नामांकन पत्र को खारिज किए जाने के खिलाफ यह याचिका दायर की गई थी। सोमवार को इस मामले पर दोनों पक्षों की बहस पूरी हुई और न्यायालय ने उज्वला थिटे की अपील को खारिज कर दिया। जिला न्यायाधीश प्रशांत राजवैद्य ने नामांकन खारिज करने संबंधी चुनाव निर्णय अधिकारी के आदेश को बरकरार रखा है।

याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया था कि उनके नामांकन पत्र पर की गई हस्ताक्षर को जानबूझकर मिटाया गया। इस पर सरकारी पक्ष ने तर्क दिया कि यदि वास्तव में हस्ताक्षर मिटाने की घटना हुई थी, तो इसकी शिकायत पुलिस में क्यों नहीं की गई? करीब चार घंटे चली सुनवाई के बाद न्यायालय ने निर्णय सुनाया। करीब आठ दिनों से प्राजक्ता पाटिल की निर्विरोध जीत पर जो कानूनी संशय बना हुआ था, वह अब समाप्त हो गया है और उनकी निर्विरोध विजय पर आधिकारिक मुहर लग गई है। उज्ज्वला थिटे के वकील दत्तात्रय घोड़के ने कहा कि “हमें कोर्ट ने ऑपरेटिव ऑर्डर बताया है, हमारा अपील आवेदन खारिज कर दिया गया है। विस्तृत आदेश कल प्राप्त होगा, तभी निर्णय के आधार का पता चलेगा।”

कोर्ट में थिटे पक्ष की दलील

उज्ज्वला थिटे की ओर से वकील दत्तात्रय घोड़के ने करीब डेढ़ घंटे अपनी दलीलें रखीं। उन्होंने बताया कि नामांकन दाखिल करते समय उज्ज्वला थिटे को किन-किन कठिनाइयों का सामना करना पड़ा और चुनाव निर्णय अधिकारी ने किस तरह से कार्य किया। उन्होंने प्रशासन पर हस्ताक्षर गायब करने सहित गंभीर गड़बड़ी करने का आरोप लगाया।

सरकारी वकील की दलील

सरकारी वकील प्रदीपसिंह राजपूत ने कहा कि यदि चुनाव निर्णय अधिकारी के कार्य पर आपत्ति थी तो जिला चुनाव निर्णय अधिकारी या चुनाव आयोग के पास शिकायत क्यों नहीं की गई? उन्होंने यह भी कहा उज्ज्वला थिटे NCP की उम्मीदवार हैं, यदि उन पर दबाव था, तो पार्टी ने कोई कदम क्यों नहीं उठाया? चुनाव निर्णय अधिकारी ने नियमों के अनुसार ही कार्रवाई की है। इसलिए अपील खारिज की जाए।

प्राजक्ता पाटिल के वकील का पक्ष

अधिवक्ता महेश जगताप ने कहा “इस पूरे मामले से हमारी उम्मीदवार प्राजक्ता पाटिल का कोई संबंध नहीं है। नामांकन पर आपत्ति किसी निर्दलीय उम्मीदवार ने उठाई थी, जिन्होंने बाद में अपना नाम वापस ले लिया।” उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि “NCP की आंतरिक राजनीति के तहत वर्तमान जिलाध्यक्ष ने पूर्व जिलाध्यक्ष राजन पाटिल के खिलाफ राजनीतिक बदले की भावना से यह विवाद खड़ा किया है।”

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