INS Guldar Submarine Tourism Project: भारत के पर्यटन क्षेत्र में एक ऐतिहासिक अध्याय जुड़ गया है। महाराष्ट्र पर्यटन विकास महामंडल (MTDC) ने सिंधुदुर्ग जिले के निवती रॉक क्षेत्र में भारतीय नौसेना की सेवानिवृत्त युद्धनौका "एक्स-आयएनएस गुलदार" (Ex-INS Guldar) को समुद्र की गहराई में सफलतापूर्वक स्थापित कर दिया है। इसके साथ ही देश के पहले और बेहद महत्वाकांक्षी पनडुब्बी पर्यटन परियोजना (Submarine Tourism Project) का सपना साकार हो गया है।
महाराष्ट्र के पर्यटन मंत्री शंभूराज देसाई ने कहा कि यह प्रोजेक्ट मेसर्स माझगाव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड के समन्वय से कार्यान्वित किया जा रहा है। यह भारत के पर्यटन क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है और एक विश्व-स्तरीय समुद्री पर्यटन आकर्षण के रूप में उभरने के लिए पूरी तरह तैयार है।
पर्यटन मंत्री शंभूराज देसाई ने बताया कि इस प्रोजेक्ट के जरिए देश में पहली बार इंटीग्रेटेड सबमरीन आधारित 'अनुभवात्मक पर्यटन' (Experiential Tourism) की शुरुआत हो रही है। यहां पर्यटकों और एडवेंचर के शौकीनों को कई सुविधाएं मिलेंगी।
इन सभी डाइविंग स्लॉट्स, सबमरीन बुकिंग और पर्यटक सुविधाओं की विस्तृत जानकारी जल्द ही MTDC के आधिकारिक डिजिटल प्लेटफॉर्म पर जारी की जाएगी।
मंत्री शंभूराज देसाई ने कहा कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा अजित पवार के मार्गदर्शन में इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट ने काफी गति पकड़ी है। इसके अलावा, यह परियोजना वर्तमान में राज्य मंत्री इंद्रनील नाईक, पर्यटन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव संजय खंडारे और MTDC के प्रबंध निदेशक नीलेश गातने (IAS) के संयुक्त प्रयासों से सफलतापूर्वक लागू की जा रही है। इस परियोजना के लिए केंद्र सरकार ने 46.91 करोड़ रुपए की राशि स्वीकृत की है, जबकि महाराष्ट्र सरकार ने 112.46 करोड़ रुपए की मंजूरी दी है।
INS Guldar भारतीय नौसेना की मगर श्रेणी का एक लैंडिंग शिप टैंक (LST) है। यह जहाज 12 जनवरी 2024 को राष्ट्र की 39 वर्षों की शानदार सेवा के बाद सेवामुक्त किया गया था। इस जहाज को 30 दिसंबर 1985 को पोलैंड के गदीनिया शिपयार्ड में कमीशन किया गया था। इसकी लंबाई 83.9 मीटर है। INS Guldar उभयचर युद्ध अभियानों, सैनिकों और साजो-सामान के परिवहन, तटीय सुरक्षा और विभिन्न नौसैनिक प्रशिक्षण अभ्यासों में सक्रिय रूप से तैनात रही। 19 मई 2026 को मुंबई स्थित मेसर्स मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL) के प्रयासों से इस युद्धपोत को सिंधुदुर्ग के तट से दूर निवती रॉक क्षेत्र में लगभग 22 मीटर की गहराई पर समुद्र तल पर स्थापित किया गया।
मंत्री देसाई ने बताया कि इस विशिष्ट स्थान का चयन महाराष्ट्र मैरीटाइम बोर्ड और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओशनोग्राफी द्वारा किए गए एक विस्तृत वैज्ञानिक अध्ययन के बाद किया गया था।
जहाज को डुबाने से पहले उसका पर्यावरणीय विसंक्रमण किया गया। पूर्व-INS गुलदार की मजबूत स्टील संरचना अब एक कृत्रिम कोरल रीफ के रूप में काम करेगी, जिससे समुद्री जैव विविधता, कोरल के विकास, मत्स्य संसाधनों और पारिस्थितिक संतुलन को बढ़ावा मिलेगा। इस परियोजना में जेट्टी से निवती रॉक तक स्पीडबोट से यात्रा करना, वहां खड़े एक बार्ज पर चढ़ना, और उसके बाद स्नॉर्कलिंग या स्कूबा डाइविंग के जरिए जहाज के भीतर कोरल और मछलियों को देखना शामिल है।
इस प्रोजेक्ट से सिंधुदुर्ग जिले समेत पूरे कोंकण तट की पर्यटन अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा। देश-विदेश से पर्यटकों की बढ़ती आमद से स्थानीय व्यवसायों, ठहरने की सुविधाओं, परिवहन, खाद्य उद्योग और पर्यटन सेवाओं में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। यह प्रोजेक्ट स्थानीय आर्थिक विकास, स्थानीय रोजगार सृजन और सहायक व्यवसायों के लिए एक अहम केंद्र के रूप में उभरने के लिए तैयार है।
'Ex-INS गुलदार' प्रोजेक्ट महाराष्ट्र में पहली बार विश्व-स्तरीय पनडुब्बी पर्यटन अनुभव के विकास का प्रतीक है। यह पहल एडवेंचर टूरिज़्म, स्कूबा डाइविंग, पानी के नीचे की खोज और समुद्री पर्यटन के क्षेत्रों में एक नया आयाम जोड़ने वाली है, जिससे महाराष्ट्र को देश के भीतर एक प्रमुख एडवेंचर टूरिज़्म डेस्टिनेशन के रूप में स्थापित करने में मदद मिलेगी।
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समुद्र तल पर स्थित यह युद्धपोत समय के साथ धीरे-धीरे एक कृत्रिम रीफ (चट्टान) का रूप ले लेगा, जिससे समुद्री जैव विविधता के लिए एक अनुकूल वातावरण तैयार होगा। यह विभिन्न प्रकार की मछलियों, समुद्री वनस्पतियों और सूक्ष्मजीवों के लिए एक संरक्षित आवास के रूप में कार्य करेगा।
इस प्रोजेक्ट को फ्लोरिडा में USS Oriskany और ऑस्ट्रेलिया में HMAS Swan जैसी विश्व-स्तरीय wreck diving sites से प्रेरणा लेकर तैयार किया गया है। यह भारत का पहला विश्व-स्तरीय अंडरवॉटर म्यूज़ियम और आर्टिफिशियल कोरल रीफ पर्यटन प्रोजेक्ट बनने जा रहा है।
MTDC के जरिए स्कूबा डाइवर्स, समुद्री मामलों के जानकार, छात्र, फ़ोटोग्राफ़र्स और शोधकर्ता समेत भारत और विदेशी पर्यटकों को इस अनोखे अंडरवॉटर पर्यटन अनुभव का हिस्सा बनने के लिए आमंत्रित किया जा रहा है।