Sampoorna Shiksha Kavach Filo AI Tutor: भारतीय सरकारी शिक्षा व्यवस्था इस समय दुनिया के सबसे बड़े और अनोखे डिजिटल बदलाव की गवाह बन रही है। जहां कभी सरकारी स्कूलों में फेल होने वाले छात्रों की संख्या एक गंभीर चुनौती थी, वहीं अब एआई (AI) आधारित पर्सनल ट्यूटरिंग प्रोग्राम के कारण महज एक साल में फेलियर रेट में 70% तक की भारी गिरावट दर्ज की गई है। कई पिछड़े जिलों के सरकारी स्कूलों का पास प्रतिशत सिर्फ 12 महीनों में 87% से उछलकर 99.3% तक पहुंच गया है।
यह क्रांतिकारी बदलाव झारखंड, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, मेघालय और राजस्थान के सरकारी स्कूलों में देखने को मिल रहा है। इस सफलता के पीछे 'संपूर्ण शिक्षा कवच' (एसएसके) प्रोग्राम है, जिसे राज्य सरकारों और दिल्ली स्थित एआई एजुकेशन स्टार्टअप 'फिलो' ने पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) के तहत शुरू किया है। फिलो की एनसीईआरटी (NCERT) के साथ भी अकादमिक साझेदारी है। यह प्लेटफॉर्म छात्रों को 24x7 लाइव वन-ऑन-वन पर्सनल टीचर सपोर्ट देता है, वह भी पूरी तरह मुफ्त।
झारखंड एकेडमिक काउंसिल (JAC) के 2026 के आधिकारिक नतीजों के मुताबिक, कभी संघर्षपूर्ण माना जाने वाला लातेहार जिला कक्षा 12 साइंस रैंकिंग में 2023 के 13वें स्थान से उठकर 2025 और 2026 में लगातार पहले स्थान पर बना हुआ है। लातेहार ने 93.25% पास प्रतिशत हासिल किया है। वहीं, नीति आयोग के एस्पिरेशनल डिस्ट्रिक्ट्स में शामिल गुमला जिला कक्षा 10 की रैंकिंग में 20वें स्थान से छलांग लगाकर सीधे नंबर-1 पर पहुंच गया है। दुमका जिले में एसएसके स्कूलों का पास प्रतिशत 98.2% रहा, जबकि गैर-एसएसके स्कूलों का प्रदर्शन सिर्फ 77.3% ही रहा।
महाराष्ट्र के सांगली जिले में 2026 के एसएससी बोर्ड रिजल्ट्स ने यह स्पष्ट रूप से दिखा दिया कि छात्रों के प्रदर्शन में सबसे बड़ा फर्क इस बात से आया कि उन्होंने फिलो के एआई ट्यूटरिंग प्लेटफॉर्म का कितना उपयोग किया। ब्लॉक के 42 सरकारी स्कूलों में जिन स्कूलों के 50% से ज्यादा छात्रों ने इस प्लेटफॉर्म को अपनाया और 30,000 से अधिक लर्निंग सेशंस पूर्ण किए। वहां पास प्रतिशत में साल-दर-साल सिर्फ 2.4 प्रतिशत अंकों की गिरावट दर्ज हुई। वहीं, जिन स्कूलों में इसका इस्तेमाल कम रहा, वहां पास प्रतिशत 9.2 प्रतिशत अंक तक गिर गया। यानि 50% इस्तेमाल के स्तर पर दोनों के बीच 6.8 प्रतिशत अंकों का बड़ा अंतर देखने को मिला।
खास बात यह रही कि यह बदलाव सिर्फ 5 महीनों से भी कम समय में देखने को मिला, जबकि बाकी जगहों पर रिजल्ट लगातार नीचे जा रहे थे। सांगली का यह आंकड़ा कोई अकेला उदाहरण नहीं है, बल्कि यह उस बड़े बदलाव का हिस्सा है, जो अब छह राज्यों में स्पष्ट रूप से प्रदर्शित होने लगा है।
मध्य प्रदेश के विदिशा में एक छोटे से पायलट प्रोजेक्ट में ही छात्रों ने 2025-26 के सत्र में 90% से अधिक अंक हासिल किए। हिमाचल प्रदेश, मेघालय और राजस्थान में भी इस मॉडल को राज्य स्तर पर अपनाया गया है।
को-फाउंडर, फिलो के को-फाउंडर रोहित कुमार ने कि पढ़ाई में आने वाली परेशानी देश के हर कोने में एक जैसी है। हर बच्चा चाहता है कि रात 10 बजे भी यदि उसे कोई सवाल समझ न आए, तो उसे तुरंत मदद मिले। बोर्ड रिजल्ट्स साबित कर रहे हैं कि हमारा एआई मॉडल सही दिशा में काम कर रहा है।
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इस एआई मॉडल का असर सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है। अमेरिका की जॉन्स हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी द्वारा जेफरसन काउंटी में किए गए एक स्वतंत्र अध्ययन में पाया गया कि फिलो के उपयोग से अश्वेत और कम आय वाले छात्रों के मैथ्स और इंग्लिश स्कोर में उल्लेखनीय सुधार हुआ।
इस बेहतरीन कार्य के लिए भारत सरकार ने एसएसके को वर्ष 2023 और 2025 में नेशनल अवॉर्ड्स फॉर ई-गवर्नेंस का गोल्ड अवॉर्ड प्रदान किया है। साथ ही नीति आयोग ने 'नीति फॉर स्टेट्स अवॉर्ड्स 2025' में इसे शिक्षा श्रेणी में देश की सर्वश्रेष्ठ पहल मानते हुए प्रथम पुरस्कार से नवाजा है।