फाइल फोटो [स्रोत: सोशल मीडिया] 
महाराष्ट्र

महाराष्ट्र-झारखंड चुनाव पर संघ सख्त, हरियाणा की तरह ग्राउंड ज़ीरो पर दिखेंगे स्वयंसेवक...

महाराष्ट्र तथा झारखंड विधानसभा चुनाव को लेकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने अपनी तैयारियां तेज़ कर दी है। संघ हमेशा की तरह पर्दे की पीछे रहेगा और ज़मीन मजबूत करेगा।

प्रतीक मिश्रा

मुंबई: भारत निर्वाचन आयोग ने महाराष्ट्र तथा झारखंड में होने वाले विधानसभा चुनावों की तारीखों का एलान कर दिया है। महाराष्ट्र में जहां 20 नवम्बर को एक ही चरण में सभी 288 विधानसभा सीटों पर चुनाव हो जायेगा तो वहीं झारखंड में दो चरणों में चुनाव होना है, जिसमे पहले चरण में 13 नवम्बर को 43 सीटों पर मतदान होगा और 20 नवम्बर को शेष बची 38 सीटों पर दूसरे चरण के चुनाव में वोट डाले जायेंगे। दोनों ही राज्यों में 23 नवम्बर को एक साथ वोटों की गिनती होगी।

चुनाव की तारीखों का ऐलान होने के बाद से ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अपने जमीनी कामों की तैयारी में जुट गया है। जिस तरह से संघ ने कुछ दिन पहले हरियाणा विधानसभा चुनाव में अपने ग्राउंड जीरो पर किए गए कामों से सफलता हासिल की है, ठीक उसी तरह संघ अपने प्रदर्शन को महाराष्ट्र और झारखंड के विधानसभा चुनाव में भी दोहराना चाहता है।

संघ के वर्किंग स्टाइल को देखकर यह माना जा सकता है, कि संघ के स्वयंसेवक दोनों राज्यों के चुनाव में छोटी-छोटी टोलियां बनाकर, साप्ताहिक मिलन, शाखाओं पर बैठक, नुक्कड़ सभाओं, चौक चर्चाओं तथा माइक्रो मैनेजमेंट और बूथ मैनेजमेंट के जरिए भाजपा का जमीन पर माहौल बनाने का काम करेगा।

मतदाता जागरूकता जैसे रचनात्मक काम

संघ ने हरियाणा की तरह महाराष्ट्र और झारखंड के चुनाव में भी बीजेपी को जीताने के लिए अपनी ताकत लगाना शुरू कर दी है। संघ का सबसे अधिक जोर मतदान का प्रतिशत बढ़ाने पर होता है। जितना अधिक मतदान होता है, उतना अधिक लाभ बीजेपी को मिलता है। संघ के विस्तारक, प्रचारक तथा अनुसांगिक संगठनों के पूर्णकालिक कार्यकर्ता अलग-अलग जिम्मेदारियो के तहत अपने-अपने कामों में लगे हुए हैं।

हारी सीटें, कमजोर बूथ नज़र में

संघ आम मतदाताओं के बीच जाकर भाजपा के लिए एक मजबूत ज़मीन तैयार करने का काम कर रहे हैं, दोनों ही राज्यों में कमजोर बूथों की समीक्षा कर वहां अतिरिक्त ताकत लगाई जा रही है। यह माना जा रहा है, कि हारी हुई सीटों और कमजोर बुध पर संघ खासा ध्यान दे रहा है। संघ की योजनों को मूर्त रूप देने के लिए स्वयंसेवक मैदान संभाल चुके है और हमेशा की तरह इस बार भी संघ पर्दे के पीछे रहकर मौन धारण कर अपना काम करेगा।

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