मुंढवा जमीन घोटाला मामले में आर्थिक अपराध शाखा ने सुनेत्रा पवार के दो OSD को नोटिस थमाया है।
पुणे पुलिस की EOW को जांच के दौरान इन अधिकारियों की संदिग्ध व्हाट्सएप चैट और कई अहम दस्तावेज हाथ लगे हैं।
पार्थ पवार की कंपनी से जुड़ी 40 एकड़ सरकारी जमीन के इस सौदे में प्रशासनिक स्तर पर बड़ी कार्रवाई की गई है।
Sunetra Pawar OSD EOW Notice: महाराष्ट्र के बहुचर्चित और करोड़ों रुपये के मुंढवा जमीन घोटाला मामले में राज्य की उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार की मुश्किलें लगातार बढ़ती नजर आ रही हैं। इस हाई-प्रोफाइल मामले में जांच कर रही पुणे पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार के दो बेहद करीबी OSD विकास पाटिल और राम चौबे को नोटिस जारी कर दिया है।
EOW की इस धड़ाधड़ कार्रवाई के बाद राज्य के प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में भारी हड़कंप मच गया है।
विकास पाटिल और राम चौबे दोनों ही वरिष्ठ शासकीय अधिकारी हैं, जो वर्तमान में उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार के OSD के रूप में कार्यरत हैं। जब मुंढवा जमीन सौदे का यह विवाद पहली बार सामने आया था, तब ये दोनों अधिकारी तत्कालीन उपमुख्यमंत्री अजीत पवार के पीए के रूप में तैनात थे। EOW को आशंका है कि मुंढवा स्थित 40 एकड़ सरकारी जमीन के सौदे में इन दोनों अधिकारियों ने प्रशासनिक स्तर पर मध्यस्थता की, सबूतों के साथ छेड़छाड़ की और आरोपियों को मदद पहुंचाई।
सामाजिक कार्यकर्ताओं अंजली दमानिया और विजय कुंभार ने पहले ही आरोप लगाया था कि इन अधिकारियों ने पार्थ पवार को बचाने और प्रशासनिक स्तर पर सहायता देने के लिए मध्यस्थता की थी। जांच एजेंसियों के हाथ इन दोनों अधिकारियों की संदिग्ध व्हाट्सएप चैटिंग और दस्तावेज लगे हैं, जिनमें जमीन सौदे से जुड़े व्यक्तियों और राजस्व अधिकारियों के साथ संवाद के प्रमाण मिले हैं। इसी व्हाट्सएप चैट को आधार बनाकर EOW अब दोनों OSD अधिकारियों से गहराई से पूछताछ करने की तैयारी कर रही है।
पुणे के मुंढवा इलाके में स्थित लगभग 40 एकड़ जमीन (सर्वे नंबर 88) मूल रूप से महार वतन श्रेणी की भूमि है, जो बॉटनिकल सर्वे ऑफ इंडिया को लीज पर दी गई थी। राज्य सरकार की अनिवार्य मंजूरी के बिना, इस सरकारी भूमि को महज ₹300 करोड़ में अमेडिया एंटरप्राइज एलएलपी नामक कंपनी को बेच दिया गया था, जबकि इसका अनुमानित बाजार मूल्य ₹1,800 करोड़ से ₹2,000 करोड़ आंका गया था।
अमेडिया एंटरप्राइज कंपनी में उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार के बेटे और राज्यसभा सांसद पार्थ पवार 99% के मुख्य हिस्सेदार हैं, जबकि उनके चचेरे भाई दिग्विजय पाटिल 1% के पार्टनर हैं। इतना ही नहीं, इस करोड़ों के सौदे में डाटा सेंटर नीति का हवाला देकर ₹21 करोड़ की स्टाम्प ड्यूटी माफ करवा ली गई थी और महज ₹500 का स्टाम्प शुल्क जमा किया गया था, जिसे बाद में राजस्व प्राधिकरण ने अवैध ठहराते हुए ₹21 करोड़ की देनदारी को बरकरार रखा।
इस घोटाले में पावर ऑफ अटॉर्नी धारक शीतल तेजवानी, निलंबित सब-रजिस्ट्रार रवींद्र तरु और निलंबित तहसीलदार सूर्यकांत येवले के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है। पुणे की सिविल कोर्ट पहले ही इस पूरी सेल डीड को निरस्त घोषित कर रद्द कर चुकी है।
इसके अलावा, बॉम्बे हाईकोर्ट ने भी जांच एजेंसियों से तीखा सवाल किया था कि कंपनी में 99% हिस्सेदारी रखने वाले पार्थ पवार को आरोपी क्यों नहीं बनाया गया। अब उपमुख्यमंत्री के OSD अधिकारियों को EOW का नोटिस मिलने से मामले की आंच सीधे पवार परिवार के करीबी प्रशासनिक घेरे तक पहुंच गई है।