पुणे छात्रों का महामोर्चा (सोर्सः सोशल मीडिया) 
पुणे

पुणे में शिक्षा व्यवस्था के खिलाफ छात्रों का महामोर्चा, केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग

Pune Student Protest: पुणे में 'कॉकरोच जनता पार्टी' के बैनर तले छात्रों और अभिभावकों का विशाल मोर्चा। शिक्षा सुधार और लाठीचार्ज के विरोध में धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग।

रूपम सिंह

Pune Student Protest Lal Mahal To Collector Office: पुणे में शुक्रवार को छात्रों, अभिभावकों और विभिन्न सामाजिक संगठनों ने शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को लेकर बड़ा प्रदर्शन किया। 'कॉकरोच जनता पार्टी' के बैनर तले लाल महल से जिला कलेक्टर कार्यालय तक विशाल मोर्चा निकाला गया। प्रदर्शन के दौरान धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दो, शिक्षा हमारे अधिकार का, नहीं किसी के बाप का और इंकलाब जिंदाबाद जैसे नारों से पूरा इलाका गूंज उठा। प्रदर्शनकारियों ने शिक्षा व्यवस्था में सुधार और जवाबदेही की मांग की।

छात्रों के साथ सामाजिक संगठनों का समर्थन

मोर्चे में 'जेन-जी' के युवा, पीएचडी शोधार्थी, स्कूली छात्र, अभिभावक और कई सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए। सत्यशोधक शेतकरी सभा, अखिल भारतीय समाजवादी शिक्षण हक सभा, जन आंदोलनों का राष्ट्रीय समन्वय, राष्ट्र सेवा दल और लोकशाही उत्सव समिति सहित कई संगठनों ने आंदोलन का समर्थन किया। रैली दोपहर तीन बजे लाल महल से शुरू होकर फडके हौद, दारूवाला पुल, नरपतगिरी चौक और पुरानी जिला परिषद मार्ग से होते हुए जिला कलेक्टर कार्यालय पहुंची।

शिक्षा व्यवस्था और पुलिस कार्रवाई पर जताया विरोध

प्रदर्शनकारियों ने हाल में छात्रों पर हुई कथित पुलिस लाठीचार्ज की घटना और शिक्षा के बढ़ते व्यावसायीकरण को लेकर नाराजगी व्यक्त की। वक्ताओं का आरोप था कि शिक्षा व्यवस्था लगातार कमजोर हो रही है और छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। प्रदर्शन के दौरान केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से नैतिक आधार पर इस्तीफे की मांग भी उठाई गई।

सुरक्षा के कड़े इंतजाम, कई मार्गों पर ट्रैफिक प्रभावित

मोर्चे को देखते हुए पुणे पुलिस ने शहर के मध्य क्षेत्र में व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की थी। शनिवारवाड़ा से जिला कलेक्टर कार्यालय तक भारी पुलिस बल तैनात किया गया। रैली के कारण कई प्रमुख मार्गों पर कुछ समय के लिए यातायात प्रतिबंधित रहा, जिससे वैकल्पिक मार्गों पर ट्रैफिक जाम की स्थिति बनी।

प्रदर्शनकारियों ने शिक्षा सुधार की उठाई मांग

आंदोलन में शामिल किशोर ढमाले ने कहा कि यह छात्रों के भविष्य की महत्वपूर्ण लड़ाई है और सरकार को ऐसी शिक्षा व्यवस्था लागू करनी चाहिए जो सामाजिक और आर्थिक रूप से न्यायसंगत हो। छात्रा कोमल काले ने कहा कि आंदोलन केवल एक मंत्री के इस्तीफे तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरी शिक्षा प्रणाली में व्यापक बदलाव की मांग करता है।

वहीं NEET परीक्षार्थी विलास लोंढे ने सरकारी स्कूलों के बंद होने और निजी शिक्षा के महंगी होने पर चिंता जताते हुए कहा कि समय रहते आवाज उठाना जरूरी है, ताकि आने वाली पीढ़ियों का भविष्य सुरक्षित रह सके।

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