(प्रतीकात्मक तस्वीर) 
पुणे

Pune: शिरूर की राजनीति में बड़ा उलटफेर, कटके-पवार साथ आए, कार्यकर्ता उलझन में

Shirur District की राजनीति में बड़ा बदलाव सामने आया है। कभी आमने-सामने रहे विधायक माऊलि कटके और अशोक पवार अब एक मंच पर हैं, लेकिन गठबंधन के बावजूद जमीनी कार्यकर्ता असमंजस में हैं।

अपूर्वा नायक

Pune News In Hindi: शिरूर तहसील की राजनीति में एक अनोखा मोड़ देखने को मिल रहा है। विधानसभा चुनाव में एक-दूसरे के खिलाफ पूरी ताकत से लड़ने वाले वर्तमान विधायक माऊलि कटके और पूर्व विधायक अशोक पवार अब एक साथ आ गए हैं।

वरिष्ठ स्तर पर राकां के दोनों गुटों के बीच गठबंधन और 'मनोमिलन' तो हो गया है, लेकिन जमीनी स्तर पर काम करने वाले कार्यकर्ताओं के बीच की खाई अभी भी बरकरार है। नेताओं के हाथ मिलाने से कार्यकतों भ्रमित है कि वह कल तक के अपने प्रतिद्वंद्वी के साथ तालमेल कैसे बिठाए।

बदले समीकरण और दलबदल की लहर

  • जिला परिषद चुनाव की घोषणा के साथ ही महायुति के समीकरण बदलते नजर आ रहे हैं। इस बार दोनों राष्ट्रवादी गुटों ने मिलकर 'घड़ी' के चुनाव चिह्न पर लड़ने का फैसला किया है।
  • पूर्व विधायक अशोक पवार की पत्नी सुजाता पवार ने भी इसी चिह्न पर अपना नामांकन भरा है।
  • लेकिन इस फैसले ने शरद पवार गुट के उन उम्मीदवारों को संकट में डाल दिया जो 'तुतारी' पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे थे।
  • टिकट न मिलने की नाराजगी के कारण कई दिग्गज नेताओं ने पार्टी छोड़ दी, जिससे तहसील में शरद पवार गुट की स्थिति कमजोर होती दिख रही है।

प्रमुख क्षेत्रों में 'अपनों' के बीच ही महासंग्राम

दलबदल के कारण कई जिला परिषद गट में मुकाबला बेहद रोचक हो गया है: कवठे टाकली हाजी गटः यहां पूर्व विधायक पोपटराव गावड़े और उन‌के परिवार ने भाजपा का दामन थाम लिया है। अब मुकाबला भाजपा के राजेंद्र गावड़े और राष्ट्रवादी के दामू घोडे के बीच है। रांजणगांव-कारेगांव गटः यहां का मुकाबला पारिवारिक जंग में बदल गया है। दो जेठानियां, स्वाति पाचुंदकर (भाजपा) और ज्योति पाचुंदकर (राकां) एक-दूसरे के खिलाफ मैदान में हैं। वहीं शिवसेना की अर्चना शिंदे ने उतरकर मुकाबले को त्रिकोणीय बना दिया है। शिक्रापुर-सणसवाडी गटः यहां राष्ट्रवादी ने मोनिका हरगुडे को उम्मीदवार बनाया है, जिससे नाराज होकर कुसुम मांढरे ने बगावत कर दी और निर्दलीय नामांकन दाखिल कर दिया है।

पार्टी निष्ठा बनाम चुनावी अवसरवाद

तलेगांव रांजणगाव सांडस और न्हावरा जैसे जिला परिषद गट में भी स्थिति गंभीर है। यहां भाजपा और राष्ट्रवादी दोनों ही दलों ने ऐन वक्त पर दल बदल कर आए नेताओं को टिकट दिए हैं, जिससे पुराने निष्ठावान कार्यकर्ता खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।

तलेगाव में रेखा बादल और दीपाली गव्हाणे के बीच मुकाबला है, जबकि कई इच्छुक उम्मीदवारों ने निर्दलीय मोर्चा खोल दिया है। न्हावरा में भाजपा ने मालती पाचर्णे को उतारा है, जिनके सामने राष्ट्रवादी की वृषाली वालके चुनौती पेश कर रही है।

नेताओं के लिए अग्निपरीक्षा

शिरूर में वर्तमान स्थिति ऐसी है कि नेताओं ने तो गठबंधन कर लिया है, लेकिन स्थानीय कार्यकर्ताओं के बीच समन्वय बिठाना उनके लिए सबसे बड़ी चुनौती है। दादा पाटिल फराटे और सुधीर फराटे जैसे नेताओं द्वारा बनाई गई 'स्थानीय आघाडी' ने सभी स्थापित दलों की चिंता बढ़ा दी है।

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