Samruddhi Mahamarg Green project: हिंदुहृदयसम्राट बालासाहेब ठाकरे महाराष्ट्र समृद्धि महामार्ग पर विकसित की गई लगभग 727 करोड़ रुपये मूल्य की विशाल हरित संपत्ति की जिम्मेदारी अब वन विभाग को सौंप दी गई है। इस निर्णय से देश की सबसे बड़ी राजमार्ग हरितीकरण परियोजनाओं में शामिल इस महत्वाकांक्षी पहल के संरक्षण, संवर्धन और दीर्घकालीन रखरखाव को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है। यह जानकारी विभागीय वन अधिकारी सुनील शिंदे ने दी।
नागपुर से ठाणे तक फैले 701 किलोमीटर लंबे समृद्धि महामार्ग के दोनों ओर पर्यावरण संरक्षण और हरित संतुलन को ध्यान में रखते हुए बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण किया गया है। महामार्ग के किनारे लगभग 4,500 हेक्टेयर क्षेत्र में 30 लाख से अधिक वृक्षों तथा विभिन्न प्रजातियों के पौधों का रोपण किया गया है। इस परियोजना का उद्देश्य केवल सड़क के आसपास हरियाली बढ़ाना ही नहीं, बल्कि जैव विविधता को प्रोत्साहन देना, प्रदूषण कम करना और यात्रियों को बेहतर पर्यावरणीय अनुभव उपलब्ध कराना भी है।
इस विशाल हरित परियोजना के संरक्षण के लिए अत्याधुनिक सिंचाई व्यवस्था विकसित की गई है। इसके अंतर्गत अनेक कुएं, जल स्रोत, जलाशय, पंपगृह तथा हजारों किलोमीटर लंबा ड्रिप सिंचाई नेटवर्क तैयार किया गया है। आधुनिक सिंचाई प्रणाली के कारण पौधों को नियमित रूप से पानी उपलब्ध कराया जा सकेगा, जिससे उनकी जीवित रहने की दर और विकास में सुधार होगा।
वन विभाग अब इस पूरी हरित संपत्ति के वृक्षारोपण, संरक्षण, रखरखाव और सिंचाई व्यवस्था के संचालन की जिम्मेदारी संभालेगा। विभाग समय-समय पर पौधों की निगरानी, रोग नियंत्रण और आवश्यक संरक्षण उपाय भी करेगा, ताकि आने वाले वर्षों में यह हरित पट्टी और अधिक विकसित हो सके।
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इस कार्य के लिए आवश्यक वित्तीय सहायता महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास महामंडल (एमएसआरडीसी) द्वारा उपलब्ध कराई जाएगी। इसके लिए वन विभाग और एमएसआरडीसी के बीच एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए हैं। अधिकारियों का मानना है कि दोनों विभागों के समन्वय से समृद्धि महामार्ग की हरित संपदा का प्रभावी संरक्षण सुनिश्चित होगा।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह पहल राज्य में हरित अवसंरचना विकास का एक आदर्श मॉडल साबित हो सकती है। इससे पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलने के साथ-साथ जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने और राजमार्ग के आसपास हरित आवरण बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण योगदान मिलेगा।