Purandar Airport Land Acquisition Bombay High Court Verdict: महाराष्ट्र के पुणे जिले के पुरंदर में प्रस्तावित छत्रपति संभाजीराजे ग्रीनफील्ड अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के निर्माण का रास्ता अब पूरी तरह से साफ हो गया है। बॉम्बे हाईकोर्ट ने 22 सितंबर को उन याचिकाओं को खारिज कर दिया, जिनमें हवाई अड्डे के लिए भूमि अधिग्रहण का विरोध किया गया था और हवाई अड्डे के स्थान को बदलने की मांग की गई थी। इसके बाद कलेक्टर ने भी किसानों को सहमति के लिए 10 अक्टूबर तक का समय दिया है। इस फैसले से बहुप्रतीक्षित अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के निर्माण में अब और तेजी आएगी।
बॉम्बे कोर्ट ने कहा कि जगह चुनने का काम पूरी तरह से टेक्निकल एक्सपर्ट्स का है और यह सरकारी पॉलिसी के दायरे में आता है। कोर्ट कोई एक्सपर्ट संस्था नहीं है जो राज्य के पॉलिसी से जुड़े फैसलों में दखल दे। याचिकाकर्ता जमीन अधिग्रहण या मुआवजे के मामले में संबंधित अधिकारियों से समाधान मांग सकते हैं।
इसके अलावा, अगर उन्हें लगता है कि मुआवजा कम है या नियमों के अनुसार नहीं है, तो वे इसे चुनौती दे सकते हैं। कोर्ट ने कहा कि भले ही याचिकाकर्ताओं को समाधान मांगने का कानूनी अधिकार है, लेकिन उन्हें राज्य सरकार के पॉलिसी से जुड़े फैसले को चुनौती देने का कानूनी अधिकार नहीं है।
बॉम्बे कोर्ट के आदेश के बाद पुणे के कलेक्टर जितेंद्र डुडी ने पुरंदर के किसानों से सहयोग की अपील की है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने पुरंदर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के लिए किसानों के व्यापक हितों को ध्यान में रखते हुए एक बहुत बड़ा मुआवजा पैकेज तैयार किया है। मेरी सभी किसानों से अपील है कि वे बढ़ाई गई समयसीमा के भीतर अपनी सहमति दर्ज कराएं, जो उनके हित में है।
पुणे कलेक्टर जितेंद्र डुडी ने स्पष्ट किया कि सहमति से होने वाले भूमि अधिग्रहण पर किसानों को 10 प्रतिशत अतिरिक्त रिटर्न और MIDC की पुनर्वास नीति के तहत सभी अनुषंगिक लाभ दिए जाएंगे। उन्होंने किसानों को सलाह दी कि वे अपने व्यक्तिगत पारिवारिक या भूमि संबंधी विवादों को सुलझाकर मुआवजे की राशि स्वीकार करें, ताकि उनका पैसा अदालती प्रक्रियाओं में न फंसे।
पुणे जिला प्रशासन ने उन किसानों को अपनी सहमति दर्ज कराने के लिए एक और मौका दिया है जिन्होंने अभी तक कागजातों पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं। किसानों की सुविधा के लिए 25 सितंबर से 10 अक्टूबर तक समयसीमा बढ़ाई गई है। प्रशासन का लक्ष्य 20 अक्टूबर तक पूरी भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया को संपन्न करना है।
हालांकि, जिलाधिकारी प्रशासन ने कड़ी चेतावनी भी जारी की है। 10 अक्टूबर के बाद बची हुई जमीनों का 'अनिवार्य भूमि अधिग्रहण' किया जाएगा। जिन जमीनों का अनिवार्य अधिग्रहण होगा, वहां के भूस्वामियों को विशेष पैकेज और पुनर्वास नीति का कोई भी अतिरिक्त लाभ नहीं मिलेगा।