पुणे जल आपूर्ति संकट, प्रतीकात्मक तस्वीर सोर्स- सोशल मीडिया
पुणे

पुणे में गहराया जल संकट: सालाना जरूरत 20 TMC, मिला 13.5 TMC कोटा; कटौती की आशंका पर गरमाई सियासत

Pune Water Supply: पुणे में 20 TMC जरूरत के मुकाबले 13.5 TMC पानी का कोटा तय होने से एक दिन छोड़कर जलापूर्ति की नौबत आ सकती है। खड़कवासला में पानी होने के बावजूद कटौती का खतरा मंडराया।

रूपम सिंह

Highlights

  • पुणे का पानी कोटा 13.5 टीएमसी तय, जबकि जरूरत 20 टीएमसी से अधिक।

  • अब तक 6.35 टीएमसी पानी इस्तेमाल, 7.15 टीएमसी शेष।

  • पानी की कमी के चलते एक दिन छोड़कर जलापूर्ति की आशंका।

Pune Khadakwasla Dam: पुणे में पानी की किल्लत को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक बहस तेज हो गई है। शहर को एक दिन छोड़कर पानी देने की आशंका के बीच जल आवंटन और वास्तविक जरूरत के बीच बड़ा अंतर सामने आया है।

जल संपदा विभाग ने पुणे के लिए 13.5 टीएमसी पानी का कोटा तय किया है, जबकि शहर की सालाना जरूरत 20 टीएमसी से अधिक बताई जा रही है। ऐसे में आने वाले समय में पुणेकरों को जल कटौती का सामना करना पड़ सकता है।

80 लाख की आबादी, जरूरत 20 टीएमसी से ज्यादा

पुणे की आबादी बढ़कर करीब 80 लाख तक पहुंच गई है। मनपा सीमा में नए गांव शामिल होने के बाद जलापूर्ति की मांग भी बढ़ी है। मनपा के मुताबिक, शहर को हर महीने करीब 1.65 टीएमसी पानी की जरूरत होती है। इस हिसाब से उपलब्ध कोटे और वास्तविक मांग के बीच काफी अंतर दिखाई देता है।

खड़कवासला बांध में पानी, फिर भी कटौती की आशंका

पुणे की जलापूर्ति को लेकर जल संपदा विभाग और पुणे महानगरपालिका के बीच लंबे समय से विवाद जारी है। खड़कवासला बांध से शहर को कितना पानी दिया जाए, वास्तविक जरूरत कितनी है और पानी के बिलों की कितनी राशि बकाया है, इन मुद्दों पर दोनों विभागों के बीच मतभेद रहे हैं।

शहर की जलापूर्ति के लिए खड़कवासला बांध में पर्याप्त जलसंचय होने के बावजूद कटौती की आशंका ने नागरिकों की चिंता बढ़ा दी है।

30 जून 2027 तक कितना पानी बचेगा?

उपमुख्यमंत्री एवं पालकमंत्री सुनेत्रा पवार की अध्यक्षता में हुई कालवा समिति की बैठक में पुणे के लिए 13.5 टीएमसी पानी का कोटा मंजूर किया गया। बैठक में जल संपदा मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटिल और कृषि मंत्री दत्तात्रय भरणे भी उपस्थित थे।

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, निर्धारित कोटे में से अब तक 6.35 टीएमसी पानी इस्तेमाल हो चुका है। इस तरह 30 जून 2027 तक शहर के लिए 7.15 टीएमसी पानी शेष रहने की बात कही गई है।

राजनीतिक चुप्पी पर भी उठे सवाल

पानी कटौती के मुद्दे पर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी शुरू हो गए हैं। खबर के अनुसार, विपक्ष में रहते हुए पानी कटौती के खिलाफ आंदोलन करने वाले भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं की मौजूदा स्थिति पर सवाल उठाए जा रहे हैं।

पुणे शहर के नागरिकों के सामने अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि बढ़ती आबादी और जरूरत के मुकाबले कम निर्धारित जल कोटे के बीच नियमित जलापूर्ति कैसे सुनिश्चित होगी।

Delhi Rally Live: रामलीला मैदान में INDIA गठबंधन की महारैली, ओपन जीप में आगे बढ़े राहुल-अखिलेश और अभिषेक

नॉर्दर्न बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट को मिला ग्रीन सिग्नल! सिर्फ साढ़े तीन घंटे में वाराणसी से दिल्ली की यात्रा

मृत लोगों के नाम रह जाएं, लेकिन असली मतदाताओं के नहीं हटने चाहिए, शशि थरूर का चुनाव आयोग पर सवाल

Apple को भारत में पहला स्टोर खोलने में 25 साल क्यों लगे? जानिए FDI नियम से iPhone मैन्युफैक्चरिंग तक की कहानी

UP: PDA के दुश्मन नंबर-1 हैं अखिलेश यादव, स्वामी प्रसाद मौर्य बोले- जब आजम खान के नहीं हुए तो मेरे क्या होंगे?