पुणे का पानी कोटा 13.5 टीएमसी तय, जबकि जरूरत 20 टीएमसी से अधिक।
अब तक 6.35 टीएमसी पानी इस्तेमाल, 7.15 टीएमसी शेष।
पानी की कमी के चलते एक दिन छोड़कर जलापूर्ति की आशंका।
Pune Khadakwasla Dam: पुणे में पानी की किल्लत को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक बहस तेज हो गई है। शहर को एक दिन छोड़कर पानी देने की आशंका के बीच जल आवंटन और वास्तविक जरूरत के बीच बड़ा अंतर सामने आया है।
जल संपदा विभाग ने पुणे के लिए 13.5 टीएमसी पानी का कोटा तय किया है, जबकि शहर की सालाना जरूरत 20 टीएमसी से अधिक बताई जा रही है। ऐसे में आने वाले समय में पुणेकरों को जल कटौती का सामना करना पड़ सकता है।
पुणे की आबादी बढ़कर करीब 80 लाख तक पहुंच गई है। मनपा सीमा में नए गांव शामिल होने के बाद जलापूर्ति की मांग भी बढ़ी है। मनपा के मुताबिक, शहर को हर महीने करीब 1.65 टीएमसी पानी की जरूरत होती है। इस हिसाब से उपलब्ध कोटे और वास्तविक मांग के बीच काफी अंतर दिखाई देता है।
पुणे की जलापूर्ति को लेकर जल संपदा विभाग और पुणे महानगरपालिका के बीच लंबे समय से विवाद जारी है। खड़कवासला बांध से शहर को कितना पानी दिया जाए, वास्तविक जरूरत कितनी है और पानी के बिलों की कितनी राशि बकाया है, इन मुद्दों पर दोनों विभागों के बीच मतभेद रहे हैं।
शहर की जलापूर्ति के लिए खड़कवासला बांध में पर्याप्त जलसंचय होने के बावजूद कटौती की आशंका ने नागरिकों की चिंता बढ़ा दी है।
उपमुख्यमंत्री एवं पालकमंत्री सुनेत्रा पवार की अध्यक्षता में हुई कालवा समिति की बैठक में पुणे के लिए 13.5 टीएमसी पानी का कोटा मंजूर किया गया। बैठक में जल संपदा मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटिल और कृषि मंत्री दत्तात्रय भरणे भी उपस्थित थे।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, निर्धारित कोटे में से अब तक 6.35 टीएमसी पानी इस्तेमाल हो चुका है। इस तरह 30 जून 2027 तक शहर के लिए 7.15 टीएमसी पानी शेष रहने की बात कही गई है।
पानी कटौती के मुद्दे पर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी शुरू हो गए हैं। खबर के अनुसार, विपक्ष में रहते हुए पानी कटौती के खिलाफ आंदोलन करने वाले भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं की मौजूदा स्थिति पर सवाल उठाए जा रहे हैं।
पुणे शहर के नागरिकों के सामने अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि बढ़ती आबादी और जरूरत के मुकाबले कम निर्धारित जल कोटे के बीच नियमित जलापूर्ति कैसे सुनिश्चित होगी।