Pune Waghmare Disproportionate Assets: पुणे महानगर पालिका (पीएमसी) के पूर्व सिटी इंजीनियर प्रशांत वाघमारे एक बार फिर कानूनी शिकंजे में फंसते नजर आ रहे हैं।
बॉम्बे हाईकोर्ट ने भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) को वाघमारे के खिलाफ कथित 'आय से अधिक संपत्ति' के मामले में दोबारा ओपन इंक्वायरी शुरू करने की हरी झंडी दे दी है।
करीब 2 हजार करोड़ रुपये की अवैध संपत्ति से जुड़े इस गंभीर मामले में अदालत के इस फैसले ने लंबे समय से रुकी हुई जांच प्रक्रिया को नई गति प्रदान की है।
इस विवाद की जड़े साल 2016 में सामाजिक कार्यकर्ता तानाजी गंभीर द्वारा दर्ज कराई गई एक शिकायत में है। आरोप है कि प्रशांत वाघमारे ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए पत्नी और भाई के सहयोग से विभिन्न निर्माण कंपनियों के माध्यम से करोड़ों रुपये का अवैध निवेश किया।
शिकायतकर्ता के अनुसार, वाघमारे ने शहर में अवैध निर्माणों को संरक्षण देने और ट्रासफरेबल डेवलपमेंट राइट्स (टीडीआर) में हेरफेर कर अकूत संपत्ति अर्जित की। पूर्व में जब एसीबी ने इस पर प्रारंभिक जांच शुरू की थी, तब वाघमारे पर सहयोग न करने के आरोप लगे थे। उन्होंने अपने बच्चों की शिक्षा, विदेश यात्राओं और पारिवारिक कंपनियों के वित्तीय विवरण साझा करने से इनकार कर दिया था।
जांच में सबसे बड़ा मोड़ तब आया, जब 2019 में तत्कालीन आयुक्त ने एसीबी को खुली जांच की अनुमति देने से मना कर दिया, जिससे यह मामला ठंडे बस्ते में चला गया। अब बॉम्बे हाईकोर्ट ने तत्कालीन आयुक्त के उस फैसले पर सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि प्रशासन जांच एजेंसी के अधिकारों में हस्तक्षेप नहीं कर सकता।