Pune RTO Issue ( सोर्स: सोशल मीडिया ) 
पुणे

फिटनेस सर्टिफिकेट के बिना दौड़ रहे व्यावसायिक वाहन, सुरक्षा पर मंडरा रहा खतरा; 1 फरवरी से एडवांस बुकिंग बंद

Pune RTO Issue: पुणे में स्वचालित वाहन परीक्षण केंद्र शुरू न होने से फिटनेस जांच ठप है। हजारों व्यावसायिक वाहन बिना फिटनेस प्रमाणपत्र सड़कों पर दौड़ रहे हैं, जिससे सुरक्षा संकट बढ़ा है।

अंकिता पटेल

Pune Vehicle Fitness Certificate: पुणे भारी, मध्यम और हल्के, सभी प्रकार के व्यावसायिक वाहनों के लिए प्रतिवर्ष योग्यता प्रमाणपत्र (फिटनेस सर्टिफिकेट) लेना अनिवार्य है। परंतु, प्रशासन की ढिलाई और स्वचालित वाहन परीक्षण केंद्रों (एटीएस) के समय पर शुरू न होने के कारण पुणे विभाग में वाहन जांच की प्रक्रिया पूरी तरह से ठप हो गई है, केंद्र सरकार के सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय की 12 सितंबर 2023 की अधिसूचना के अनुसार, वाहनों की फिटनेस जांच केवल स्वचालित केंद्रों में करना अनिवार्य किया गया था।

आश्चर्यजनक रूप से, ढाई वर्ष बीत जाने के बाद भी पुणे प्रादेशिक परिवहन विभाग (आरटीओ) में यह केंद्र कार्यान्वित नहीं हो सका है। वर्तमान में स्थिति यह है कि फिटनेस प्रमाणपत्र के बिना ही हजारों वाहन सड़कों पर दौड़ रहे हैं, जिससे सुरक्षा का गंभीर संकट पैदा हो गया है। 1 फरवरी से वाहन जांच के लिए एडवांस बुकिंग की सुविधा बंद कर दी गई है।

इसके परिणामस्वरूप राज्य परिवहन (एसटी) की बसें, पीएमपी की बसें, ऑटो रिक्षा, साथ ही हल्के और भारी मालवाहक वाहनों सहित हजारों गाड़ियां योग्यता प्रमाणपत्र की प्रतीक्षा में खड़ी हैं।

वाहन मालिकों के सामने सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि यदि प्रमाणपत्र की समय-सीमा समाप्त होने के बाद कोई दुर्घटना होती है, तो क्या उन्हें बीमा राशि प्राप्त होगी? फिटनेस जांच का मुख्य उद्देश्य वाहन की स्थिति और यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना होता है, लेकिन प्रक्रिया बंद होने से नागरिकों की जान जोखिम में है।

इस गंभीर मुद्दे को लेकर 'रिक्शा पंचायत' के अध्यक्ष नितिन पवार के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकरण के अध्यक्ष, जिलाधिकारी और विभागीय आयुक्त को ज्ञापन सौंपा है। उन्होंने मांग की है कि प्रशासन इस गतिरोध को दूर करने के लिए तत्काल ठोस कदम उठाए।

वाहन मालिकों का कोई दोष न होते हुए भी केवल प्रशासनिक देरी के कारण हजारों वाहन ठप पड़े हैं। यह न केवल आर्थिवा नुकसान है, बल्कि यात्रियों के जीवन के साथ खिलवाड़ भी है। केंद्र और राज्य सरकार को तुरंत हस्तक्षेप कर इस प्रक्रिया को सुचारू करना चाहिए।

- रिक्शा पंचायत, अध्यक्ष,  नितिन पवार

संगठनों की प्रमुख मांगें

वाहन संगठनों और प्रतिनिधियों ने प्रशासन के सम्मुख अपनी मांगे रखी हैं। इनमें जब तक स्वचालित केंद्र (एटीएस) पूरी तरह शुरू नहीं हो जाते, तब तक पुरानी पद्धति से फिटनेस जांच जारी रखी जाए।

रिक्शा और छोटे वाहनों को जांच के लिए 35-40 किमी दूर दिवे घाट जाने के लिए विवश न किया जाए। इनकी जांच अलंदी रोड स्थित परिवहन कार्यालय में ही की जाए, रिक्शा पंचायत द्वारा सांसद निधि (50 लाख रुपये) से लगवाए गए 'रोलर ब्रेक टेस्टर' का उपयोग तुरंत शुरू हो।

सीएनजी रिक्शा के 'हाइड्रो टेस्टिंग' शुल्क को 800-900 रुपये से बढ़ाकर 3500-4000 रुपये कर दिया गया है। इसके साथ ही मांग की गई है कि, उपभोक्ता संरक्षण कानून के तहत दोषी केंद्रों पर कार्रवाई हो और दरें पर्ववत की जाएं।

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