पुणे में डीजे और साउंड सिस्टम के खिलाफ सड़क मार्च (सोर्सः सोशल मीडिया)
पुणे

पुणे में डीजे, लेजर शो और ध्वनि प्रदूषण के खिलाफ सर्वधर्म नागरिकों का मार्च, बापट की गैरमौजूदगी पर राजनीति तेज

Ban On High-Decibel DJ: पुणे में हाई-डेसिबल डीजे, लाउडस्पीकर और लेजर लाइट्स पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाने की मांग को लेकर 300 से अधिक नागरिकों ने मार्च निकाला।

वेदांत जोशी

More Than 300 Citizens In Pune Took Out A March: त्योहारों और धार्मिक आयोजनों में बजने वाले गगनभेदी डीजे (DJ) और हाई-डेसिबल साउंड सिस्टम के खिलाफ पुणे में विरोध की आग भड़क उठी है। शहर की शांति और जनस्वास्थ्य की रक्षा के लिए रविवार को 300 से अधिक जागरूक नागरिकों ने सड़कों पर उतरकर एक बड़ी विरोध रैली निकाली। बालगंधर्व चौक से पुणे नगर निगम (PMC) मुख्यालय तक निकाली गई इस रैली में सर्वधर्म समाज के लोगों ने हिस्सा लिया और सभी धर्मों के आयोजनों में डीजे पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग की।

मुद्दे के जनक बापट फिर रहे नदारद

इस प्रदर्शन के दौरान सबसे अधिक चर्चा विद्यानंद बापट की अनुपस्थिति को लेकर रही। बापट वही शख्स हैं, जिन्होंने नगर निगम और पुलिस द्वारा आयोजित गणेशोत्सव की पूर्व-तैयारी बैठक में सबसे पहले डीजे बैन का मुद्दा पुरजोर तरीके से उठाया था। हालांकि, एक ही सप्ताह के भीतर यह दूसरा मौका था जब वे अपनी ही मुहिम से जुड़ी विरोध रैली से गायब रहे। जब उनसे इस बारे में संपर्क किया गया, तो उन्होंने गैरमौजूदगी की कोई वजह बताने से साफ इनकार कर दिया।

बच्चों और बुजुर्गों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ नहीं

प्रदर्शन में शामिल हुए आम आदमी पार्टी (AAP) के नेता मुकुंद किरदत ने स्पष्ट किया कि यह मांग किसी एक धर्म विशेष के खिलाफ नहीं है। उन्होंने कहा, "हम केवल हिंदू ही नहीं, बल्कि सभी धर्मों के त्योहारों में डीजे संगीत पर पूरी तरह रोक लगाने की मांग कर रहे हैं। यह कानों को फोड़ देने वाला शोर बच्चों, बुजुर्गों और मरीजों की सेहत के लिए बेहद घातक साबित हो रहा है।"

एनसीपी (शरदचंद्र पवार) के नेता सुनील माने ने भी रैली को संबोधित करते हुए कहा कि पुणे के शिक्षित और जागरूक वर्ग में इस बात पर पूर्ण सहमति है कि धार्मिक उत्सवों में डीजे का कोई स्थान नहीं होना चाहिए। आज के इस प्रदर्शन में हिंदू, मुस्लिम और ईसाई समाज के प्रतिनिधियों ने कंधे से कंधा मिलाकर हिस्सा लिया।

नागपुर जैसा फैसला पुणे में क्यों नहीं?

सामाजिक कार्यकर्ता विश्वंभर चौधरी ने सत्तारूढ़ भाजपा पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि भाजपा के कई वरिष्ठ नेता सैद्धांतिक रूप से डीजे बैन के पक्ष में हैं, लेकिन पार्टी के 'डीजे प्रेमी' शहर अध्यक्ष धीरज घाटे उनकी बात नहीं सुन रहे हैं।

वहीं, सुनील माने ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को सीधे चुनौती देते हुए कहा कि जिस तरह नागपुर पुलिस ने वहां त्योहारों में डीजे के इस्तेमाल पर रोक लगाई है, वैसा ही साहस मुख्यमंत्री को अपने गृह जिले के बाद अब पुणे में भी दिखाना चाहिए। जब नागपुर में प्रशासन सख्त कार्रवाई कर सकता है, तो पुणे में डीजे माफिया के खिलाफ कदम उठाने से परहेज क्यों किया जा रहा है?

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