फर्जी कुराश प्रमाणपत्रों से भर्ती हुए 19 पुलिसकर्मी होंगे बर्खास्त।
11 साल में 1,000 से अधिक प्रमाणपत्र बांटने का खुलासा, छह आरोपी गिरफ्तार।
महाराष्ट्र के 17–18 अन्य कुराश संगठनों की गतिविधियां भी जांच के दायरे में।
Pune Police Fake Kurash Certificates: महाराष्ट्र में खिलाड़ियों के लिए निर्धारित पांच प्रतिशत आरक्षण के तहत कथित फर्जी खेल प्रमाणपत्रों के जरिए पुणे शहर पुलिस बल में भर्ती हुए 19 पुलिसकर्मियों को स्थायी रूप से बर्खास्त करने का निर्णय लिया गया है।
पुणे पुलिस ने संबंधित अभ्यर्थियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की भी तैयारी की है। जांच में महाराष्ट्र के अन्य कुराश संगठनों की भूमिका पर भी संदेह जताया गया है।
पुणे शहर में पुलिस जांच के दौरान सामने आया कि 19 अभ्यर्थियों ने भर्ती प्रक्रिया में कुराश खेल के प्रमाणपत्र जमा किए थे, जिन्हें जांच में फर्जी पाया गया।
इनमें से नौ अभ्यर्थियों को प्रशिक्षण के लिए अलग-अलग केंद्रों में भेजा गया था, जबकि दस को अदालत में पेश नहीं किया गया था। अब प्रशिक्षण केंद्रों में भेजे गए अभ्यर्थियों को वापस बुलाने के निर्देश दिए गए हैं। सभी 19 की सेवा समाप्त करने का निर्णय लिया गया है।
इस मामले में महाराष्ट्र राज्य कुराश एसोसिएशन के अध्यक्ष अंकुश नागर और सचिव शिवाजी सालुंखे समेत छह लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
गिरफ्तार लोगों में श्रुति पुंगवकर और उनके पति धार्येश पुंगवकर भी शामिल हैं। आरोप है कि उनके खेल प्रशिक्षण केंद्र में कथित तौर पर फर्जी प्रमाणपत्र तैयार किए गए थे। मामले में कुछ अन्य आयोजकों के खिलाफ भी प्रकरण दर्ज किए गए हैं।
पुलिस जांच के अनुसार, पिछले 11 वर्षों में एक हजार से अधिक खेल प्रमाणपत्र वितरित किए गए थे। अब इन प्रमाणपत्रों की सत्यता और उन्हें जारी करने की प्रक्रिया की जांच की जा रही है।
हालांकि, सभी प्रमाणपत्रों को फर्जी नहीं माना गया है। जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि कितने प्रमाणपत्र नियमों के अनुरूप जारी किए गए थे।
पुणे पुलिस को संदेह है कि राज्य के विभिन्न जिलों में सक्रिय 17 से 18 अन्य कुराश संगठनों ने भी इसी तरह प्रमाणपत्र जारी किए हो सकते हैं। इन संगठनों की गतिविधियों की जांच किए जाने की संभावना है। जांच का दायरा बढ़ने के साथ खेल प्रमाणपत्रों के आधार पर सरकारी नौकरियां हासिल करने वाले अन्य अभ्यर्थियों की भी जांच हो सकती है।
इस मामले ने खेल आरक्षण के तहत होने वाली सरकारी भर्तियों में प्रमाणपत्रों के सत्यापन की प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए हैं। पुलिस की आगे की जांच और कानूनी कार्रवाई से मामले से जुड़े अन्य तथ्यों का खुलासा होने की उम्मीद है।