पुणे में नशामुक्ति केंद्र में उपचार के बाद 9 लोगों को अदालत से राहत।
वारजे, नहें, उत्तमनगर और नांदेड सिटी के 12 लोग उपचार के लिए भेजे गए थे।
NDPS एक्ट की धारा 64(A) के तहत उपचार और पुनर्वास को बढ़ावा।
Pune Police Anti Drugs Campaign: पुणे पुलिस ने नशे के खिलाफ लड़ाई में दोहरी रणनीति अपनाई है। एक ओर अमली पदार्थों की तस्करी और बिक्री करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जा रही है। वहीं, दूसरी ओर नशे की लत में फंसे लोगों को उपचार और पुनर्वास के जरिए समाज की मुख्यधारा में लौटने का अवसर दिया जा रहा है।
इसी पहल के तहत 12 लोगों को नशामुक्ति केंद्र में उपचार के लिए भेजा गया था। एक महीने का उपचार पूरा करने के बाद इनमें से नौ लोगों को अदालत से अभियोजन से राहत मिली है, जबकि तीन के मामले अभी लंबित हैं। इस पहल में स्वापक औषधि एवं मनःप्रभावी पदार्थ अधिनियम (एनडीपीएस) की धारा 64 (ए) का सहारा लिया गया है।
पुणे पुलिस लगातार ड्रग्स की आपूर्ति और बिक्री से जुड़ी श्रृंखला को तोड़ने के लिए कार्रवाई कर रही है। इसमें मुख्य तस्करों से लेकर छोटे विक्रेताओं तक पर शिकंजा कसा जा रहा है। इसके साथ ही पुलिस ने नशे की गिरफ्त में आए लोगों को केवल अपराधी के रूप में देखने के बजाय उन्हें इस लत से बाहर निकालने की पहल भी शुरू की है।
पुलिस आयुक्तालय के परिमंडल तीन के अंतर्गत वारजे, नहें, उत्तमनगर और नांदेड सिटी पुलिस थानों की ओर से कुल 12 लोगों को किरकटवाड़ी स्थित आत्मनिर्भर सोशल फाउंडेशन के नशामुक्ति केंद्र में उपचार के लिए भेजा गया था।
सभी ने एक महीने का उपचार पूरा किया। इसके बाद संबंधित मामलों में कानूनी प्रक्रिया पूरी कर अदालत में रिपोर्ट प्रस्तुत की गई।
नौ लोगों को अदालत से डिस्चार्ज मिला, जबकि तीन मामलों में फैसला होना बाकी है।
पुलिस थानावार स्थिति देखें तो वारजे पुलिस द्वारा उपचार के लिए भेजे गए तीन लोगों में से एक को राहत मिली है, जबकि दो मामले लंबित हैं।
नहें पुलिस के तीन मामलों में दो लोगों को राहत मिली और एक मामला लंबित है।
वही, उत्तमनगर और नांदेड सिटी पुलिस ने तीन-तीन लोगों को उपचार के लिए भेजा था। इन दोनों थानों के सभी छह मामलों में संबंधित लोगों को अदालत से डिस्चार्ज मिल गया है।
एनडीपीएस अधिनियम, 1985 की धारा 64 (ए) के तहत निर्धारित शर्तें पूरी करने वाले पात्र व्यक्तियों को नशामुक्ति उपचार लेने पर अभियोजन से संरक्षण मिल सकता है।
इस कानूनी प्रावधान का उद्देश्य पात्र नशा-पीड़ितों को उपचार, परामर्श और पुनर्वास का अवसर देना है।
हालांकि, इसका लाभ कानून में निर्धारित पात्रता और शर्तों के अधीन ही मिलता है।
अमली पदार्थों की बिक्री करने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई और नशे की लत से जूझ रहे लोगों को उपचार व पुनर्वास का अवसर देना, यही पुलिस की भूमिका है। नशामुक्त समाज के निर्माण के लिए केवल दंडात्मक कार्रवाई पर्याप्त नहीं है, बल्कि नशे की लत से प्रभावित लोगों का पुनर्वास भी उतना ही आवश्यक है।डॉ.सागर कवडे, पुलिस उपायुक्त, परिमंडल-3