पवना बांध  सोर्स: सोशल मीडिया
पुणे

पवना बांध लबालब, फिर क्यों सूखे नल? पुणे के पिंपरी-चिंचवड़ की सोसायटियों में पानी का संकट; आंदोलन की चेतावनी

Pune Pimpri Water Crisis Tanker Dependence: पवना बांध में पर्याप्त पानी होने के बावजूद पिंपरी-चिंचवड़ की 34 बड़ी सोसायटियों में जलसंकट का आरोप है। टैंकरों पर बढ़ते खर्च के बीच आंदोलन की चेतावनी दी।

मनीषा बोंदरे

Pune Pimpri Water Crisis Housing Society: पुणे जिले के पवना बांध में पर्याप्त जलभंडार होने के बावजूद पिंपरी-चिंचवड़ की कई बड़ी हाउसिंग सोसायटियों में कम दबाव और अनियमित जलापूर्ति से परेशानी बढ़ गई है। फेडरेशन ने 34 सोसायटियों में नियमित जलापूर्ति की मांग करते हुए आंदोलन की चेतावनी दी है।

पवना बांध भरा, फिर भी पानी की किल्लत

पुणे जिले के पिंपरी-चिंचवड़ शहर को पानी उपलब्ध कराने वाला पवना बांध पूरी तरह भरा होने के बावजूद कई बड़ी आवासीय सोसायटियों में जलसंकट बना हुआ है। पर्याप्त दबाव और मात्रा में पानी नहीं मिलने से रहवासियों को रोजाना निजी टैंकर मंगाने पड़ रहे हैं। इससे सोसायटियों और आम नागरिकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है।

नियमित रूप से संपत्ति कर भरने के बावजूद मूलभूत जलापूर्ति नहीं मिलने से नागरिकों में महानगरपालिका प्रशासन के खिलाफ नाराजगी बढ़ रही है। पिंपरी-चिंचवड़ हाउसिंग सोसायटी फेडरेशन ने चेतावनी दी है कि 34 बड़ी सोसायटियों में पानी की आपूर्ति तत्काल नियमित नहीं की गई तो आंदोलन किया जाएगा।

पानी की उपलब्धता नहीं, वितरण पर सवाल

फेडरेशन का कहना है कि समस्या पानी की उपलब्धता से ज्यादा जल वितरण, दबाव और नियोजन से जुड़ी दिखाई देती है। कई क्षेत्रों में कम दबाव के कारण सोसायटियों तक पर्याप्त पानी नहीं पहुंच रहा है। ऐसे में प्राकृतिक जलभंडार उपलब्ध होने के बावजूद नागरिकों को निजी टैंकरों पर निर्भर रहना पड़ रहा है।

फेडरेशन के अध्यक्ष सचिन लोंढे ने कहा कि मनपा को क्षेत्रवार जलापूर्ति, पानी के दबाव और आपूर्ति के समय का तत्काल सर्वेक्षण करना चाहिए। उनका कहना है कि सोसायटियों को टैंकरों के भरोसे से मुक्त करने के लिए आपातकालीन जल प्रबंधन योजना लागू की जाए।

टैंकर कारोबार की जांच की मांग

नागरिकों ने आरोप लगाया है कि जब बांध में पर्याप्त पानी उपलब्ध है, तब सोसायटियों तक पानी नहीं पहुंचने के कारणों की जांच होनी चाहिए। फेडरेशन ने निजी टैंकरों पर बढ़ती निर्भरता की भी जांच की मांग की है। नागरिकों का सवाल है कि यदि जलापूर्ति व्यवस्था पर्याप्त है तो सोसायटियों को लगातार निजी टैंकर क्यों मंगाने पड़ रहे हैं।

हालांकि, कृत्रिम जलसंकट या किसी विशेष समूह को लाभ पहुंचाने के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। फेडरेशन ने पूरे मामले की जांच कर जिम्मेदारी तय करने की मांग की है।

नए निर्माणों पर भी उठे सवाल

फेडरेशन ने शहर में तेजी से बढ़ रहे आवासीय और व्यावसायिक निर्माणों पर भी सवाल उठाए हैं। संगठन के अनुसार, नए प्रकल्पों को मंजूरी देने से पहले उपलब्ध जलस्रोत, वितरण नेटवर्क की क्षमता और भविष्य की पानी की जरूरत का तकनीकी आकलन किया जाना चाहिए।

फेडरेशन की प्रमुख मांगें

फेडरेशन ने उपलब्ध पानी, पानी के उठाव और क्षेत्रवार वितरण व्यवस्था का तत्काल ऑडिट कर आंकड़े सार्वजनिक करने की मांग की है। साथ ही कम पानी मिलने के कारणों की तकनीकी जांच, निजी टैंकर कारोबार की जांच, जिम्मेदार जलापूर्ति अधिकारियों के नाम व संपर्क नंबर सार्वजनिक करने तथा जलापूर्ति क्षमता के आकलन के बिना नए निर्माणों की मंजूरी की समीक्षा की मांग की है।

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