Pune Municipal Corporation Nomination Rejection: पुणे महानगर पालिका की स्थायी समिति के अध्यक्ष पद के चुनाव में महज एक मिनट की देरी ने चुनावी तस्वीर पूरी तरह बदल दी। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के उम्मीदवार सुहास टिंगरे का नामांकन निधर्धारित समय सीमा के ठीक एक मिनट बाद जमा होने के कारण खारिज कर दिया गया।
इसके बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के उम्मीदवार श्रीनाथ भिमाले का ही एकमात्र नामांकन वैध बच्चा, जिसके चलते उन्हें निर्विरोध अध्यक्ष घोषित कर दिया गया। महानगर पालिका में भाजपा के पास प्रचंड बहुमत है, इसलिए भिमाले की जीत पहले से ही तय मानी जा रही थी।
हालांकि, विपक्ष ने औपचारिक चुनौती देने के लिए अपना उम्मीदवार उतारा था। नामांकन पत्रों की जांच के दौरान चुनाव निर्णय अधिकारी सतीश खडके ने समय सीमा के उल्लंघन का हवाला देते हुए टिंगरे का आवेदन अमान्य घोषित कर दिया।
नियमानुसार समय बीतने के बाद प्राप्त नामांकन स्वीकार नहीं किया जा सकता, जिसके कारण चुनाव प्रक्रिया में यह अप्रत्याशित मोड़ आया और भिमाले निर्विरोध विजयी हुए।
निर्वाचन के पश्चात श्रीनाथ भिमाले ने अपनी प्राथमिकताएं स्पष्ट करते हुए कहा कि पुणे शहर के लंबित विकास कार्यों को गति देना उनका मुख्य लक्ष्य रहेगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि महानगरपालिका की आर्थिक स्थिति मजबूत किए बिना व्यापक विकास संभव नहीं है, इसलिए राजस्व बढ़ाने के लिए ठोस उपाय किए जाएंगे।
भिमाले ने उल्लेख किया कि पिछले कुछ वर्षों में शहर में कई महत्वपूर्ण आधारभूत परियोजनाएं शुरू की गई है। सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट, विमानतल विस्तार और इलेक्वट्रिक बस सेवा जैसी योजनाएं अब अंतिम चरण में हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि इन परियोजनाओं के पूर्ण होने से शहर की यातायात व्यवस्था, पर्यावरण संरक्षण और नागरिक सुविधाओं में उल्लेखनीय सुधार होगा।
मनपा की आय बढ़ाने के विषय में उन्होंने कहा कि शहर की सीमा में शामिल किए गए 23 गांवों के संतुलित विकास पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। संशोधित विकास योजना के अनुसार बुनियादी ढांचागत कार्यों को आगे बढ़ाने के लिए शासन स्तर पर आवश्यक पहल की जाएगी, मनपा के स्वामित्य वाली जमीनों, खाली भूखंडों और रिक्त फ्लैट्स के व्यावसायिक उपयोग पर शीघ्र निर्णय लेकर राजस्व में वृद्धि का प्रयास किया जाएगा।
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भिमाले ने कहा कि सड़कों के उन्नयन, प्रकाश व्यवस्था और स्वच्छता जैसी मूलभूत सुविधाओं को प्राथमिकता दी जाएगी। साथ ही, करदाताओं को राहत देने वाले प्रावधानों पर भी विचार किया जाएगा, उन्होंने स्पष्ट किया कि मनपा पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाले बिना सार्वजनिक-निजी भागीदारी, कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व निधि तथा राज्य व केंद्र सरकार के सहयोग से अधूरी परियोजनाओं को पूरा किया जाएगा।