पुणे लैंड रिकॉर्ड स्कैम 7/12 (सौ. सोशल मीडिया ) 
पुणे

पुणे में 7/12 गड़बड़ी का बड़ा खुलासा, किसानों की जमीन से छेड़छाड़ पर सख्त कार्रवाई तय

Maharashtra Revenue Fraud Case : पुणे जिले में सातबारा रिकॉर्ड में हेरफेर के बड़े घोटाले का खुलासा हुआ है। जांच में 152 अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध पाई गई है, जिससे राजस्व विभाग में हड़कंप मच गया है।

अपूर्वा नायक

Pune Land Record Scam: पुणे जिले में सातबारा (7/12) भूमि अभिलेखों में संशोधन और सुधार के नाम पर बड़े पैमाने पर अनियमितताओं का गंभीर मामला सामने आया है।

इस घोटाले में प्रशासनिक मशीनरी के कई जिम्मेदार अधिकारियों की प्रत्यक्ष संलिप्तता उजागर होने से पूरे राजस्व विभाग में हड़कंप मच गया है। जांच रिपोर्ट में उपविभागीय अधिकारी (एसडीओ), तहसीलदार और मंडल अधिकारी स्तर के अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध पाई गई है।

इस पूरे प्रकरण में कुल 152 अधिकारियों को दोषी ठहराया गया है, जिनमें से 15 अधिकारियों पर 'अति गंभीर', 82 अफसरों पर 'गंभीर' और 55 अधिकारियों पर 'मध्यम' स्तर की गड़बड़ियों के आरोप तय किए गए हैं। ये आंकड़े प्रशासनिक व्यवस्था में व्याप्त लापरवाही और भ्रष्टाचार की गहरी जड़ों को दर्शाते हैं।

जांच समिति ने की गड़बड़ी की पुष्टि

मिली जानकारी के अनुसार, वर्ष 2020 से अब तक करीब 38 हजार सातबारा प्रविष्टियों में हेरफेर की शिकायतें मिली थीं। इन शिकायतों के आधार पर नाशिक के विभागीय आयुक्त प्रवीण गेडाम की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय जांच समिति गठित की गई। समिति ने कुल 38,027 मामलों में से 2,383 मामलों की विस्तृत जांच की, जिसमें नियमों के बड़े पैमाने पर उल्लंघन की पुष्टि हुई है।

राजस्व संहिता की धारा दुरुपयोग 155 का किया

जांच में सामने आया है कि महाराष्ट्र भूमि राजस्व संहिता की धारा 155 का दुरुपयोग कर जमीन से संबंधित महत्वपूर्ण विवरणों में बदलाव किए गए। इसमें मालिकों के नाम बदलना, क्षेत्रफल में वृद्धि करना, भोगवटादार वर्ग में परिवर्तन और नई टिप्पणियां जोड़ने जैसे गंभीर बदलाव शामिल हैं। कई मामलों में उचित प्रक्रिया अपनाए बिना, ऑफलाइन आवेदन लेकर जल्दबाजी में निर्णय लिए गए। इतना ही नहीं, संबंधित हितधारकों को नोटिस तक नहीं भेजा गया, जो कि कानूनी प्रक्रिया का सीधा उल्लंघन है।

जमीन की श्रेणी में अवैध बदलाव

  • जांच में यह भी पाया गया कि वर्ग-2 की जमीन को अवैध रूप से वर्ग-1 में परिवर्तित किया गया, ताकि जमीन के हस्तांतरण और उपयोग के नियमों में ढील मिल सके।
  • कुछ मामलों में अन्य लाभार्थियों के नाम रिकॉर्ड से हटा दिए गए, जिससे जमीन हड़पने की आशंका मजबूत होती है।

विधानसभा सदन में भी गूंजा यह मुद्दा

  • राज्य के राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने विधान परिषद में इस मामले की जानकारी देते हुए स्पष्ट किया कि दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
  • उन्होंने बताया कि पुणे के विभागीय आयुक्त से जल्द ही 'एक्शन टेकन रिपोर्ट' (एटीआर) मांगी जाएगी। गौरतलब है कि डिजिटाइजेशन के दौरान त्रुटियों को सुधारने के लिए धारा 155 के तहत अधिकारियों को विशेष अधिकार दिए गए थे, लेकिन इनका दुरुपयोग कर आम किसानों की जमीन हड़पने के प्रयास किए गए, इससे किसानों में भारी असंतोष और असुरक्षा की भावना है।

डीएम को निर्देशः दोषी अधिकारियों पर गिरेगी गाज

महाराष्ट्र भूमि राजस्व संहिता की धारा 257 के तहत संदिग्ध प्रविष्टियों का पुनरीक्षण कर सुधारने के निर्देश जिलाधिकारी को दिए गए हैं। इस खुलासे से प्रशासनिक हलकों में खलबली मच गई है। अधिकारियों पर निलंबन से लेकर आपराधिक मामले दर्ज होने तक की गाज गिर सकती है।

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