रोहित पवार (सोर्स: डिजाइन फोटो) 
पुणे

4 साल की मासूम से दरिंदगी और हत्या, भोर में जनाक्रोश का सैलाब, रोहित पवार ने की फांसी और शक्ति कानून की मांग

Pune Bhor Murder Case: विधायक रोहित पवार ने पीड़ित परिवार के लिए सरकारी नौकरी और आरोपी को फांसी देने की मांग की। जानें पूरी घटना व राजनीति गरमाने की वजह।

गोरक्ष पोफली

Nasrapur Child Murder: महाराष्ट्र के पुणे जिले का भोर इलाका आज उस समय दहल उठा जब छुट्टियों पर आई एक 4 साल की मासूम बच्ची के साथ नृशंस दरिंदगी और फिर उसकी हत्या की खबर सामने आई। इस रोंगटे खड़े कर देने वाली घटना ने न केवल नसरापुर को शर्मसार किया है, बल्कि पूरे राज्य की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं।

थाने के बाहर शव रखकर उग्र प्रदर्शन

घटना के विरोध में ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। आक्रोशित लोगों ने बच्ची का शव नसरापुर पुलिस थाने के बाहर रखकर रास्ता रोको आंदोलन शुरू कर दिया। माहौल इतना तनावपूर्ण था कि भीड़ ने मांग की कि आरोपी को उनके हवाले कर दिया जाए ताकि वे खुद न्याय कर सकें। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस अधीक्षक (SP) संदीप सिंह गिल को स्वयं मोर्चा संभालना पड़ा। पुलिस द्वारा फास्ट-ट्रैक कोर्ट और सख्त कार्रवाई के आश्वासन के बाद ही ग्रामीणों ने जाम हटाया।

फांसी से कम कुछ भी मंजूर नहीं

विधायक रोहित पवार ने घटनास्थल का दौरा कर पीड़ित परिवार से मुलाकात की और सरकार पर तीखा हमला बोला। मीडिया से बात करते हुए उन्होंने 1983 के सुप्रीम कोर्ट के एक ऐतिहासिक फैसले का हवाला देते हुए कहा कि ऐसे जघन्य अपराधों के लिए कैपिटल पनिशमेंट (मृत्युदंड) ही एकमात्र विकल्प है।

उन्होंने मांग की कि

  • मामले की सुनवाई फास्ट-ट्रैक कोर्ट में हो और सरकारी वकील (PP) के माध्यम से आरोपी को फांसी की सजा दिलाई जाए।
  • पीड़ित मां, जो उच्च शिक्षित हैं लेकिन आर्थिक रूप से कमजोर हैं, उन्हें तत्काल सरकारी नौकरी दी जाए।
  • परिवार को MHADA के माध्यम से घर और उचित आर्थिक सहायता प्रदान की जाए।

अपराधियों में कानून का खौफ खत्म हो चुका है

रोहित पवार ने एक चौंकाने वाला खुलासा करते हुए बताया कि पकड़ा गया आरोपी पहले भी दो बार जेल जा चुका है और बाहर आकर उसने फिर इस कृत्य को अंजाम दिया। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर अपराधियों में कानून का डर होता, तो वे बार-बार ऐसी हिम्मत नहीं करते। उन्होंने महाराष्ट्र में लंबित शक्ति कानून को तत्काल लागू करने की मांग की ताकि अपराधियों में खौफ पैदा हो सके।

सरकार का आश्वासन और आगामी मुलाकात

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस मामले को फास्ट-ट्रैक कोर्ट में चलाने की घोषणा की है। SP गिल के अनुसार, पुलिस 15 दिनों के भीतर चार्जशीट दाखिल कर देगी। इस बीच, आंदोलनकारी और सुप्रिया सुले सहित अन्य नेता मंगलवार को मुंबई में मुख्यमंत्री से मुलाकात करेंगे।

यह घटना केवल एक परिवार की त्रासदी नहीं है, बल्कि समाज के माथे पर एक ऐसा कलंक है जो न्याय होने तक धुलेगा नहीं। क्या हमारी बेटियां अपने ही घर और ननिहाल में सुरक्षित नहीं हैं? यह सवाल आज हर महाराष्ट्र वासी पूछ रहा है।

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