पीएमआरडीए (सौ. सोशल मीडिया ) 
पुणे

PMRDA की गुंठेवारी मुहिम को कमजोर रिस्पांस, सिर्फ 200 प्रस्ताव जमा

Pimpri Chinchwad: पीएमआरडीए की गुंठेवारी निर्माण नियमितीकरण मुहिम को चार बार समय सीमा बढ़ाने और शुल्क में छूट देने के बावजूद अपेक्षित प्रतिक्रिया नहीं मिली।

अपूर्वा नायक

Pune News In Hindi: गुंठेवारी कानून के अंतर्गत निर्माणों को नियमित करने के लिए पुणे महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण (पीएमआरडीए) द्वारा दी गई समय सीमा (30 सितंबर) समाप्त हो गई है। चार बार समय सीमा बढ़ाने और शुल्क में छूट देने के बावजूद इसे अच्छा रिस्पांस नहीं मिला।

अंतिम तिथि तक केवल 200 प्रस्ताव ही प्राप्त हुए हैं। गुंठेवारी कानून के अंतर्गत निर्माणों को नियमित करने के लिए पीएमआरडीए ने जो मुहिम शुरू की थी, उसकी समय सीमा पूरी हो गई है।

इस अवधि में केवल दो सी प्रस्ताव ही प्राधिकरण के पास मंजूरी के लिए जमा किए गए। चार बार की समय सीमा वृद्धि और शुल्क में राहत देने के बावजूद घरों को नियमित करने में नागरिकों ने अपेक्षित रुचि नहीं दिखाई है।

प्राधिकरण चौथी बार दी गई समय सीमा 30 सितंबर को सम्माप्त हो गई है। अब, आगे और समय सीमा बढ़ाई जाएगी या नहीं। इस पर अभी कोई निर्णय नहीं हुआ है।। - डॉ योगेश म्हसे, आयुक्त, पीएमआरडीए

अनधिकृत निर्माण को वैध करने बहुत कम प्रस्ताव मिले

  • राज्य सरकार ने हाल ही में गुंठेवारी अधिनियम 2001 में संशोधन किया है। इसके अनुसार 31 दिसंबर 2020 के पहले तक बने निर्माण नियमित किए जा सकेंगे।
  • इसी के तहत पीएमआरडीए ने गुंठेवारी के घरों को नियमित करने की प्रक्रिया शुरू की थी। पीएमआरडीए के अधिकार क्षेत्र में लगभग 700 गांवों में हजारों की संख्या में अनधिकृत निर्माण हैं, लेकिन इन्हें वैध करने के लिए अपेक्षा के विपरीत बहुत कम प्रस्ताव मिले।
  • इसके अलावा, महानगर पालिका में शामिल किए गए 23 गांवों में निर्माण की अनुमति देने के अधिकार भी पीएमआरडीए के पास हैं। इन गांवों में भी बड़ी संख्या में अनधिकृत निर्माण हुए हैं। समय सीमा बार-बार बढ़ाने के बाद भी इन निर्माणों को नियमित करने में प्राधिकरण को अपेक्षित सफलता नहीं मिल रही है।

कम रिस्पांस के मुख्य कारण

पीएमआरडीए द्वारा बार-बार समय सीमा बढ़ाने और शुल्क में छूट देने के बावजूद, गुंठेवारी निर्माणों के नियमितीकरण के लिए कम प्रस्ताव आने के मुख्य कारण प्रक्रिया की जटिलता और विलीय बोझ की धारणा है।

नागरिकों को यह आशंका है कि नियमितीकरण की प्रक्रिया और इसके लिए जरूरी दस्तावेजों की जुटाना बहुत कठिन और समय लेने वाला है। छूट के बावजूद, लोगों की आम धारणा यह है कि कुल लागत (जुर्माना, शुल्क और अन्य खर्च) अभी भी उनकी आर्थिक क्षमता से अधिक है।

छूट के बाद भी प्रतिक्रिया नहीं

राज्य सरकार के निर्देशानुसार पीएमआरडीए ने नियमितीकरण शुल्क भी कम किया था। इससे बेहतर प्रतिक्रिया की उम्मीद थी, लेकिन प्रतिक्रिया अत्यंत कम रही।

घरों को नियमित करते समय रेड जोन, बाफर, हिल-टॉप-हिल स्लोप, कृषि/नो-डेवलपमेंट जोन, वनीकरण क्षेत्र, सरकारी/निजी वन, क्षेत्रीय योजना और प्रारूप विकास योजना में आरक्षित सड़कें जमीन, नदी तल, सरकारी भूमि आदि क्षेत्रों में बने निर्माणों को वैध करने के लिए कई बार अवसर दिया गया, इसके बावजूद अपेक्षित संख्या में आवेदन नहीं आए।

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