Pune PMC Waste Management: पुणे महानगर पालिका (पीएमसी) के ठोस कचरा प्रबंधन विभाग द्वारा प्रस्तावित 500 मीट्रिक टन गीले और सूखे कचरे के प्रसंस्करण प्रोजेक्ट की टेंडर प्रक्रिया बड़े राजनीतिक और कानूनी विवाद में घिर गई है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व नगरसेवक अरविंद शिंदे ने इस टेंडर प्रक्रिया पर गंभीर आपत्ति जताते हुए इसे भ्रष्टाचार और मिलीभगत का जरिया बताया है।
अरविंद शिंदे का सीधा आरोप है कि टेंडर की शर्तों को इस तरह तोड़-मरोड़ कर तैयार किया गया है, जिससे कुछ चुनिंदा कंपनियों को ही फायदा पहुंचे। उन्होंने दावा किया कि यह कदम निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा के सिद्धांतों के खिलाफ है और इसके जरिए भाजपा के एक विधान परिषद सदस्य (एमएलसी) के करीबी रिश्तेदार की कंपनी को अवैध रूप से लाभ पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। इस कथित घोटाले के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए शिंदे ने नई दिल्ली स्थित भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) में आधिकारिक शिकायत दर्ज कराई है। साथ ही, उन्होंने इस मामले की एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) से जांच कराने की चेतावनी भी दी है।
मनपा आयुक्त को सौंपे गए ज्ञापन में शिंदे ने स्पष्ट किया कि ठोस कचरा प्रबंधन विभाग की टेंडर संख्या 03/2026-27 में शामिल कुछ शर्ते जानबूझकर प्रतिस्पर्धा को सीमित करने के लिए बनाई गई है। इन भेदभावपूर्ण शर्तों के कारण पात्र और अनुभवी कंपनियों की संख्या काफी कम हो जाएगी, जिससे टेंडर की दरे प्रभावित होंगी और मनपा को बड़ा आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा।
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शिंदे ने आरोप लगाया कि अतिरिक्त आयुक्त प्रजीत नायर ने बिना किसी गहन समीक्षा के इस विवादास्पद टेंडर को जल्दबाजी में मंजूरी दे दी। कचरा प्रबंधन के पिछले दोषपूर्ण अनुबंधों के कारण पुणे मनपा को पहले ही लगभग 250 करोड़ रुपये का वित्तीय नुकसान हो चुका है।
मंत्री ने अधिकारियों को फटकारा इस बीच, नगर विकास राज्य मंत्री मिसल अपनाया है। उन्होंने बुधवार को आयोजित एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में निविदा प्रक्रिया को लेकर संबंधित अधिकारियों को जमकर फटकार लगाई और उनसे लिखित स्पष्टीकरण मांगा है।