पुणे महानगरपालिका  सोर्स- सोशल मीडिया
पुणे

पुणे में टेंडर में देरी पर अधिकारियों पर गिरेगी गाज, आयुक्त नवल किशोर राम ने दिए सख्त निर्देश

PMC Budget Development : पुणे मनपा आयुक्त नवल किशोर राम ने विकास कार्यों की टेंडर प्रक्रिया व वर्क ऑर्डर में देरी पर विभागाध्यक्षों को दंडात्मक व अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी दी है।

रूपम सिंह

Pune Municipal Corporation: विकास कार्यों की टेंडर प्रक्रिया में अनावश्यक देरी और प्रशासनिक ढिलाई अब पुणे महानगरपालिका (मनपा) के अधिकारियों को भारी पड़ सकती है। मनपा आयुक्त नवल किशोर राम ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि टेंडर प्रक्रिया निर्धारित समयसीमा में पूरी की जाए। अधिकारियों की लापरवाही के कारण विकास कार्य समय पर शुरू नहीं हुए तो संबंधित विभागाध्यक्षों और अधिकारियों पर पहले दंडात्मक और बाद में अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

मनपा के वर्ष 2026-27 के बजट में मंजूर विकास, रखरखाव और मरम्मत कार्यों के लिए वित्तीय एवं प्रशासनिक मंजूरी के बाद निविदाएं आमंत्रित की जाती हैं। हालांकि, निविदा प्रक्रिया में तकनीकी जांच यानी पैकेट 'अ' खोलने के बाद ठेकेदारों को पात्र अथवा अपात्र घोषित करने में देरी की शिकायतें सामने आई थीं। इसे गंभीरता से लेते हुए आयुक्त ने पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता, तेजी और प्रतिस्पर्धी दर सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

वर्क ऑर्डर में भी देरी बर्दाश्त नहीं

सबसे कम दर वाले पात्र ठेकेदार की सिफारिश निविदा समिति को भेजने और मंजूरी मिलने के बाद तत्काल कार्यदिश जारी करना अनिवार्य होगा। 25 लाख रुपये तक के कार्यों के लिए अधिकतम 3 दिन और 25 लाख रुपये से अधिक के कार्यों के लिए 7 दिन के भीतर वर्क ऑर्डर जारी करना होगा।

आयुक्त ने कहा कि नागरिकों को समय पर मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना पुणे मनपा प्रशासन का प्राथमिक दायित्व है। इसलिए सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देशों का शत-प्रतिशत पालन सुनिश्चित करने को कहा गया है।

ठेकेदार की पात्रता व अपात्रता पर लें निर्णय

नए आदेश के अनुसार, टेंडर जमा करने की अंतिम तिथि के बाद संबंधित विभागाध्यक्षों को कम से कम 7 और अधिकतम 15 दिनों के भीतर पैकेट 'अ' की तकनीकी जांच पूरी करनी होगी। इसी अवधि में ठेकेदार की पात्रता अथवा अपात्रता पर निर्णय लेना होगा। तकनीकी जांच के दौरान किसी जटिलता की स्थिति में ही असाधारण परिस्थितियों में ठेकेदारों से पूरक दस्तावेज मांगे जा सकेंगे अथवा शहर अभियंता से मार्गदर्शन लिया जा सकेगा। एक करोड़ रुपये तक के टेंडर पर विभागाध्यक्ष अथवा उपायुक्त की समिति निर्णय लेगी, जबकि एक करोड़ रुपये से अधिक के कार्यों के लिए अतिरिक्त महानगरपालिका आयुक्त की अध्यक्षता वाली समिति अंतिम निर्णय करेगी।

आयुक्त नवल किशोर राम ने स्पष्ट किया कि नागरिकों को समयबद्ध तरीके से मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना प्रशासन का प्राथमिक कर्तव्य है। उन्होंने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देशों का अक्षरशः पालन करने को कहा है। निर्देशों की अनदेखी होने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ सख्त विभागीय कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।

Cyber Fraud: ऑनलाइन स्कैम के बाद कैसे बचाएं पैसे? 1930 पर कॉल से लेकर ऑनलाइन शिकायत तक जानें जरूरी बातें

राहुल गांधी को री-लॉन्च करने के चक्कर में हो रहा पार्टी का नुकसान, कांग्रेस पर बरसे संजय निरुपम

युवाओं को विकास और विरासत को साथ लेकर आगे बढ़ना होगा, राही मासूम रजा की जन्म शताब्दी पर बोले LG मनोज सिन्हा

महाराष्ट्र के येवला से बांग्लादेश पहुंचा शीरे का माल, मध्य रेल को मिला 1.11 करोड़ रुपये का राजस्व

जामिया में छात्र संघ चुनाव को लेकर क्यों गरमाया माहौल? विरोध के बाद ऑफलाइन पढ़ाई ठप, ऑनलाइन क्लास शुरू