Pune Wakad Police Case 23 Ganesh Mandals DJ Noise Pollution: गणेशोत्सव के पावन पर्व के समापन पर जब शहर भक्ति और उत्साह के रंगों में डूबा था, तब वाकड क्षेत्र के विसर्जन जुलूस में नियमों को ताक पर रखना कई गणेश मंडलों के लिए भारी पड़ गया। विसर्जन के दौरान न्यायालय और प्रशासन द्वारा तय की गई ध्वनि सीमा का खुलेआम उल्लंघन कर तेज आवाज में डीजे बजाने वाले 23 सार्वजनिक गणेश मंडलों के खिलाफ वाकड पुलिस ने सख्त कार्रवाई की है। पुलिस ने केवल समझाइश देकर छोड़ देने के बजाय सीधे आपराधिक मामले दर्ज कर यह साफ संदेश दिया है कि कानून से ऊपर कोई नहीं है।
मंगलवार को वाकड इलाके में विभिन्न सार्वजनिक गणेश मूर्तियों का विसर्जन जुलूस निकाला गया था। गणेशोत्सव की शुरुआत में ही पुलिस प्रशासन ने सभी मंडलों के पदाधिकारियों और साउंड सिस्टम संचालकों के साथ बैठक कर स्पष्ट निर्देश दिए थे कि जुलूस में निर्धारित डेसीबल सीमा के भीतर ही डीजे और लाउडस्पीकर का इस्तेमाल किया जाए।
इसके बावजूद जुलूस के दौरान कई मंडलों ने चेतावनी को नजरअंदाज करते हुए भीषण आवाज में साउंड सिस्टम बजाना शुरू कर दिया, जिससे आम नागरिकों, बुजुर्गों और बच्चों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
कानून-व्यवस्था और ध्वनि प्रदूषण पर पैनी नजर रख रही वाकड पुलिस की विशेष टीमों ने मौके पर ही स्थिति का मुआयना किया और ध्वनि स्तर मानक से अधिक पाए जाने पर तुरंत एक्शन लिया। पुलिस ने 23 मंडलों के अध्यक्षों, प्रमुख पदाधिकारियों के साथ-साथ मौके पर मौजूद डीजे चालकों और मालिकों को भी नामजद करते हुए मामले दर्ज किए हैं।
यह पूरी कार्रवाई पिंपरी-चिंचवड़ के पुलिस आयुक्त विनय कुमार चौबे, अपर पुलिस आयुक्त शशिकांत महावरकर, सारंग आव्हाड, डॉ. बसवराज तेली, पुलिस उपायुक्त विशाल गायकवाड़ तथा वरिष्ठ अधिकारियों के मार्गदर्शन में अंजाम दी गई।
उत्सवों का आनंद और आस्था अपनी जगह है, लेकिन जनस्वास्थ्य और नागरिक अधिकारों की कीमत पर शोर-शराबा कतई स्वीकार्य नहीं हो सकता। वाकड पुलिस की इस त्वरित और निष्पक्ष कार्रवाई ने यह साबित कर दिया है कि परंपराओं के निर्वहन के साथ-साथ नियमों का पालन करना भी उतना ही अनिवार्य है।
प्रशासन का यह कड़ा रुख आने वाले अन्य त्योहारों और आयोजनों में ध्वनि प्रदूषण रोकने तथा नागरिकों को एक शांत और सुरक्षित माहौल देने की दिशा में एक प्रभावी व सराहनीय कदम साबित होगा।