Pimpri Chinchwad Indrayani River Project: पुणे जिला के पिंपरी-चिंचवड़ महानगर पालिका (PCMC) की महत्वाकांक्षी इंद्रायणी नदी पुनरुद्धार परियोजना प्रशासनिक अड़चनों, भूमि अधिग्रहण की जटिलताओं और विभिन्न सरकारी विभागों की अनुमतियों के फेर में उलझ गई है।
पुणे शहरवासियों को स्वच्छ, सुंदर और प्रदूषण मुक्त नदी किनारा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से तैयार की गई इस बृहद योजना का वास्तविक काम अब तक धरातल पर शुरू नहीं हो सका है। करोड़ों रुपये की परियोजना के इस तरह अटकने से नागरिकों और पर्यावरण प्रेमियों में निराशा बढ़ रही है।
बता दें कि पिंपरी-चिंचवड़ महानगर पालिका की स्थायी समिति ने करीब 18.50 किलोमीटर लंबे नदी क्षेत्र के कायाकल्प के लिए 430 करोड़ 75 लाख रुपये के बजट को पहले ही मंजूरी दे दी है। इसके बावजूद रेलवे,राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण, पर्यावरण विभाग, वन विभाग सहित अन्य संबंधित संस्थाओं से आवश्यक अनापत्ति प्रमाण पत्र और अनुमतियां नहीं मिल सकी हैं। इसके चलते परियोजना की प्रगति मुख्य रूप से बैठकों और पत्राचार तक सीमित रह गई है।
परियोजना को साकार करने के लिए मनपा को करीब 36 लाख 17 हजार वर्ग मीटर भूमि की आवश्यकता है। लेकिन अब तक आवश्यक भूमि के 70 प्रतिशत से अधिक हिस्से का कानूनी अधिग्रहण अथवा वास्तविक कब्जा मनपा को नहीं मिल पाया है।
नदी किनारे के कई - महत्वपूर्ण हिस्सों पर मालिकाना हक और कब्जे से जुड़े मामले प्रशासनिक तथा न्यायिक स्तर पर लंबित हैं। भूमि का पूर्ण हस्तांतरण नहीं होने के कारण ठेकेदार के लिए व्यापक स्तर पर निर्माण कार्य शुरू करना मुश्किल बना हुआ है।
वहीं परियोजना के दौरान नदी किनारे मौजूद बड़ी संख्या में पेड़ों के प्रभावित होने की आशंका भी जताई जा रही है, पेड़ों की कटाई अथवा पुनर्रोपण के लिए वन विभाग की अनुमति आवश्यक होगी। पर्यावरण प्रेमी भी नदी पुनरुद्धार के नाम पर पेड़ों की कटाई का विरोध कर रहे हैं।
पिंपरी-चिंचवड़ महानगर पालिका (PCMC) की महत्वाकांक्षी इंद्रायणी पुनरुद्धार योजना का उद्देश्य नदी के पानी की गुणवत्ता में सुधार, नदी में सीधे गिरने वाले दूषित नालों - को रोकना, आधुनिक सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित करना, नदी किनारों का सौंदर्याकरण और बाढ़ नियंत्रण व्यवस्था को मजबूत करना है।
इसके लिए रेलवे और राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण से कॉसिंग की अनुमति, पर्यावरण एवं वन विभाग से आवश्यक स्वीकृतियां तथा सिंचाई विभाग और महाराष्ट्र जीवन प्राधिकरण से - संबंधित अनुमतियां जरूरी है।
केंद्र सरकार की अमृत योजना के तहत प्रस्तावित इस परियोजना के लिए कार्य आदेश जारी करने में दिखाई गई जल्दबाजी पर विपक्ष और नागरिक संगठनों ने सवाल उठाए है। उनका कहना है कि जब परियोजना के लिए आवश्यक 70 प्रतिशत से अधिक जमीन ही मनपा के कब्जे में नहीं है, तो इतनी बड़ी राशि का ठेका और वर्क ऑर्डर जारी करने की जरूरत क्यों पड़ी।
जमीन अधिग्रहण और विभागों की एनओसी के बिना करोड़ों की नदी सुधार योजना शुरू करना जनता के पैसों की बर्बादी है।- वरिष्ठ पर्यावरण कार्यकर्ता, पिपरी-चिंचवड नागरिक मंच