Pimpri Chinchwad BJP Core Committee: पिंपरी-चिंचवड़ भाजपा में पदाधिकारियों के बीच बढ़ते मतभेद और समन्वय की कमी को देखते हुए प्रदेश स्तर पर संगठनात्मक बदलाव किया गया है। भाजपा की प्रदेश समिति ने शहर की कोर कमेटी में बड़ा फेरबदल करते हुए सदस्यों की संख्या 23 से घटाकर 14 कर दी है।
पुनर्गठन में सत्तारूढ़ पक्षनेता समेत युवा, महिला और अन्य कई पदाधिकारियों को स्थायी सदस्यता से बाहर कर दिया गया है। हालांकि, महानगरपालिका के कामकाज से जुड़े निर्णयों के लिए पदेन सदस्य के तौर पर उनकी भूमिका बरकरार रखी गई है।
भाजपा की शहर कोर कमेटी शहर स्तर पर संगठन की नीतियां तय करने, महत्वपूर्ण राजनीतिक फैसले लेने और संगठनात्मक अनुशासन बनाए रखने में अहम भूमिका निभाती है। महानगरपालिका के कामकाज और नीतिगत निर्णयों को लेकर पार्टी के भीतर मतभेद सामने आने के बाद प्रदेश नेतृत्व ने कमेटी के पुनर्गठन का फैसला किया है।
पार्टी नेतृत्व का मानना है कि आपसी मतभेद और समन्वय की कमी का असर संगठन की छवि पर पड़ रहा था। कई मुद्दों पर नेताओं के अलग-अलग रुख सामने आने और विवादों के सार्वजनिक होने से पार्टी की किरकिरी भी हुई। इसी को देखते हुए अब निर्णय प्रक्रिया को सीमित और अधिक समन्वित रखने की कोशिश की गई है।
पिंपरी-चिंचवड महानगरपालिका के भाजपा शहराध्यक्ष शत्रुघ्न काटे ने बताया कि पार्टी नेतृत्व की ओर से मनपा के कामकाज को सुचारू रूप से चलाने और आपसी मतभेदों को सार्वजनिक होने से रोकने के निर्देश दिए गए हैं। संगठन के भीतर किसी भी विषय पर चर्चा कर समन्वय से निर्णय लेने पर जोर दिया जा रहा है।
वहीं, सत्तारूढ़ पक्षनेता प्रशांत शितोले ने कहा कि पार्टी की ओर से उन्हें जो भी जिम्मेदारी दी जाएगी, वे उसका पालन करेंगे। कोर कमेटी के पुनर्गठन को लेकर पार्टी के भीतर चर्चा तेज हो गई है।
पिंपरी-चिंचवड़ भाजपा में पदाधिकारियों की पुनर्गठित कोर कमेटी में शहराध्यक्ष शत्रुघ्न काटे, विधायक महेश लांडगे, शंकर जगताप, उमा खापरे, अमित गोरखे, महापौर रधि लांडगे, पूर्व सांसद अमर साबले, पूर्व विधायक अश्विनी जगताप, पार्टी प्रभारी भरत पाटील, शरद खाड़े, मोरेश्वर शेडगे, मयूर पाचले, विकास डोलस और सदाशिव खाड़े को शामिल किया गया है।
कमेटी का आकार छोटा किए जाने के बाद अब पार्टी के प्रमुख निर्णयों में सीमित संख्या में वरिष्ठ नेताओं की भूमिका रहेगी। प्रदेश नेतृत्व के इस बदलाव से संगठन के भीतर समन्वय बढ़ाने और मनपा से जुड़े विवादों को नियंत्रित करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।