PCMC New Administrative Building Budget Surge 562 Crore: पिंपरी-चिंचवड़ महानगरपालिका (PCMC) की चिंचवड़ स्थित साइंस पार्क के पास बन रही नई आलीशान प्रशासनिक इमारत अपने निर्माण कार्य पूरा होने से पहले ही बेहिसाब बजट वृद्धि और फिजूलखर्ची को लेकर विवादों में घिर गई है। मूल रूप से ₹286 करोड़ की लागत से स्वीकृत इस भव्य परियोजना का बजट अब बढ़कर ₹562 करोड़ से अधिक पहुंच चुका है।
चिंचवड़ स्थित साइंस पार्क के पास मनपा की कुल 33.86 एकड़ भूमि में से 8.65 एकड़ क्षेत्र में नई प्रशासनिक इमारत बनाई जा रही है। परियोजना में छह से 18 मंजिल की चार पर्यावरणपूरक इमारतें शामिल हैं, जिनमें दो 18 मंजिला और दो छह मंजिला ब्लॉक होंगे।
इस ड्रीम प्रोजेक्ट का निर्माण कार्य जनवरी 2023 में शुरू हुआ था। अनुबंध के अनुसार ठेकेदार को 3 वर्ष के भीतर यानी जुलाई 2025 तक काम पूरा करना था। तय समय पर काम पूरा न होने के कारण ठेकेदार को 1 वर्ष की अतिरिक्त अवधि दी गई थी, लेकिन इसके बावजूद अब तक केवल 66 प्रतिशत काम ही पूरा हो सका है।
इसके अलावा, परिसर में दिवंगत उपमुख्यमंत्री अजीत पवार की प्रतिमा और 'अजीतसृष्टि' के निर्माण का खर्च अलग से तय किया गया है। निर्माण कार्य में देरी और लगातार बढ़ते बजट ने मनपा प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
पुणे मनपा के मुख्य अभियंता प्रमोद ओम्भासे के अनुसार, चारों इमारतों के मूल निर्माण का काम अंतिम चरण में है, लेकिन परिसर विकास, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP), पानी की टंकी, ड्रेनेज लाइन और विभिन्न विभागों के फर्नीचर कार्य के लिए अलग-अलग निविदाएं निकाली जा रही हैं, जिससे कुल खर्च में यह भारी बढ़ोतरी दिखाई दे रही है। दूसरी ओर, सामाजिक कार्यकर्ता सचिन कालभोर ने काम में देरी के लिए ठेकेदार पर दंडात्मक कार्रवाई करने और लगातार बढ़ते बजट में संबंधित अधिकारियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
नई प्रशासनिक इमारत में विभिन्न विभागों के 2,689 अधिकारी-कर्मचारियों के बैठने की आधुनिक व्यवस्था होगी। साथ ही 3 बेसमेंट पार्किंग में 479 चारपहिया और 2,713 दोपहिया वाहनों की जगह, कुल 16 लिफ्ट, नागरिक सेवा केंद्र, ई-गवर्नेस सेंटर, बहुउद्देशीय सभागृह, बड़ा नगरसेवक सभागृह, ग्रंथालय, वाचनालय, क्लिनिक, प्रदर्शनी हॉल, संग्रहालय और पत्रकार कक्ष जैसी सुविधाएं प्रस्तावित हैं।
वर्तमान मनपा भवन का उद्घाटन 13 मार्च 1987 को तत्कालीन राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह ने किया था। करीब चार दशक पुरानी इस इमारत में 30 लाख से अधिक आबादी और बढ़ती प्रशासनिक जरूरतों के कारण जगह की कमी महसूस की जा रही थी।