PCMC Financial Crisis News: पिंपरी-चिंचवड़ महानगर पालिका (पीसीएमसी) वर्तमान में अपने सबसे कठिन वित्तीय दौर से गुजर रही है। वर्ष 2022-23 से लेकर 2025-26 तक के आर्थिक आंकड़ों का विश्लेषण करें तो स्पष्ट होता है कि मनपा का खजाना खाली होने की कगार पर है। संपत्ति कर और विकास शुल्क जैसे प्रमुख राजस्व स्रोतों से होने वाली आय में भारी गिरावट दर्ज की
गई है, जबकि दूसरी ओर शहर के विकास के नाम पर लिए गए कर्ज और उसके ब्याज का बोझ निरंतर बढ़ता जा रहा है। केंद्र और राज्य सरकार से मिलने वाले अनुदान में देरी ने इस संकट को और अधिक गहरा कर दिया है, जिससे अब अनिवार्य परियोजनाओं के लिए भी अतिरिक्त ऋण लेने की नौबत आ गई है।
इस खस्ताहाल वित्तीय स्थिति का सीधा असर अब मनपा की राजनीति पर भी दिखने लगा है। विशेष रूप से 'स्थायी समिति अध्यक्ष' पद की नियुक्ति को लेकर सत्ताधारी दल के भीतर भारी असमंजस और मतभेद की स्थिति पैदा हो गई है।
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चूंकि इस पद के पास महत्वपूर्ण वित्तीय अधिकार होते हैं, इसलिए पार्टी का एक गुट फिलहाल इस नियुक्ति को ठंडे बस्ते में डालने के पक्ष में है। नेताओं का तर्क है कि जब तक आर्थिक अनुशासन स्थापित नहीं होता, तब तक नई नियुक्तियों और बड़े वित्तीय निर्णयों से बचना चाहिए।
विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि संपत्ति कर की वसूली में तेजी नहीं लाई गई और फिजूलखर्ची पर लगाम नहीं कसी गई, तो आने वाले दिनों में जलापूर्ति, सड़क रखरखाव और कचरा प्रबंधन जैसी बुनियादी सेवाएं भी ठप हो सकती हैं। वर्तमान में कठोर वित्तीय नियंत्रण और पारदर्शिता ही मनपा को इस संकट से उबारने का एकमात्र रास्ता नजर आ रही है।