Nitin Gadkari On Mumbai Pune Expressway: केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी अपने बेबाक बयानों और देश में इंफ्रास्ट्रक्चर के कायाकल्प के लिए जाने जाते हैं। हाल ही में सिम्बायोसिस इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी द्वारा आयोजित 'फेस्टिवल ऑफ थिंकर्स' लेक्चर सीरीज में हिस्सा लेते हुए गडकरी ने अपने शुरुआती फैसलों और इंफ्रास्ट्रक्चर प्लानिंग को लेकर एक बेहद दिलचस्प अनुभव साझा किया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया कि जब वे अपने राजनीतिक करियर के शुरुआती दौर में थे, तब प्लानिंग के स्तर पर उनसे एक बड़ी चूक हो गई थी। गडकरी ने 1990 के दशक के उत्तरार्ध का जिक्र करते हुए कहा, "जब 1996-97 में मुझे मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे बनाने का मौका मिला था, तब मेरे सेक्रेटरी ने मुझसे सुझाव दिया था कि इसे केवल 4-लेन वाली सड़क बनाना चाहिए। हालांकि, उस समय हमने इसे 6-लेन का बनाया।
नितिन गडकरी ने आगे कहा कि बाद में जब मुझे विदेश यात्राएं करने और वहां के इंफ्रास्ट्रक्चर को देखने का मौका मिला, तब मुझे अहसास हुआ कि मुंबई और पुणे जैसे दो बड़े आर्थिक केंद्रों को जोड़ने वाली यह सड़क कम से कम 40 लेन चौड़ी होनी चाहिए थी।
गडकरी ने बिना किसी झिझक के कहा कि स्वीकार करने में कोई बुराई नहीं है कि मुंबई पुणे एक्सप्रेसवे बनाते समय मुझसे गलती हुई थी। उस समय हम भविष्य के ट्रैफिक दबाव का सही अंदाजा नहीं लगा पाए थे।
देश में वाहनों की संख्या कितनी तेजी से बढ़ रही है, अपनी इस बात को साबित करने के लिए कि नितिन गडकरी दिल्ली के इंफ्रास्ट्रक्चर का उदाहरण दिया। उन्होंने बताया कि हाल ही में मैंने दिल्ली में एक ऐसी सड़क बनाई है जो 40 लेन चौड़ी है। जब आप दिल्ली से मेरठ की ओर जाते हैं, तो अक्षरधाम मंदिर के पास वह सड़क 40 लेन चौड़ी हो जाती है। लेकिन हैरान करने वाली बात यह है कि इतनी चौड़ी सड़क होने के बावजूद वहां आज भी ट्रैफिक जाम की स्थिति बन जाती है।
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट और प्लानिंग के समय कम से कम 25 से 50 साल आगे की सोच रखनी चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत जैसे तेजी से बढ़ते देश में केवल आज की समस्याओं को देखकर नीतियां नहीं बनाई जा सकतीं। विकास की सही दिशा तय करने के लिए दीर्घकालिक दृष्टिकोण होना बेहद जरूरी है।