नीरा घाटी के चार बांधों में 89.84% जलभंडार, पिछले साल से कम।
वीर बांध में पानी घटकर 45.50% रह गया।
पुणे, सातारा और सोलापुर के किसानों व नागरिकों की जलापूर्ति पर चिंता।
Nira Valley Water Storage: नीरा घाटी के बांधों में जलभंडार को लेकर चिंताजनक स्थिति सामने आई है। पुणे सिंचाई विभाग की 13 अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट के अनुसार नीरा
नदी घाटी के वीर, भाटघर, नीरा देवघर और गुंजवणी इन चार बांधों में कुल मिलाकर वर्तमान में 43 हजार 192 मिलियन घनफुट उपयोगी जलभंडार है। पिछले वर्ष इसी अवधि में यह भंडारण 48 हजार 329 मिलियन घनफुट था।
इसका अर्थ यह है कि इस वर्ष पिछले वर्ष की तुलना में 4 हजार 910 मिलियन घनफुट जलभंडार कम है। कुल उपयोगी जलभंडार का प्रतिशत 100 से घटकर 89.84 प्रतिशत पर आ गया है।
नीरा घाटी के चार बांधों के जलभंडार पर विचार करें तो भाटघर, नीरा देवघर और गुंजवणी बांधों में प्रत्येक में 100 प्रतिशत उपयोगी जलभंडार शेष है। हालांकि वीर बांध में जलभंडार में पिछले वर्ष की तुलना में भारी गिरावट आई है।
रिपोर्ट के अनुसार वीर बांध में वर्तमान में 4 हजार 271 मिलियन घनफुट उपयोगी जलभंडार है जो क्षमता का 45.50 प्रतिशत है। पिछले वर्ष इसी दिन वीर बांध में 9 हजार 408 मिलियन घनफुट यानी 100 प्रतिशत उपयोगी जलभंडार था। नीरा घाटी के इन चारों बांधों के पानी पर पुणे जिले के भोर, पुरंदर, बारामती और इंदापुर तहसीलों की कृषि व पेयजल योजनाएं निर्भर हैं।
इसके अलावा सातारा जिले के खंडाला व फलटण तथा सोलापुर जिले के पंढरपुर तहसील की कृषि व पेयजल योजनाओं के लिए भी इस जलभंडार का विशेष महत्व है। इसलिए बांधों में पानी की उपलब्धता और उसका उचित नियोजन इस क्षेत्र के किसानों, नागरिकों और प्रशासन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण साबित होने वाला है।
आगामी समय में यदि बारिश नहीं हुई तो कृषि के लिए पानी उपलब्ध कराना और पेयजल योजनाओं का प्रबंधन करना एक बड़ी चुनौती बन सकता है।
विशेष रूप से अगले एक महीने तक बारिश न होने पर उपलब्ध जलभंडार कितने समय तक चलेगा, इसे लेकर चिंता बढ़ सकती है। इसलिए प्रशासन को अभी से ही संभावित जलसंकट को ध्यान में रखकर ठोस कदम उठाने चाहिए।
कुल मिलाकर नीरा घाटी में वर्तमान में 89.37 प्रतिशत उपयोगी जलभंडार होने के बावजूद यह पिछले वर्ष की तुलना में कम है। नीरा घाटी बांधों में पानी की वर्तमान स्थिति संतोषजनक लग सकती है, लेकिन आगे की स्थिति बारिश के रुख और पानी की बढ़ती मांग पर निर्भर करेगी। इसलिए नीरा घाटी के किसानों और नागरिकों की नजरें अब आने वाली बारिश पर टिकी है।