

छत्रपति संभाजीनगर मराठवाड़ा स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव में कुल 41 प्रत्याशी मैदान में।
सतीश चव्हाण, प्रतापसिंह पाटील और दिलीप घुगे के बीच मुख्य मुकाबले की चर्चा।
भाजपा महायुति के सीट-बंटवारे के तहत चुनाव नहीं लड़ रही।
प्रतापसिंह पाटील के सामने अपने भाई और शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के विधायक राहुल पाटील के रुख को लेकर चर्चा।
निर्वाचन क्षेत्र में करीब 3.26 लाख स्नातक मतदाता बताए गए हैं।
Sambhajinagar Constituency Battle Satish Chavan Pratapsinh Patil Dilip Ghuge: छत्रपति संभाजीनगर मराठवाड़ा स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव में 41 प्रत्याशी मैदान में हैं, लेकिन मुख्य मुकाबला सतीश चव्हाण, प्रतापसिंह पाटील और दिलीप घुगे के बीच माना जा रहा है। भाजपा के चुनाव से दूर रहने और दोनों राष्ट्रवादी कांग्रेस गुटों के आमने-सामने आने से मुकाबला दिलचस्प हो गया है।
छत्रपति संभाजीनगर, मराठवाड़ा में सूखे और खेती के संकट के बीच स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव की सरगर्मी तेज हो गई है। 23 अक्टूबर को होने वाले चुनाव में कुल 41 प्रत्याशी मैदान में हैं, लेकिन राजनीतिक हलकों में मुख्य मुकाबला राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के सतीश चव्हाण, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के प्रतापसिंह पाटील और शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के दिलीप घुगे के बीच माना जा रहा है।
इस चुनाव में तीनों प्रत्याशियों की राजनीतिक प्रतिष्ठा दांव पर है। वहीं, भाजपा के मैदान से दूर रहने के कारण महायुति के भीतर मतों के समीकरण और संभावित भितरघात को लेकर भी चर्चा हो रही है।
सतीश चव्हाण और प्रतापसिंह पाटील की मराठवाड़ा में शैक्षणिक संस्थाओं के माध्यम से मजबूत उपस्थिति बताई जाती है। इसी वजह से चुनाव केवल स्नातक मतदाताओं तक सीमित चर्चा का विषय नहीं रहा, बल्कि क्षेत्र के राजनीतिक और शैक्षणिक हलकों में भी इसकी गूंज है।
सतीश चव्हाण चौथी बार विधान परिषद में पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं। वे पहले अविभाजित राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के टिकट पर इस निर्वाचन क्षेत्र से जीत चुके हैं। बाद में शरद पवार गुट में जाने और फिर अजित पवार गुट में लौटने के उनके राजनीतिक सफर के कारण इस बार मुकाबले को दोनों राष्ट्रवादी गुटों के प्रभाव की परीक्षा के तौर पर भी देखा जा रहा है।
प्रतापसिंह पाटील शरद पवार गुट के प्रत्याशी हैं। ऐसे में चव्हाण और पाटील के बीच मुकाबले में राष्ट्रवादी कांग्रेस के दोनों गुटों की राजनीतिक ताकत भी परखी जाएगी। वहीं, दिलीप घुगे की उम्मीदवारी से मुकाबले में तीसरा समीकरण बनता दिखाई दे रहा है।
इस निर्वाचन क्षेत्र से भाजपा पहले भी प्रतिनिधि चुनकर भेजती रही है। हालांकि, महायुति में हुए समझौते के तहत इस बार भाजपा चुनाव नहीं लड़ रही है। ऐसे में भाजपा समर्थक मतदाताओं का रुख किस प्रत्याशी की ओर जाता है, इस पर सभी की नजर रहेगी।
पिछले चुनावों में भाजपा ने शिरीष बोरालकर पर दांव लगाया था। इस बार पार्टी के मैदान में नहीं होने से सतीश चव्हाण की जीत महायुति के लिए प्रतिष्ठा का विषय मानी जा रही है। हालांकि, मतदाताओं का वास्तविक रुझान मतदान के बाद ही स्पष्ट होगा।
प्रतापसिंह पाटील परभणी स्थित वसंतराव नाईक मराठवाड़ा कृषि महाविद्यालय के पूर्व कुलपति दिवंगत वेदप्रकाश पाटील के पुत्र हैं। वे परभणी के शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) विधायक राहुल पाटील के भाई भी हैं।
ऐसे में राजनीतिक हलकों में यह सवाल उठ रहा है कि राहुल पाटील पार्टी के प्रत्याशी दिलीप घुगे के प्रचार को प्राथमिकता देंगे या अपने भाई के समर्थन में सक्रिय होंगे। प्रतापसिंह पाटील का धनेश्वरी शिक्षण प्रसार मंडल मराठवाड़ा में शैक्षणिक संस्थाओं से जुड़ा बताया जाता है। पूर्व स्वास्थ्य मंत्री राजेश टोपे भी उन्हें विजयी बनाकर पिछले विधानसभा चुनाव की हार का राजनीतिक जवाब देने की कोशिश में बताए जा रहे हैं।
इस निर्वाचन क्षेत्र के इतिहास में अविभाजित राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी ने सबसे अधिक चार बार जीत दर्ज की है। भाजपा ने तीन बार, जबकि कांग्रेस और जनसंघ ने एक-एक बार प्रतिनिधित्व किया है। पुराने चुनावों में कुमुदिनी रांगणेकर, वसंतराव काले, जयसिंहराव गायकवाड़, श्रीकांत जोशी और सतीश चव्हाण जैसे नाम इस सीट से जुड़े रहे हैं।
निर्वाचन क्षेत्र में करीब 3.26 लाख स्नातक मतदाता बताए गए हैं। अब देखना होगा कि मतदाता घड़ी, तुतारी और मशाल में से किसे समर्थन देते हैं और विधान परिषद में मराठवाड़ा का प्रतिनिधित्व किसके हाथ आता है।