पुणे-नसरापुर कांड (सोर्स: डिजाइन फोटो) 
पुणे

Nasrapur Case: 65 वर्षीय आरोपी की पुलिस कस्टडी 12 मई तक बढ़ी, कोर्ट में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हुई पेशी

Pune Nasrapur Case: पुणे के नसरापुर में 4 वर्षीय मासूम की हत्या और यौन उत्पीड़न मामले में बड़ा अपडेट, अदालत ने आरोपी भीमराव कांबले की पुलिस हिरासत बढ़ा दी है। जानें इस घटना की पूरी रिपोर्ट।

गोरक्ष पोफली

Nasrapur Case Update: पुणे जिले के भोर तहसील के अंतर्गत आने वाले नसरापुर गांव में चार साल की मासूम बच्ची के साथ हुए जघन्य अपराध ने मानवता को शर्मसार कर दिया है। इस मामले में न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी (JMFC) पुणे ने आज एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए 65 वर्षीय मुख्य आरोपी भीमराव कांबले की पुलिस हिरासत 12 मई, 2026 तक बढ़ा दी है।

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हुई पेशी

आरोपी की प्रारंभिक पुलिस हिरासत आज समाप्त हो रही थी, जिसके बाद उसे अदालत के समक्ष पेश किया गया। सुरक्षा कारणों और मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए आरोपी को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट लाने के बजाय वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पेश किया गया। सरकारी पक्ष ने दलील दी कि आरोपी के आपराधिक इतिहास और मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच के लिए और समय की आवश्यकता है, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया।

क्या थी पूरी घटना?

यह हृदयविदारक घटना 1 मई, 2026 को घटित हुई थी। आरोपी भीमराव कांबले ने महज चार साल की मासूम बच्ची को बछड़ा दिखाने के बहाने फुसलाकर एक गोशाला में बुलाया। वहां आरोपी ने बच्ची के साथ दरिंदगी की और पहचान उजागर होने के डर से उसकी हत्या कर दी। इतना ही नहीं, सबूत मिटाने के उद्देश्य से आरोपी ने बच्ची के शव को गोबर के ढेर के नीचे दबा दिया था।

जांच में जुटी विशेष टीम (SIT)

पुणे ग्रामीण पुलिस अधीक्षक संदीप सिंह गिल के नेतृत्व में छह अधिकारियों की एक विशेष टीम इस मामले की गहन जांच कर रही है। पुलिस वर्तमान में आरोपी के मेडिकल परीक्षण, रासायनिक विश्लेषण और उसकी यौन क्षमता (Sexual Competence Test) की जांच करवा रही है। पुलिस का लक्ष्य एक पुख्ता चार्जशीट तैयार करना है ताकि आरोपी को कानून के शिकंजे से बचने का कोई मौका न मिले।

आरोपी का पुराना आपराधिक इतिहास

जांच के दौरान पुलिस को पता चला है कि आरोपी भीमराव कांबले पहले भी इसी तरह के अपराधों में शामिल रहा है। 2015 में उस पर POCSO एक्ट के तहत मामला दर्ज हुआ था, हालांकि सबूतों के अभाव में वह 2019 में बरी हो गया था। इसके अलावा, 1998 में भी उस पर छेड़छाड़ का एक मामला दर्ज था। पुलिस अब इन पुराने मामलों की भी कड़ियां जोड़ रही है।

सरकार का रुख, फांसी की मांग

इस घटना के बाद नसरापुर और आसपास के इलाकों में भारी जन आक्रोश देखा गया। पुणे-बेंगलुरु हाईवे पर चक्का जाम किया गया और दोषियों को तुरंत फांसी देने की मांग की गई। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने आश्वासन दिया है कि यह मुकदमा फास्ट-ट्रैक कोर्ट में चलाया जाएगा। सरकार की ओर से उज्ज्वल निकम जैसे प्रखर वकील को विशेष लोक अभियोजक नियुक्त करने की चर्चा है, ताकि आरोपी को मृत्युदंड सुनिश्चित की जा सके।

महाराष्ट्र राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने भी इस मामले में हस्तक्षेप किया है और स्थानीय प्रशासन को निर्देश दिए हैं कि पीड़ित परिवार को हर संभव कानूनी और वित्तीय सहायता प्रदान की जाए। पूरा प्रशासन अब इस कोशिश में है कि जल्द से जल्द जांच पूरी कर न्याय की प्रक्रिया को अंजाम दिया जाए।

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