विधान परिषद की 3 सीटों पर बीजेपी और शिंदे सेना में खींचतान जारी।
पुणे स्नातक सीट पर बीजेपी उम्मीदवार के खिलाफ सचिन सानप निर्दलीय मैदान में।
सीएम फडणवीस और डिप्टी सीएम शिंदे ने नाराज नेताओं को मनाने की कोशिश तेज की।
Maharashtra Legislative Council Seats: महाराष्ट्र विधान परिषद की पांच सीटों पर होने वाले चुनाव से पहले सत्तारूढ़ महायुति में अंदरूनी खींचतान तेज हो गई है। अमरावती शिक्षक, पुणे शिक्षक और पुणे स्नातक सीटों पर बीजेपी तथा शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट) के बीच मतभेद सामने आए हैं।
बागी नेताओं की नाराजगी दूर करने और गठबंधन में तालमेल बनाए रखने के लिए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने मोर्चा संभाल लिया है।
महाराष्ट्र विधान परिषद की पुणे शिक्षक, पुणे स्नातक, अमरावती शिक्षक, छत्रपति संभाजीनगर स्नातक और नागपुर स्नातक सीटों के लिए 23 अक्टूबर को मतदान होना है।
चुनाव से पहले उम्मीदवारों के चयन और सीटों के बंटवारे को लेकर सहयोगी दलों के बीच असहमति सामने आई है। मुख्यमंत्री फडणवीस ने पुणे के पार्टी पदाधिकारियों से चर्चा की, जबकि उपमुख्यमंत्री शिंदे ने अपने नेताओं को गठबंधन धर्म निभाने के निर्देश दिए हैं।
पुणे शिक्षक सीट पर शिवसेना (शिंदे गुट) ने अपनी दावेदारी पेश की थी। मंगेश चिवटे इस सीट से चुनाव लड़ना चाहते थे। हालांकि, महायुति में यह सीट बीजेपी के खाते में जाने के बाद भी उन्होंने नामांकन दाखिल किया। बाद में एकनाथ शिंदे के कहने पर चिवटे ने अपना नामांकन वापस ले लिया। इसके बावजूद स्थानीय स्तर पर नाराजगी पूरी तरह खत्म नहीं होने की चर्चा है।
पुणे स्नातक सीट पर बीजेपी की स्मिता जाधव के सामने सचिन सानप निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ रहे हैं। सानप को उद्योग मंत्री उदय सामंत का करीबी बताया जाता है। ऐसे में इस सीट पर महायुति के भीतर संभावित समर्थन को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं।
मंगलवार रात उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नंदनवन आवास पर वरिष्ठ नेताओं की बैठक हुई। इसमें उदय सामंत, शंभूराज देसाई, प्रकाश आबिटकर, ओमराजे निंबालकर, भावना गवली, विजय शिवतारे, शहाजीबापू पाटील और पूर्व विधायक रवींद्र धंगेकर समेत कई नेता शामिल हुए। बैठक में पुणे शिक्षक सीट को लेकर नाराजगी और चुनावी रणनीति पर चर्चा होने की जानकारी सामने आई।
राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि शिवसेना के कुछ नेता पुणे स्नातक सीट पर सचिन सानप को समर्थन देने के पक्ष में हैं। हालांकि, मंत्री उदय सामंत ने इस तरह की रणनीति से इनकार किया है। ऐसे में चुनाव से पहले महायुति के भीतर समन्वय बनाए रखना दोनों प्रमुख नेताओं के लिए चुनौती बना हुआ है।