पुणे में जल संकट (सोर्सः AI) 
पुणे

100 साल में तीसरा सबसे सूखा जून: 75% जिलों में कम बारिश, महाराष्ट्र में खरीफ फसलें प्रभावित; पुणे में जल संकट

Pune Water Crisis: देश में पिछले 100 वर्षों का तीसरा सबसे सूखा जून दर्ज हुआ है। 75% जिलों में कम बारिश से महाराष्ट्र में खरीफ फसलों पर संकट मंडराया और पुणे में जल किल्लत बढ़ी।

रूपम सिंह

Pune June Rainfall Deficit IMD Weather Report: पुणे जून में देश के अधिकांश भागों में मानसून ने दस्तक दी थी। लेकिन देश के अधिकांश हिस्सों में वास्तविक बारिश में भारी कमी दर्ज की गई है। भारतीय मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, यह जून पिछले 100 वर्षों में तीसरा सबसे सूखा जून साबित हुआ है।

देश के 75 प्रतिशत जिलों में सामान्य से 20 से 100 फीसदी तक कम बारिश हुई है, जिसका सीधा असर पुणे के जल संकट और महाराष्ट्र की खरीफ फसलों पर पड़ता दिख रहा है। विश्लेषण किए गए 741 जिलों में से 555 जिलों में बारिश की भारी कमी रही, जबकि केवल 181 जिलों में ही सामान्य बारिश दर्ज की गई।

जून माह में सिर्फ 92.2 मिमी बारिश हुई दर्ज

राष्ट्रीय स्तर पर जहां जून में 157.7 मिमी औसत बारिश अपेक्षित थी, वहां केवल 92.2 मिमी बारिश ही हुई। मध्य भारत में बारिश की कमी सर्वाधिक 59 फीसदी रही, जिसने सोयाबीन और दालों जैसी प्रमुख फसलों की बुआई को प्रभावित किया है। पुणे और आसपास के ग्रामीण इलाकों में इस सूखे ने जल सुरक्षा और जलाशयों के भंडारण को लेकर बड़ी चिंता खड़ी कर दी है।

विशेषज्ञों का मानना है कि मानसून का पहुंचना मात्र पर्याप्त नहीं है, बल्कि समय पर और पर्याप्त बारिश ही कृषि, भूजल स्तर और पुणे जैसे बड़े शहरों की जलापूर्ति सुनिश्चित करती है। जून 2026 के इन चिताजनक आंकड़ों ने पुणे समेत पूरे देश को भविष्य के जल संकट के प्रति गंभीर चेतावनी दी है।

पुणे में जल संकट की आशंका बढ़ी

कम बारिश का असर पुणे शहरऔर आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में जल सुरक्षा पर भी पड़ने लगा है। जलाशयों में अपेक्षित जल संचय नहीं होने से भविष्य की पेयजल आपूर्ति और सिंचाई व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ गई है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि मानसून का समय पर पहुंचना पर्याप्त नहीं होता, बल्कि पूरे मौसम में संतुलित और पर्याप्त वर्षा होना आवश्यक है।

विशेषज्ञों ने दी भविष्य के लिए चेतावनी

मौसम और कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि जून 2026 के आंकड़े भविष्य के जल प्रबंधन की चुनौती को स्पष्ट करते हैं। यदि आने वाले महीनों में सामान्य या अधिक वर्षा नहीं हुई, तो कई राज्यों में जल संकट और कृषि उत्पादन पर दबाव बढ़ सकता है। विशेषज्ञों ने जल संरक्षण, वर्षा जल संचयन और संसाधनों के बेहतर प्रबंधन पर जोर देते हुए कहा कि बदलते जलवायु परिदृश्य में ऐसी स्थितियों से निपटने के लिए दीर्घकालिक रणनीति अपनाना आवश्यक होगा।

मोदी कैबिनेट में जल्द बड़ा फेरबदल? 3 मंत्रियों के इस्तीफे से 12 पद खाली, युवाओं-महिलाओं को मिल सकती जिम्मेदारी

पॉलीथीन की थैलियों में भरा जा रहा था चढ़ावा, खराब किए QR कोड; बांके बिहारी मंदिर मामले में भड़का सुप्रीम कोर्ट

गरीबों की सेवा से नोबेल और भारत रत्न तक, जानिए मदर टेरेसा की जिंदगी की पूरी कहानी

गांधी खानदान की बहू, पर BJP में बनाई धाक; परिवार की सियासत से अलग मेनका गांधी ने यूं तय किया राजनीतिक सफर

त्योहारों के रंग में रंगा देश, PM मोदी और अन्य नेताओं ने दी ओणम और ईद-ए-मिलाद-उन-नबी की बधाई