Ladki Bahin Yojana Name Change (फोटो क्रेडिट-इंस्टाग्राम)  
पुणे

Ladki Bahin Yojana: 'अजित दादा' के नाम पर होगा लाडकी बहिन योजना का नया नाम? MLC अमोल मिटकरी ने की मांग

Ladki Bahin Yojana Name Change: एनसीपी विधायक अमोल मिटकरी ने 'लाडकी बहिन योजना' का नाम बदलकर दिवंगत अजित पवार के नाम पर रखने की मांग की है। जानें क्या है इसके पीछे की बड़ी वजह।

अनिल सिंह

NCP Demand For Ladki Bahin Yojana: महाराष्ट्र की राजनीति में 'लाडकी बहिन योजना' केवल एक कल्याणकारी योजना नहीं, बल्कि महायुति सरकार की सफलता का सबसे बड़ा स्तंभ मानी जाती है। अब इस योजना को लेकर एक नई और भावनात्मक चर्चा शुरू हो गई है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के विधायक अमोल मिटकरी ने मंगलवार (3 फरवरी) को राज्य सरकार से मांग की है कि इस योजना का नाम बदलकर दिवंगत उपमुख्यमंत्री अजित पवार के नाम पर रखा जाए। मिटकरी का तर्क है कि अजित दादा ने इस योजना की नींव रखी थी और वे राज्य की करोड़ों महिलाओं के लिए एक सच्चे भाई की तरह थे।

28 जनवरी को बारामती में हुए दुखद विमान हादसे में अजित पवार के निधन के बाद, पार्टी अब उनकी विरासत को सहेजने और उन्हें सम्मान देने के नए तरीके तलाश रही है। अमोल मिटकरी द्वारा उठाई गई यह मांग उसी रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस कदम के जरिए एनसीपी (अजित पवार गुट) अपनी पकड़ को और मजबूत करना चाहती है, विशेष रूप से तब जब अजित दादा की पत्नी सुनेत्रा पवार ने हाल ही में उपमुख्यमंत्री के रूप में कमान संभाली है।

"अजितदादा की कलाई हमेशा राखियों से भरी रहती थी"

अमोल मिटकरी ने पत्रकारों से बात करते हुए भावुक अंदाज में कहा कि अजित पवार राज्य की महिलाओं के सबसे पसंदीदा भाई थे। उन्होंने याद दिलाया कि जब भी अजित दादा राज्य के दौरों पर निकलते थे, तो उनकी कलाई बहनों द्वारा बांधी गई राखियों से भरी होती थी। मिटकरी ने प्रस्ताव दिया कि यदि सरकार इस योजना का नाम 'अजितदादांची लाडकी बहिण योजना' (अजितदादा की लाडकी बहिण योजना) रखती है, तो यह उनके द्वारा किए गए कार्यों और महिलाओं के प्रति उनके प्रेम के लिए एक सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

वित्त मंत्री के रूप में अजित पवार ने किया था ऐलान

बता दें कि जुलाई 2024 में शुरू हुई इस महत्वाकांक्षी योजना की घोषणा खुद अजित पवार ने वित्त मंत्री के रूप में बजट के दौरान की थी। इस योजना के तहत 21 से 65 वर्ष की आयु वाली पात्र महिलाओं को सीधे उनके बैंक खाते में हर महीने 1,500 रुपये की वित्तीय सहायता दी जाती है। माना जाता है कि 2024 के विधानसभा चुनावों में महायुति को मिली प्रचंड जीत में इस योजना ने 'गेमचेंजर' की भूमिका निभाई थी। अब इस योजना के साथ अजित पवार का नाम जोड़कर एनसीपी एक बड़ा भावनात्मक कार्ड खेलने की तैयारी में है।

क्या 2,100 रुपये तक बढ़ेगी सहायता राशि?

नाम बदलने की इस चर्चा के बीच, मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने भी योजना को लेकर बड़ा संकेत दिया है। उन्होंने सोमवार को स्पष्ट किया कि सरकार महिलाओं को दी जाने वाली मासिक सहायता बंद नहीं करेगी, बल्कि इसे और बढ़ाने पर विचार कर रही है। शिंदे ने कहा कि सही समय आने पर इस सहायता राशि को 1,500 रुपये से बढ़ाकर 2,100 रुपये प्रति माह कर दिया जाएगा। फिलहाल सरकार ने नाम बदलने की मांग पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन आगामी कैबिनेट बैठक में इस मुद्दे पर चर्चा होने की प्रबल संभावना है।

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