Purandar Airport Land Acquisition Pune News: प्रस्तावित पुरंदर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया में अनावश्यक अड़चनें दूर करने के उद्देश्य से प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। जिलाधिकारी जितेंद्र डुडी ने स्पष्ट किया है कि जिन मामलों में बहनों ने पहले स्वेच्छा से अपने भूमि अधिकारों का त्याग पत्र दिया था, लेकिन बाद में दोबारा आपत्तियां दर्ज कराई हैं, उन आपत्तियों को प्रशासन द्वारा खारिज किया जाएगा।
पुरंदर के प्रशासनिक भवन में परियोजना प्रभावित किसानों के साथ आयोजित विशेष बैठक में जिलाधिकारी ने कहा कि समीक्षा के दौरान यह सामने आया है कि कुछ मामलों में अदालत में केवल आठ से दस गुंठा भूमि को लेकर विवाद लंबित है, लेकिन पूरे भूखंड पर आपत्ति दर्ज कर दी गई है। इससे भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया प्रभावित हो रही है और किसानों को मुआवजा मिलने में अनावश्यक देरी हो रही है।
उन्होंने कहा कि ऐसी आपत्तियां प्रक्रिया को लंबा खींचने और किसानों को परेशान करने के उद्देश्य से की गई प्रतीत होती हैं। इसलिए प्रशासन इन मामलों का परीक्षण कर अनुचित आपत्तियों को हटाएगा और पात्र किसानों को शीघ्र उचित मुआवजा उपलब्ध कराया जाएगा।
पुणे जिलाधिकारी ने बताया कि पुरंदर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा परियोजना के लिए अब तक 1150 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी की जा चुकी है। शेष मामलों के त्वरित निपटारे के लिए उपजिलाधिकारी सतीश राउत प्रत्येक सोमवार और शुक्रवार को सासवड में उपस्थित रहकर संबंधित पक्षों की सुनवाई करेंगे।
प्रशासन का प्रयास है कि कानूनी विवादों के कारण किसानों का मुआवजा न्यायालय में अटका न रहे। इसके लिए दोनों पक्षों को आमने-सामने बैठाकर चर्चा कराई जा रही है और सहमति के आधार पर समाधान निकालने की कोशिश की जा रही है।
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अधिकारियों के अनुसार, अधिकांश विवादित मामलों में संबंधित पक्ष आपसी समझौते के लिए तैयार हो गए हैं। इन मामलों की अंतिम सुनवाई 29 जून को निर्धारित की गई है, जिसके बाद प्रशासन अंतिम निर्णय सुनाएगा। प्रशासन को उम्मीद है कि इससे भूमि अधिग्रहण की शेष प्रक्रिया भी तेजी से पूरी हो सकेगी और बहुप्रतीक्षित पुरंदर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा परियोजना को आगे बढ़ाने का मार्ग और अधिक सुगम होगा।